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नेपाल में प्रेस स्वतंत्रता के लिए रैली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की राजधानी काठमांडू में लगभग एक हज़ार पत्रकारों ने प्रेस की आज़ादी की माँग के साथ मंगलवार को रैली निकाली है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के फ़रवरी में आपातकाल की घोषणा के साथ ही सत्ता अपने हाथों में ले ली थी और डिया पर सेंसरशिप और अनेक प्रतिबंध लगा दिए गए थे. हालाँकि तीस अप्रैल को आपातकाल हटा लिया गया है लेकिन अब भी अनेक प्रतिबंध जारी हैं. मीडिया पर नज़र रखनेवाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था का कहना है कि नेपाल में पत्रकारों के साथ हिंसा रोज़ाना की सामान्य बात बन गई है. हालाँकि काठमांडू के अनके हिस्सों में प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध हैं लेकिन पुलिस ने पत्रकारों के प्रदर्शन में कोई हस्तक्षेप नहीं किया. पत्रकार नारे लगा रहे थे- पत्रकारों को रिहा करो, प्रेस स्वतंत्रता बहाल करो. नेपाल नरेश के सत्ता अपने हाथ में लेने के बाद मीडिया पर महाराज ज्ञानेंद्र, सरकार और सुरक्षा बलों की आलोचना करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. स्वतंत्र रेडियो प्रसारणों पर प्रतिबंध लग गया था. पत्रकारों का कहना है कि इस प्रतिबंध से एक हज़ार से अधिक पत्रकार बेरोज़गार हो गए हैं. प्रतिबंध नेपाल पत्रकार संघ के अध्यक्ष तारानाथ दाहल का कहना था, "नेपाल में पत्रकारों पर अब भी प्रतिबंध लगा हुआ है." ग़ौरतलब है कि दो मई तीन मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस भी है और इसी दिन नेपाल में पत्रकारों ने प्रदर्शन किया है. हालाँकि कुछ दिन पहले नेपाल नरेश ने देश से आपातकाल हटा लिया है लेकिन अब भी सभी शक्तियाँ उनके ही हाथों में हैं. एक फ़रवरी को नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने शेर बहादुर देउबा की सरकार को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. इसके पहले रविवार को मई दिवस के मौक़े पर हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने देश में लोकतंत्र की तत्काल बहाली और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग की थी. |
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