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माओवादियों से गुपचुप मिले नेपाली नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के शीर्ष राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने देश में राजशाही को ख़त्म करने के लिए और लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक अभियान छेड़ने के मकसद से भारत में माओवादी नेतृत्व से मुलाक़ात की है. नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने शुक्रवार को ही भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है. बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़ भारत में किसी जगह पर भारत के माओवादी नेताओं और नेपाल के राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच यह मुलाक़ात हुई. फरवरी 2005 में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने देश में आपातकाल लागू कर दिया था. इस घटना के बाद से यह पहला मौक़ा है जब नेपाली नेताओं और माओवादी विद्रोहियों के बीच बातचीत हो रही है. नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता माधव कुमार नेपाल ने बीबीसी को बताया कि पिछले कुछ दिनों में माओवादी नेताओं से संवाद की स्थिति बनी है. हालाँकि उन्होंने बैठक की जगह और इसमें शामिल होने वालों के बारे में बताने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी ने माओवादियों से बातचीत की है और हम एक समझ तक पहुँचे हैं. हम इस समझ को माओवादियों और सातों साथी राजनीतिक दलों तक बढ़ाने का प्रयास करेंगे. हमारा लक्ष्य है कि नेपाल से राजशाही ख़त्म हो और इसके लिए हम सभी अपने स्तर पर संघर्ष करेंगे." गुप्त बैठक हालाँकि भारत सरकार के हवाले से भारत में ऐसी किसी भी बैठक के बारे में कोई भी जानकारी होने से साफ़ इंकार किया गया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा कि इस बारे में उनके पास अभी कोई जानकारी नहीं है और सूचना मिलते ही इसके बारे में अवगत कराया जाएगा. उधर नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार कनक दीक्षित ने बीबीसी को बताया कि राजनीतिक दलों और माओवादियों के इस प्रयास को निश्चित रूप से जनसमर्थन हासिल होगा. उन्होंने कहा, "बैठक कहाँ हो रही है, यह महत्वपूर्ण नहीं है. एक नेपाली दूसरे नेपाली से बात कर रहा है, इसमें क्या परेशानी है और लोग इसका स्वागत करेंगे." ग़ौरतलब है कि नेपाल के वर्तमान राजनीतिक संकट का हल निकालने के लिए माओवादी विद्रोहियों और नेपाल के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि पिछले कुछ महीनों से लगातार भारतीय राजनीतिक दलों से मुलाक़ात करते रहे हैं. ऐसे में, यह बैठक उस समय में हुई है, जबकि नेपाल नरेश पर देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार दबाव पड़ रहा है. काठमांडू से एक विश्लेषक ने बीबीसी को बताया कि माओवादियों और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के बीच एक समझ ऐसे समय में बनी है जबकि नेपाल नरेश राजनीतिक दलों को बुलावा देने वाले थे. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल नरेश से क़दम उठाने की अपील13 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'नेपाल में व्यवस्था बिखराव के कगार पर'06 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने सैनिकों को रिहा किया15 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'नेपाल नरेश का संयुक्त राष्ट्र दौरा रद्द'06 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस शाही सरकार से बात नहीं करेंगे माओवादी04 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में एफ़एम रेडियो पर छापा22 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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