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नेपाल में राजनेता-विद्रोही एकजुट हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में देश की सात विपक्षी पार्टियों ने राजा ज्ञानेंद्र के विरोध और देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए माओवादी विद्रोहियों के साथ एक समझौता किया है. इन राजनीतिक दलों ने कहा है कि जब तक नेपाल में तबतक शांति या प्रगति नहीं हो सकती जबतक राजा ज्ञानेंद्र की निरंकुश सत्ता का अंत नहीं होता और लोकतंत्र की वापसी नहीं होती. लेकिन इन पार्टियों ने कहा है कि इस सहमति को अमल में तभी लाया जाएगा जब विद्रोही हथियार त्याग देंगे. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के पी ओली ने कहा,"अभी भी माओवादियों ने हथियार नहीं त्यागा है और हम शांतिपूर्ण आंदोलन में विश्वास करते इसलिए अभी उनके साथ हमारी संयुक्त कार्रवाई या संयुक्त आंदोलन जैसा कुछ नहीं होगा." माओवादी विद्रोहियों के नेता प्रचंड ने समाचार संगठनों को ई-मेल भेजकर सहमति का ब्यौरा दिया है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने इस वर्ष के आरंभ में देश की सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. सहमति नेपाल में सात विपक्षी दलों और माओवादी विद्रोहियों के साथ 12 सूत्री एक कार्यक्रम पर सहमति हुई. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के पी ओली ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों ने माओवादियों से आग्रह किया कि वे अपने विचारों में बदलाव लाएँ. उन्होंने कहा,"हमने कहा कि जो माओवादी हिंसा करते हैं और और दूसरी पार्टियों के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करते हैं, उन्हें अपनी नीतियों और विचारों में बदलाव लाना चाहिए." कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि माओवादियों ने माना है कि वे प्रतिस्पर्द्धात्मक बहुदलीय व्यवस्था को मानेंगे और अगर उनको रास्ता मिला तो वे शांतिपूर्ण राजनीति में भी शामिल होंगे. के पी ओली ने कहा कि माओवादियों को अगर रास्ता दिया गया तो वे हिंसा भी छोड़ सकते हैं. माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि विद्रोही अपने दल को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रख सकते हैं बशर्ते संसद के लिए चुनाव करवाए जाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें माओवादियों से गुपचुप मिले नेपाली नेता18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में नगरनिकाय चुनाव की घोषणा09 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में भारतीय नेताओं को काले झंडे28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस शाही सरकार से बात नहीं करेंगे माओवादी04 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नरेश ज्ञानेंद्र की ताज़ा पेशकश30 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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