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शाही सरकार से बात नहीं करेंगे माओवादी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने एकतरफ़ा संघर्ष विराम घोषित करने के बाद भविष्य में किसी भी बातचीत के लिए शर्त रखी है. माओवादी विद्रोहियों के एक प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने बीबीसी को बताया कि वे राजा ज्ञानेंद्र की ओर से नियुक्त सरकार के किसी भी प्रतिनिधि से बात नहीं करेंगे. उन्होंने बताया कि माओवादी सिर्फ़ विपक्षी नेताओं, स्थानीय नेताओं और राजनयिकों से ही बातचीत करेंगे. शनिवार को ही माओवादियों ने एकतरफ़ा संघर्ष विराम की घोषणा की थी. दो साल पहले सरकार के साथ बातचीत टूट जाने के बाद माओवादियों ने पहली बार ये पहल की है. नेपाल के विपक्षी नेताओं और उद्योगपतियों ने माओवादियों की घोषणा का संभल कर स्वागत किया है. लेकिन सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालाँकि सरकार के एक मंत्री ने बताया है कि माओवादियों की घोषणा पर विचार-विमर्श चल रहा है. एक अन्य घटना में राजधानी काठमांडू में राजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे कई नेताओं और उनके समर्थकों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. राजशाही माओवादि विद्रोहियों के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने बीबीसी नेपाली सेवा को बताया कि राजशाही को हटाना होगा और वे राजशाही सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे.
काठमांडू स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नेपाली मंत्रिपरिषद के उपाध्यक्ष तुलसी गिरी ने बताया कि संघर्ष विराम पर माओवादी विद्रोहियों के बयान का अध्ययन करने के बाद ही सरकार कोई प्रतिक्रिया देगी. सरकारी अख़बार, रेडियो और टेलीविज़न पर माओवादियों की संघर्ष विराम की घोषणा की अनदेखी की गई. लेकिन स्वतंत्र मीडिया ने इसे अच्छी तरह कवर किया है. देश के सबसे बड़े अख़बार कांतिपुर टाइम्स ने इस विषय पर संपादकीय लिखा है. अख़बार का कहना है कि सरकार को सैनिक कार्रवाई रोक देनी चाहिए. कई संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राजधानी काठमांडू में इस घोषणा का स्वागत किया. लोगों ने मोमबत्तियाँ जलाकर अपनी ख़ुशी का इज़हार किया. |
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