|
माओवादियों ने की संघर्षविराम की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने तीन महीने के लिए एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा की है. विद्रोही नेता प्रचंड ने कहा है कि शनिवार से शुरू होने वाले इस संघर्षविराम के दौरान माओवादी कोई अभियान नहीं चलाएँगे. शुक्रवार को जारी किए गए बयान में प्रचंड ने कहा कि माओवादी रक्षात्मक मुद्रा में रहेंगे और अगर उनपर हमला नहीं होता है वे भी हमला नहीं करेंगे. माओवादी प्रमुख ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे नेपाल की समस्याओं का हल ढूँढने में मदद मिलेगी. राजा ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी में लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. राजा का कहना था कि राजनेता माओवादियों से निपटने में नाक़ाम रहे हैं. राजनीतिक पार्टियाँ माओवादी हिंसा में अब तक 12 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. पिछले कुछ महीनों में माओवादी राजनीतिक पार्टियाँ का समर्थन हासिल की कोशिश कर रहे हैं. माओवादियों की तरह राजनीतिक पार्टियाँ भी राजा ज्ञानेंद्र की विरोधी हैं. राजनीतिक पार्टियाँ अब तक कहती आई हैं कि राजनीतिक मुख्यधारा में शामिल होने के लिए माओवादियों को हिंसा त्यागनी होगी. पिछले कुछ महीनों में इस ओर प्रयास हुए हैं कि राजा के ख़िलाफ़ एकजुट हुआ जाए. जुलाई में विद्रोहियों ने निलंबित नेता बाबूराम भट्टाराई को फिर से गुट के पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया है. विपक्षी पार्टियों से तालमेल को लेकर बाबूराम भट्टाराई और प्रचंड के बीच मतभेद पैदा हो गए थे. उधर राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन ने 28 अगस्त को ही घोषणा की है माओवादी से बात करने के लिए वो एक समिति बनाएँगे. राजा ज्ञानेंद्र ने भी इस हफ़्ते विपक्षी पार्टियों से बातचीत की पेशकश की थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||