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'जाति पंचायतों को पंचायत न कहा जाए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर का मानना है कि पंचायती राज व्यवस्था का मज़बूत होना राज्य सरकारों की नीयत पर निर्भर है. उन्होंने यह भी कहा कि एक क़ानून बनाकर सरकारी व्यवस्था के तहत आने वाली पंचायतों के अलावा भारत में पारंपरिक रूप से चली आ रही सामुदायिक पंचायतों को 'पंचायत' शब्द के प्रयोग से वंचित करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जाति पंचायतों या कुछ और पंचायतों की ओर से जो अमानवीय और सामाजिक विषमताओं पर आधारित निर्णय लिए जाते रहे हैं उनसे पंचायतों की छवि पर असर पड़ता है. पंचायती राज मंत्री बीबीसी हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि पंचायती राज मंत्रालय इस दिशा में सबसे ज़्यादा प्रयास कर रहा है कि किस तरह से पंचायतों के लिए केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं के तहत भेजा जाने वाला पैसा पंचायतों तक पहुँचे और इस पैसे का पंचायतें किस तरह से इस्तेमाल कर सकें. एक सवाल में जब उनसे पूछा गया कि क्या भ्रष्टाचार के कारण पंचायती राज व्यवस्था के तहत योजनाओं के नाम पर भेजे जा रहे पैसे का लाभ गाँव के प्रभावशाली लोगों तक सीमित नहीं हो रहा, उन्होंने कहा कि इसके लिए अधिकारों के विकेंद्रीकरण पर बल देने की ज़रूरत है. पारदर्शिता ज़रूरी उन्होंने कहा, "योजनाओं को बनाने ओर लागू करने में पूरी पंचायत मिलकर प्रस्ताव पारित करे. ग्राम सभा, वार्ड सभा और आम लोगों की ओर से पंचायत को आज्ञा और स्वीकृतियाँ दी जाएँ. साथ ही सामाजिक अंकेक्षण और औपचारिक अंकेक्षण यानी ऑडिट की जाए. इन तरीकों से ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी." उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि महिलाओं की पचांयतों में भागीदारी केवल सुरक्षित जगहों की वजह से ही बढ़ी है बल्कि 33 प्रतिशत स्थान दिए जाने पर महिलाएँ 41 प्रतिशत की भागीदारी दे रही हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पंचायतों में प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल देना होगा और कहा कि इसके लिए तकनीक के इस्तेमाल से परहेज नहीं करना चाहिए. अय्यर ने बताया कि दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में सेटेलाइट के ज़रिए प्रशिक्षण का काम किया गया और वहाँ से काफ़ी अच्छा प्रशिक्षण मिलने की बात सामने आई है. ऐसे में बाक़ी जगहों पर भी इस तरह के प्रयोग किए जाने चाहिए. अय्यर राज्य सरकारों को दोष देने के साथ ही केंद्र सरकार के पंचायतों के प्रति सकारात्मक रूख़ का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि हाल की रोज़गार गारंटी, सूचना का अधिकार और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी कई योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र सरकार ने पंचायतों को अहम भूमिका दी है. | इससे जुड़ी ख़बरें पंचायत चुनाव के दूसरे दौर में हिंसा18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस पंचायत चुनाव में 90 फ़ीसदी वोट17 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस चुनाव लड़ना हो तो शौचालय बनवाइए04 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस निजी एफ़एम पर ख़बरें अभी नहीं22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'क्वात्रोची को कोई क्लीनचिट नहीं दी'15 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीर सीमा खोलने की हिमायत15 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'टकराव का कारण है कोर्ट की आलोचना'28 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'जाँच एजेंसियाँ पूरी तरह स्वतंत्र हों'24 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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