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नरेश ज्ञानेंद्र की ताज़ा पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में जहाँ नरेश ज्ञानेंद्र ने विपक्षी दलों के सशर्त बातचीत शुरु करने की पेशकश की है वहीं नेपाली कांग्रेस ने अपनी 60 साल पुरानी नीति में बदलाव करते हुए घोषणा की है अब उसकी संवैधानिक राजतंत्र की व्यवस्था में कोई आस्था नहीं रही. नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा है कि वे विपक्ष के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन राजनितिक दलों को सुशासन, आर्थिक अनुशासन और 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध होना होगा. नेपाल नरेश सरकार को बर्ख़ास्त करने और सत्ता अपने हाथ में लेने के फ़ैसले को माओवादियों के ख़िलाफ़ लड़ाई के साथ जोड़ते हुए, हमेशा से ही सही ठहराते आए है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नेपाल का राजनीतिक संकट विद्रोहियों को फ़ायदा पहुँचा सकता है. उधर संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में कई जगह चल रहे गृह युद्ध में 'लोगों के गायब होने' यानि सरकार या विद्रोहियों का निशाना बनने पर चिंता जताई है. नेपाल में 1996 से माओवादियों का विद्रोह शुरु होने के बाद से 12 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. साठ साल पुरानी नीति नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने घोषणा की है कि अब उसकी संवैधानिक राजतंत्र की व्यवस्था के प्रति आस्था नहीं रही. इस बारे में औपचारिक संशोधन प्रस्ताव अगले हफ़्ते होने वाले पार्टी के आम अधिवेशन में पारित किया जाएगा. पार्टी प्रवक्ता अर्जुन नरसिंह का कहना था कि इसका मतलब ये हुआ कि अब नेपाली कांग्रेस राजतंत्र से संबंधित मामलों पर निरपेक्ष रहेगी. महत्वपूर्ण है कि पार्टी पिछले 60 साल से नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र व्यवस्था का समर्थन करती आई है. |
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