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ज्ञानेंद्र ने सत्ता पर पकड़ मज़बूत की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने देश के शासन की बागडोर पूर्ण रुप से अपने हाथ में ले ली है. उन्होंने अपनी पकड़ मज़बूत करने के सँभालने के लिए एक 10 सदस्यीय मंत्रिमंडल की घोषणा की है. मंत्रिमंडल की अध्यक्षता नरेश स्वयं करेंगे. नेपाल नरेश ने मंगलवार को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार को बर्ख़ास्त कर देश में आपातकाल लागू कर दिया था. नए मंत्रिमंडल के सदस्यों को नरेश ज्ञानेंद्र का समर्थक माना जाता है. अभी उनकी इस घोषणा पर विपक्ष की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन माओवादी विद्रोहियों ने नरेश के क़दम के विरोध में बुधवार से तीन दिनों की हड़ताल का आहवान किया है. राज प्रासाद से जारी एक बयान में उम्मीद व्यक्त की गई है कि नए मंत्रिमंडल को हर तबके का समर्थन मिलेगा. राजधानी काठमांडू से बीबीसी हिंदी संवाददाता रेहान फ़ज़ल के अनुसार वहाँ जगह-जगह सैनिक तैनात देखे जा सकते हैं. आम लोग मुखर होकर अपनी बात कहने में हिचक रहे हैं. सैटेलाइट फ़ोन से अपनी रिपोर्ट देते हुए रेहान ने बताया कि वहाँ टेलीफ़ोन लाइनें अब भी ठप पड़ी हुई हैं. व्यापक आलोचना इस बीच सरकार बर्ख़ास्तगी के नेपाल नरेश के क़दम की देश और विदेश में व्यापक आलोचना हुई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने नेपाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की तुरंत बहाली की अपील की है.
भारत ने ज्ञानेंद्र के क़दम को वहाँ लोकतंत्र के लिए आघात बताया है. भारत ने माँग की है कि नेपाल में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें संविधान के अधीन मिले राजनीतिक अधिकारों के पालन की अनुमति दी जाए. अमरीका और ब्रिटेन ने भी नेपाल नरेश की आलोचना की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यमैन राइट्स वाच ने नेपाल में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है. नरेश ज्ञानेंद्र ने सरकार पर माओवादियों से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि सत्ता अपने हाथों में लेने का उनका क़दम तख़्तापलट नहीं है. हालाँकि बर्ख़ास्त प्रधानमंत्री देउबा समेत कई राजनीतिक नेताओं को नज़रबंद कर रखा गया है. |
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