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नेपाल नरेश ने सरकार बर्ख़ास्त की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया है और सत्ता अपने हाथ में लेने की घोषणा की है. ज्ञानेंद्र का कहना था कि वो ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि मंत्रिमंडल ने शांति स्थापना समेत अपने अन्य वायदे पूरे नहीं किए. देश में आपातकाल लगा दिया गया है और सड़कों पर हथियारबंद वाहन घूम रहे हैं. देश की सभी फ़ोन लाइनें काट दी गई हैं. ऐसी अपुष्ट ख़बरें हैं कि प्रधानमंत्री के आवास और अन्य सरकारी नेताओं के घरों के आसपास सैनिक घेरा डाल चुके हैं. नरेश ने एक बयान जारी कर कहा " मैने सरकार को बर्खास्त करने का फैसला किया क्योंकि यह सरकार अप्रैल महीने तक लोकतांत्रिक चुनाव के लिए आवश्यक तैयारियां करने में नाक़ाम रही. " तीन साल में यह दूसरा मौक़ा है जब महाराज ज्ञानेंद्र ने देश का नियंत्रण अपने हाथों में लिया है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने आरोप लगाया है कि सरकार संसदीय चुनाव कराने और देश में शांति स्थापना करने में नाकाम रही है. प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा को पिछले साल नियुक्त किया गया था और उन्हें चुनाव कराने और माओवादी विद्रोहियों के साथ बातचीत करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी. माओवादियों के साथ बातचीत के लिए देउबा ने 13 जनवरी तक की समयसीमा रखी थी लेकिन माओवादी वार्ता के लिए नहीं आए.
नेपाल में मौजूद बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि नरेश के इस कदम से देश में राजनीतिक संकट गहरा गया है. नया मंत्रिमंडल नेपाल नरेश ने कहा कि उनके नेतृत्व में जल्दी ही एक नए मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा. उन्होंने कहा " नया मंत्रिमंडल अगले तीन साल में शांति स्थापना करेगा और लोकतंत्र की बहाली की जाएगी. " बीबीसी संवाददाता का कहना है कि न केवल माओवादी गतिविधियों बल्कि अपहरण जैसे अपराधों से भी सख्ती से निपटने की बात कही जा रही है. ज्ञानेंद्र ने देश के राजनीतिक दलों पर स्वार्थपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वे नेपाली लोगों और देश के लिए कुछ नहीं सोच रहे हैं. उन्होंने कहा कि वो लोकतंत्र और बहुदलीय शासन के लिए पूरी तरह समर्पित हैं. शांति में नाक़ामी शेरबहादुर देऊबा को अक्तूबर, 2002 में बर्ख़ास्त कर दिया गया था लेकिन भारी प्रदर्शनों के बाद फिर से बहाल कर दिया गया था. ग़ौरतलब है कि माओवादी विद्रोही एक समाजवादी व्यवस्था की स्थापना के लिए 1996 से सशस्त्र लड़ाई कर रहे हैं. माओवादी चाहते हैं कि देश में संवैधानिक राजतंत्र का खात्मा हो. सन् 2001 में नरेश ज्ञानेंद्र को एक नाटकीय घटनाक्रम में उस समय सत्ता हासिल हुई जब उनके भाई नरेश बीरेंद्र सहित राजपरिवार के कई लोगों की हत्या राजकुमार दीपेंद्र ने कर दी. |
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