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उत्तरांचल के लाखों नेपाली चिंतित हैं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के घटनाक्रम से उत्तरांचल में रह रहे नेपाली समुदाय के लोग न केवल अपने रिश्तेदारों को लेकर चिंतित हैं बल्कि इनका ये भी मानना है कि इससे माओवादी गतिविधियां भी और बढ़ सकती हैं. दूसरी ओर देहरादून में ही रह रहे नेपाली राजवंश के लोग राजा के इस कदम को प्रजा के हित में लिया गया कदम मान रहे हैं. नेपाली मूल के करीब 8 लाख लोग उत्तरांचल में रहते हैं. सबसे ज्यादा संख्या में करीब दो लाख नेपाली अकेले देहरादून में ही बसे हुए हैं. इन सबका अभी भी नेपाल के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता है. तीज-त्योहार,शादी-मुंडन में यहां से भी लोग बेरोक-टोक वहां जाते है और वहां से भी इनके रिश्तेदार यहां आते हैं. देहरादून का गढ़ी-कैंट इलाका एक तरह से मिनी नेपाल ही है. आजकल यहां लगभग हर घर में देउबा सरकार की बर्खास्तगी और उसके बाद पैदा हुए हालात की ही चर्चा हो रही है. 60 साल के संगम थापा करीब 13 साल पहले नेपाल से यहां आकर बस गये थे. उनके बड़े भाई अभी भी नेपाल के पोखरा इलाके में रहते हैं. वे कहते हैं, "पता नहीं मेरा भाई और उसके बीवी-बच्चे किस हालात में हैं.फोन ही नहीं लगता. टीवी देखता रहता हूं शायद कोई खबर मिल जाए." भाई को लेकर उनकी चिंता जल्दी ही आवेश में बदल जाती हैं. वे राजा को भला बुरा कहती हैं. गढ़ी की ग्राम प्रधान सरोज थापा कहती हैं कि जो नेपाल नरेश कर रहे हैं वो अच्छा नहीं है,पहले भी उन्हीं की वजह से माओवादी बढ़े हुए हैं और अगर उनकी यही धांधली चलती रही तो ये और बढ़ जाएंगे. वे कहती हैं कि इससे रिश्तेदारों से मिलने आने जाने में परेशानी बढ़ जाएगी. गोरखा रेजीमेंट से रिटायर हुए मेजर गुरुंग कहते हैं, "राजा ने इस तरह से जो अपने हाथ में सारी सत्ता ले ली इससे वहां रहने वाले हमारे लोगों की तकलीफें और बढेंगी. राजशाही भी उन पर अत्याचार करेगी और माओवादी भी उन्हें परेशान करेगे. इसमें आम नेपाली पिस जाएगा.” वंशज असहमत
एक ओर जहां आम लोगों की चिंताएं इस तरह की हैं नेपाल के राजपरिवार के वंशजों की राय एक तरह से नेपाल नरेश की ही तरह है. इनमें से एक हनु शमशेर बहादुर राणा कहते हैं, "वैसे तो ये नेपाल का आंतरिक मामला है लेकिन राजा का ये कदम जनता के हित में ही होगा. राजा ने सत्ता अपने हाथ में तभी ली होगी जब उन्हें लगा होगा कि देउबा सरकार ठीक काम नहीं कर रही है." हाई अलर्ट इस बीच उत्तरांचल सरकार ने नेपाल से लगी 250 किमी सीमा पर हाई एलर्ट घोषित कर दिया है. राज्य के तीन जिलों पिथौरागढ़, ऊधमसिंहनगर और चंपावत की सीमाएं नेपाल से मिलती हैं और पिछले कुछ महीनों में इन इलाकों में माओवादी घुसपैठ की कई शिकायतें की गई हैं. राज्य की पुलिस महानिदेशक कंचन चौधरी के मुताबिक, "हमें आशंका है कि माओवादियों पर जब नेपाल में सेना का दबाव बढ़ेगा वो भागकर यहां आ सकते हैं और गड़बड़ी फैला सकते हैं इसलिये यहां चौकसी बढ़ाई गई है. खास तौर पर रात में निगरानी के लिये पुलिस को विशेष उपकरण दिये गये हैं." पिथौरागढ़ और चंपावत से इस तरह की खबरें भी आ रही हैं कि न केवल माओवादी बल्कि वहां के कुछ नेता, छात्र और व्यापारियों को यहां आते देखा गया है हांलाकि इसके पुख्ता आंकड़े नहीं हैं. वैसे भी ये सीमा हमेशा से इतनी खुली और सरहद के दोनों ओर के लोगों के लिये इतनी सुगम रही है कि इनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिये एक चुनौती है. |
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