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नेपाल में बम धमाके में एक की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिमी नेपाल के प्रमुख औद्योगिक शहर नेपालगंज में आज सुबह हुए विस्फोट और फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि 17 लोग घायल हुए हैं. घायलों को पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनमें से दो लोगों की हालत गंभीर है. मरने वाला दूध बेचने वाला भारतीय व्यक्ति बताया गया है. एक स्थानीय पत्रकार राजेश सिंह ने बताया कि विस्फोट शनिवार सुबह आठ बजे त्रिभुवन चौक बाज़ार में हुआ. बताया गया है कि संदिग्ध माओवादी विद्रोहियों ने पुलिस की टुकड़ी पर बम फेंका था लेकिन बाज़ार में चलने वाले आम लोग इसकी चपेट में आ गए. प्रशासन, पुलिस और सेना ने शुक्रवार को बाज़ारों में दुकानों के ताले तोड़कर बंद को नाकाम करने की कोशिश की थी. समझा जाता है कि यह विस्फोट उसकी प्रतिक्रिया में हुआ है. नेपालगंज और आसपास के इलाक़ों में बाज़ार बंद है और सड़कों पर वाहन नहीं दिख रहे हैं. यह वह इलाक़ा है जिसे माओवादी विद्रोहियों का गढ़ माना जाता है और विद्रोहियों ने देश में आपातकाल लागू करने की कड़ी निंदा की है. नेपाल के सभी प्रमुख राजनीतिक नेता नज़रबंद हैं, उनके ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा नहीं चलाया जा रहा लेकिन उन्हें किसी से मिलने की अनुमति भी नहीं मिल रही. गिरिजा प्रसाद कोईराला, माधव नेपाल और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा उन नेताओं में शामिल हैं जो अपने-अपने घरों में नज़रबंद हैं. नेपाल में सेंसरशिप लागू है और भारतीय अख़बारों की बिक्री भी रोक दी गई है. नेपाली जनता ज़रूरी सामान के लिए बहराईच, बस्ती और गोरखपुर के भारतीय बाज़ारों में आ रही है. नेपाल में टेलीफ़ोन लाइनें पूरी तरह ठप हैं इसलिए पत्रकारों को समाचार भेजने में भारी दिक्कतें आ रही हैं. काठमांडू से बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल ने बताया है कि समाचार दिखाने वाले टेलीविज़न चैनलों का प्रसारण रोक दिया गया है और अख़बार भी समाचार देने से डर रहे हैं. |
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