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चुनाव लड़ना हो तो शौचालय बनवाइए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि ग्राम पंचायतों के लिए उन लोगों को चुनाव नहीं लड़ने दिया जाना चाहिए जिन्होंने अपने घर में शौचालय नहीं बनवाए हैं. ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद ने सभी मुख्यमंत्रियों को एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि उन्हें पंचायती राज क़ानून में संशोधन करके इसे लागू करना चाहिए. ग्रामीण विकास मंत्रालय का तर्क है कि लोग खुले स्थानों पर शौच के लिए जाते हैं इससे न केवल पानी प्रदूषित होता है बल्कि कई तरह की बीमारियाँ फैलती हैं. मंत्री का कहना है कि इसके बिना संपूर्ण ग्राम स्वच्छता अभियान पूरा नहीं हो सकता. भारत की 70 फीसदी आबादी पाँच लाख पचास हज़ार गाँवों में बसती है. बीबीसी से बात करते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि इस समय देश में 29 लाख 20 हज़ार ग्राम पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि हैं. और इस तरह के प्रतिबंध के बिना इसे लागू करना संभव नहीं दिखाई देता. उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ग्राम पंचायतों के कई चुने हुए सदस्यों के घरों पर शौचालय नहीं हैं वे भी शौच के लिए खुले में जाते हैं." लेकिन क्या इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय गाँवों को धन भी मुहैया करवाएगी? इस सवाल पर रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, "संपूर्ण ग्राम स्वच्छता अभियान के तहत देश के 522 ज़िलों में इसके लिए 15 से 20 करोड़ रुपए दिए गए हैं. और जो ज़िले अच्छा प्रदर्शन करेंगे उन्हें 30 से 50 लाख रुपए तक का ईनाम भी दिया जाएगा." उनका कहना है कि इसी के सहारे 2010 तक खुले में शौच को रोका जा सकेगा. कुछ राज्यों ने पहले ही क़ानून संशोधित करके इसका प्रावधान कर दिया है लेकिन अब केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय चाहता है कि दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी ऐसा करें. |
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