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लोकतंत्र के लिए भारी धक्का: भारत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र के सरकार को बर्ख़ास्त करने और सत्ता अपने हाथ में लेने के फ़ैसले पर चिंता जताई है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सर्ना ने संवाददाताओं को बताया कि नेपाल में उठाया गया कदम वहाँ लोकतंत्र के लिए एक धक्का है. उनका कहना था कि भारत ने नेपाल हमेशां से ही वहाँ बहुदलीय लोकतंत्र और संवैधानिक राजतंत्र के पक्ष में रहा है. भारत इन्हें ही नेपाल में स्थिरता के स्तंभ मानता है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि नेरश ज्ञानेंद्र ने इस सिद्धांत का उल्लंघन कर वहाँ अपनी ही सरकार बनाने का निर्णय किया है. भारत का मानना है कि नरेश ज्ञानेंद्र के फ़ैसले से मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और राजशाही के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. भारत ने माँग की है कि नेपाली प्रशासन राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और नेपाल के संविधान के अधीन राजनीतिक दलों को दिए गए अधिकारों का पालन करने की अनुमति दे. |
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