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निजी एफ़एम पर ख़बरें अभी नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी का कहना है कि निजी एफ़एम रेडियो स्टेशनों को अभी कम से कम दो-तीन साल ख़बरें प्रसारित करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि रेडियो की पहुँच पूरे देश में है और ये संवेदनशील मामला है कि रेडियो पर किस तरह की ख़बरें प्रसारित होती हैं. उल्लेखनीय है कि इस समय सिर्फ़ आकाशवाणी के एफ़एम स्टेशनों से समाचार प्रसारित की जाती हैं और निजी एफ़एम स्टेशनों को इसकी अनुमति नहीं है. लेकिन इस कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ पत्रकार मधूसूदन आनंद ने कहा कि जब लोग बीबीसी, वॉयस ऑफ़ अमरीका, रेडियो बीजिंग सब कुछ सुन रहे हैं तो एफ़एम पर ख़बरों को प्रसारित न करने का औचित्य समझ में नहीं आता. इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार कमलेश्वर ने कहा कि दो साल बड़ा समय होता है लेकिन सवाल विश्वसनीयता का है. जिन्हें एफ़एम चलाने का मौक़ा दिया गया है वो ग़ैरज़िम्मेदार नहीं है, लेकिन विश्वसनीयता बनाने के लिए उन्हें मौक़ा देना चाहिए और इसके लिए नियम क़ानून बनाए जाने चाहिए. प्रियरंजन दासमुंशी ने बताया कि टेलीविज़न के कार्यक्रमों पर नज़र रखने के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर 'दर्शक फ़ोरमों' का गठन करने जा रहे हैं. ख़बरें सूचना और प्रसारण मुंशी ने कहा, "रेडियो की पहुँच पूरे देश में है और लोग बीबीसी, रेडियो तेहरान सब कुछ सुनते हैं, चर्चा करते हैं लेकिन लोगों में अभी भी इतना देशप्रेम है कि आख़िर भरोसा आकाशवाणी पर करते हैं." उनका कहना था कि भारत में जितनी विविधता है उसमें एक ज़िम्मेदार रेडियो चलाना ब्रिटेन, अमरीका और फ़्रांस की तुलना में ज़्यादा बड़ी चुनौती है. उनका कहना था कि इस बात का ध्यान रखना होगा कि रेडियो पर दी जा रही ख़बरें सही हैं और उसमें ऐसी कोई बात न कह दी जाएँ जिससे समाज में हिंसा भड़क जाए. केंद्रीय मंत्री दासमुंशी ने कहा कि देखना होगा कि ऐसा न हो कि देश के ज़्यादातर निजी एफ़एम स्टेशनों पर ख़बरों के प्रसारण के लिए किसी एक देश की कंपनी का कब्ज़ा न हो जाए. उन्होंने कहा कि तूफ़ान का सामने करने के लिए ज़रुरी है कि सभी खिड़कियों की मज़बूती जाँच ली जाए. दर्शक फ़ोरम इस सवाल पर कि चुनावी सर्वेक्षणों और अपराध संबंधी ख़बरों को देखने के बाद क्या उन्हें नहीं लगता कि टेलीविज़न चैनलों पर नज़र रखने के लिए कोई नियामक संस्था बनानी चाहिए, दासमुंशी ने कहा कि वे मीडिया के लिए निगरानी और नियमन जैसे क़दमों के ख़िलाफ़ हैं.
लेकिन उन्होंने कहा कि एफ़एम रेडियो पर प्रसारित होने वाली सामग्री पर निगरानी रखने के लिए एक 'कटेंट मॉनिटरिंग मैकेनिज़्म' बना रहे हैं. चुनावी सर्वेक्षणों के बारे में मधूसूदन आनंद ने कहा कि इसके लिए तो चैनलों को ख़ुद पर नियंत्रण करना होगा लेकिन एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने के बारे में ज़रुर सोचना चाहिए. उधर कमलेश्वर का मत था कि किसी भी सर्वेक्षण के आधार पर मतदाता का मत प्रभावित नहीं होता. अपराध संबंधी ख़बरों पर चिंता जताते हुए दासमुंशी ने कहा कि वे जल्दी ही राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर दर्शक फ़ोरमों का गठन करने जा रहे हैं जो उपभोक्ता फ़ोरमों की तरह क़ानूनी अधिकारों के साथ टेलीविज़न के कार्यक्रमों पर नज़र रखेंगी. लेकिन सभी अतिथियों ने ख़ुफ़िया कैमरों की सहायता से की जा रही रिपोर्टिंग का पक्ष लेते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है. दूरदर्शन सूचना और प्रसारण मंत्री ने माना कि दूरदर्शन में इतने दिनों में जिस तरह की क्षमता विकसित होनी चाहिए थी, नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि प्रसार भारती को आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर होना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अभी भी दो तिहाई बजट सरकार से आता है. उन्होंने माना कि प्रसार भारती में बहुत कमियाँ है. अपनी जाँच के आधार पर उन्होंने कहा कि 90 के बाद से टेकनिकल इंजीनियरिंग विभाग में कोई भर्ती नहीं की गई, स्टेशन डायरेक्टर टेकनिकल व्यक्ति होगा या ग़ैर टेकनिकल इस पर बहस होती रही और उपकरणों का रखरखाव ठीक नहीं है. उन्होंने कहा, "मैं दावा नहीं कर रहा हूँ कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन 31 मई तक दूरदर्शन नए रुप में सामने आ जाएगा." कमलेश्वर ने कहा कि यह फ़ैसला करने का अधिकार दूरदर्शन और आकाशवाणी के पास होना चाहिए कि वे भ्रष्टाचार की कौन सी ख़बरें कैसे दिखाएँगे. मधूसूदन आनंद ने कहा कि इस बात के बारे में विचार करना चाहिए कि क्यों दूरदर्शन दूसरे निजी चैनलों की तरह धन अर्जित नहीं कर पा रहा है. तीनों अतिथि इस बात से सहमत थे कि भारत में मीडिया स्वतंत्र और पारदर्शी है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में एफ़एम पर समाचार की अनुमति30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस प्रसार भारती की स्वायत्तता बढ़ाई जाएगी06 जून, 2004 | भारत और पड़ोस रेडियो के लिए कुछ नई सिफ़ारिशें17 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस 'भारतीय चैनल वापस लाओ' | भारत और पड़ोस लाइसेंसिंग प्रक्रिया बदले: सरमा | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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