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नेपाली राजनीतिक दलों का गठबंधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल लोकतंत्र की बहाली के लिए देश के छह राजनीतिक दलों ने मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाया है. एक फरवरी को नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने मौजूदा सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी जिसके बाद राजनीतिक दलों ने ये कदम उठाया है. राजनीतिक दलों ने संयुक्त मोर्चा बनाने की घोषणा भारत की राजधानी दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में की. नेताओं का कहना था कि नरेश का कदम बिल्कुल ग़लत है और वो इसके ख़िलाफ संघर्ष करेंगे. नए फोरम या संयुक्त मोर्चे में नेपाली कांग्रेस, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी जैसे प्रमुख दल हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मदद और ख़ासकर भारत से मदद की अपील की है. फोरम ने भारत से अपील की कि वो नेपाल मे माओवादियों को कुचलने के लिए राजशाही को अब तक जो सैनिक मदद दे रही थी उसे बंद किया जाए. फोरम द्वारा जारी बयान में कहा गया " हम नरेश को राजशाही चलाने नहीं देंगे. अभी तक संवैधानिक राजशाही को लेकर हम जो कुछ भी अच्छा सोचते थे. नरेश के हालिया कदम ने उस पर पानी फेर दिया है. " हालांकि इन नेताओं ने उन सवालों का जवाब नहीं दिया कि क्या वो नेपाल में पूर्ण रुप से राजशाही की समाप्ति चाहते हैं. या फिर वो अपने संघर्ष में माओवादियों से मदद लेंगे या नहीं. फोरम का कहना था कि उन्होंने राष्ट्रीय हित में अपने मतभेदों को फिलहाल दरकिनार कर दिया है. नेपाली राजदूत की मुलाक़ात इस बीच भारत में नेपाल के राजदूत कर्ण धोज अधिकारी ने विदेश मंत्री नटवर सिंह से मुलाक़ात की है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी कर कहा कि मुलाक़ात के दौरान विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत चाहेगा कि नेपाल में राजनीतिक कैदियों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए कदम उठाए जाएं. बयान के अनुसार भारत ने कहा कि वो चाहेगा कि नेपाल में बहुदलीय लोकतंत्र की बहाली की दिशा में कुछ किया जाए और वर्तमान समस्या को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाई जाए. |
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