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नेपाल में फ़ोन लाइनें फिर शुरु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में एक हफ़्ते बाद फ़ोन लाइनें फिर शुरु कर दी गई हैं. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने गत सप्ताह सरकार को बर्खास्त कर सत्ता ख़ुद संभाल ली थी और इसके बाद से नेपाल का संपर्क पूरी दुनिया से काट दिया गया था. ख़बरें हैं कि इंटरनेट तो फिर से काम कर रहा है लेकिन मोबाइल फ़ोन अभी भी काम नहीं कर रहे हैं. राजा ज्ञानेंद्र ने जिस तरह सरकार को बर्खास्त कर आपातकाल की घोषणा की और नेपाल का संपर्क दुनिया से काटे रखा उसकी नेपाल के भीतर और बाहर भी निंदा की गई है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह माओवादियों की समस्या से नहीं निपट पा रही है. मानवाधिकार संगठन इस क़दम का विरोध भी करने जा रहे हैं. संपर्क जैसे ही नेपाल में फ़ोन संपर्क बहाल किए गए लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क करने में लग गए. ख़ासकर वे लोग जो देश से बाहर रहे अपने परिचितों से पिछले एक हफ़्ते से संपर्क ही नहीं कर पा रहे थे. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एक गृहणी ने कहा, "मुझे अमरीका में रह रहे अपने बेटे से बात करके बहुत ख़ुशी हुई...नेपाल की ख़बरें सुनने के बाद से वह चिंतित था लेकिन वह हमसे संपर्क नहीं कर पा रहा था." उल्लेखनीय है कि आपातकाल लगने के बाद प्रेस पर सेंसरशिप भी लगा दी गई थी और लोगों को ख़बरें भी नहीं मिल पा रही थीं. माओवादी कैंपों पर हमला रॉयटर समाचार एजेंसी के अनुसार नेपाली सेना ने हैलिकॉप्टर से माओवादी कैंपों पर हमला किया है. ख़बरों के अनुसार देश के पश्चिमी भाग में ये हमले किए गए हैं. इससे पहले सोमवार को राजा ज्ञानेंद्र के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा था कि वह माओवादियों के सामने बिना शर्त वार्ता का प्रस्ताव रखने जा रही है. इस बातचीत के लिए सरकार ने एक टीम भी गठित की थी. |
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