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'नेपाल को सैनिक सहायता बहाल न करें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गिरिजा प्रसाद कोइराला ने भारत से अपील की है कि वह नेपाल को सैनिक सहायता बहाल न करे. उन्होंने कहा कि इससे राजा ज्ञानेंद्र की निरंकुश व्यवस्था को बल मिलेगा. बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में हिस्सा लेते हुए कोइराला ने नेपाल में माओवादी समस्या के लिए राजा को ज़िम्मेदार ठहराया. इस कार्यक्रम में नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के महासचिव माधव कुमार नेपाल ने भी हिस्सा लिया. कोइराला ने कहा, "आज नेपाल में सात मुख्य राजनीतिक दलों ने देश में लोकतंत्र की बहाली और लोगों के अधिकार के लिए हाथ मिला लिया है. ऐसी स्थिति में जब नागरिक अधिकारों के लिए बाहर आ रहे हैं, भारत का सैनिक सहायता बहाल करना ठीक नहीं होगा." समर्थन गिरिजा प्रसाद कोइराला तीन बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि नेपाल में निरंकुश व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में कोई भी क़दम नहीं उठाना चाहिए. कोइराला ने लोकतंत्र की बहाली के लिए सहयोग और नैतिक समर्थन के लिए भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धन्यवाद दिया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके लिए भविष्य में भी सभी का समर्थन मिलेगा. राजा ज्ञानेंद्र के इस बयान पर कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियाँ माओवादी हिंसा से निपटने में नाकाम रही, कोइराला ने कहा कि इसके लिए राजा ज़िम्मेदार है. उन्होंने कहा, "जब देश में सिर्फ़ दो स्थानों पर माओवादियों का प्रभाव था, हमने बार-बार राजा से अनुरोध किया था कि वे माओवादियों के ख़िलाफ़ सैनिक शक्ति का इस्तेमाल करें लेकिन राजा ऐसा करने से हिचकिचा रहे थे. अब वे राजनीतिक दलों को इसके लिए ज़िम्मेदार कैसे ठहरा सकते हैं." कोइराला ने कहा कि राजनीतिक दलों को ज़िम्मेदार ठहराना आसान है लेकिन आज की स्थिति पर राजा क्या कहेंगे, उन्होंने तो पूरे देश को जेल में बदल दिया है. उन्होंने कहा कि आज माओवादी समस्या का कोई सैनिक हल नहीं निकल सकता, इसका राजनीतिक समाधान ही संभव है. कोइराला ने कहा कि माओवादियों को बातचीत के लिए बुलाया जाना चाहिए और उन्हें इस बात के लिए राज़ी करना चाहिए कि वे हथियार डाल दें. भूल उन्होंने तीन महीने पहले लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त करने के राजा के फ़ैसले को सबसे बड़ी भूल बताया.
कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के महासचिव माधव कुमार नेपाल ने कहा कि उन्हें इस बात की पक्की जानकारी है कि भारत ने राजा ज्ञानेंद्र को सैनिक सहायता बहाल करने का कोई आश्वासन नहीं दिया है. उन्होंने कहा, "नेपाल स्थित भारतीय राजदूत ने मुझे बताया है कि लोकतांत्रिक शक्तियों का समर्थन करने के भारत के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है." माधव कुमार नेपाल ने भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे मौजूदा नेपाली प्रशासन के बयान से बहकावे में न आएँ. एक सवाल के जवाब में कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि राजा ने उन्हें प्रधानमंत्री का पद देने की पेशकश की है, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का ऐसी सरकार में शामिल होने का सवाल ही नहीं है जो राजा के नियंत्रण से चले. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने पहले राजा के साथ सहयोग करके ग़लती की और हमें इस बात को समझना चाहिए. |
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