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'नेपाल में व्यवस्था बिखराव के कगार पर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल का दौरा कर रहे यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने चेताया है कि देश की राजनीतिक व्यवस्था बिखराव के कगार पर है. प्रतिनिधि मंडल के नेता टॉम फ़िलिप्स ने कहा है कि संवैधानिक शक्तियों के अभाव में सारे सरकारी संस्थान बेकार हो जाएँगे. नेपाल में इसी वर्ष फ़रवरी महीने में राजा ज्ञानेंद्र ने निर्वाचित सरकार को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथ में ले ली थी, तब राजा ने कहा था कि वे माओवादी हिंसा निबटने में राजनीतिक नेताओं को नाकामी की वजह से ऐसा कर रहे हैं. यूरोपीय प्रतिनिधि मंडल ने माओवादी छापामारों की भी आलोचना की है और कहा है कि वे बच्चों को लड़ाई में झोंकना बंद करें. इस प्रतिनिधि मंडल की तीन दिन की यात्रा की समाप्ति पर टॉम फिलिप्स ने पत्रकारों से बातचीत में नेपाल की स्थिति पर गहरी चिंता प्रकट की, उन्होंने नेपाल सरकार से कहा कि वह जल्द से जल्द बहुदलीय लोकतंत्र की दिशा में लौटे. उन्होंने कहा कि नेपाल में राजा के सत्ता हथियाने के बाद हथियारबंद टकराव की शांतिपूर्ण समाप्ति के आसार धूमिल हो गए हैं. फिलिप्स ने कहा कि राजा ने माओवाद की समस्या के नाम पर सत्ता अपने हाथ में ली है लेकिन लोकतंत्र की समाप्ति से माओवाद को बढ़ावा ही मिल रहा है. काठमांडू स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि यूरोपीय संघ नेपाल को आर्थिक सहायता देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति है इसलिए नेपाल की सरकार के लिए उनकी अनदेखी करना आसान नहीं होगा. टॉम फ़िलिप्स ने मानवाधिकार हनन का मामला भी उठाया और कहा कि सरकार के अधिकारियों और सुरक्षा बलों को यह समझना चाहिए कि वे क़ानून से ऊपर नहीं हैं और उन्हें भी दंड मिल सकता है. उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में माओवादी विद्रोहियों की हिंसक नीतियों की निंदा की और कहा कि उनकी विचारधारा नेपाल की समस्याओं का हल नहीं है. उन्होंने कहा कि तमाम ख़तरों के बावजूद नेपाल की सरकार को चाहिए कि वह माओवादी विद्रोहियों के युद्धविराम के प्रस्ताव का सकारात्मक उत्तर दे. नेपाल में पिछले नौ वर्षों से चल रहे माओवादी संघर्ष में अब तक 12 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. |
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