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विकास के लिए नेपाल को सहायता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीमा से जुड़े शहरों के विकास के लिए भारत ने नेपाल को सात करोड़ बीस लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है. भारत ने कहा है कि इस राशि का उपयोग दक्षिण नेपाल के चार शहरों में ढाँचागत सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा. नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र द्वारा सरकार को बर्खास्त करके ख़ुद सत्ता पर काबिज होने के बाद से यह भारत से मिलने वाली पहली बड़ी सहायता है. भारत कह चुका है कि इसके बाद वह नेपाल को गैर सैनिक सहायता ही उपलब्ध करवाएगा. राजशाही के सत्ता पर काबिज हो जाने के बाद से भारत ने सैन्य सहायता तो स्थगित कर ही दी है, अमरीका और ब्रिटेन ने भी कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. सभी देशों ने राजा ज्ञानेंद्र से कहा है कि वे देश में लोकतंत्र की बहाली करें लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर अमल नहीं किया है. नेपाल को सहयोग के लिए हुए नए समझौते पर भारत की ओर से भारतीय राजदूत शिवशंकर मुखर्जी और नेपाल के वित्त सचिव भानुप्रसाद आचार्य ने हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत दी जा रही राशि का उपयोग मुख्य रुप से चार सीमावर्ती शहरों में चेक पोस्ट बनाने के लिए किया जाएगा. इसके अतिरिक्त सड़कें, कस्टम विभाग के कार्यालय और सुरक्षा के लिए सुविधाएँ विकसित की जाएँगी. दोनों अधिकारियों ने इस समझौते के बाद कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इससे दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही आसान होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. |
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