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नेपाल में एफ़एम पर समाचार की अनुमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने ग़ैर-सरकारी एफ़एम रेडियो स्टेशनों के समाचार प्रसारित करने पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध को ग़लत ठहराया है. इस आदेश के बाद ये एफ़एम रेडियो स्टेशन दोबारा समाचार प्रसारित कर पाएँगे. ये रोक सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को लेकर दायर एक याचिका पर अपना अंतिम फ़ैसला सुनाने से पहले लगाई है. फ़रवरी में नेपाल नरेश के सत्ता अपने हाथ में लेने के बाद, पिछले महीने मीडिया संबंधित विवादास्पद क़ानून के तहत इन रेडियो स्टेशनों के समाचार प्रसारण पर ये प्रतिबंध लगाया गया था. सरकार एफ़एम रेडियो स्टेशनों पर माओवादी संघर्ष को बढ़ावा देने का आरोप लगाती है और दो लोकप्रिय स्टेशनों पर क़ानून का उल्लंघन करने के लिए छापे भी मारे गए थे. नेपाल में लगभग 40 एफ़एम रेडियो स्टेशन हैं. देश में स्वतंत्र रूप में समाचार प्रसारण का ये प्रमुख स्रोत हैं. इस प्रतिबंध से संबंधित कई अन्य याचिकाओं पर अब भी न्यायालय में सुनवाई होनी है. इस विवादस्पद क़ानून के तहत नेपाल नरेश और उनके परिवार की आलोचना करना भी ग़ैर-क़ानूनी है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत ने नेपाल में हुए समझौते को सराहा23 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में राजनेता-विद्रोही एकजुट हुए22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस माओवादियों से गुपचुप मिले नेपाली नेता18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में नगरनिकाय चुनाव की घोषणा09 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में भारतीय नेताओं को काले झंडे28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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