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माओवादियों ने सैनिकों को रिहा किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने बंधक बनाकर रखे गए 60 सैनिकों को रिहा कर दिया है. सैनिक एक महीने से भी ज़्यादा समय से माओवादियों के क़ब्ज़े में थे. दूर-दराज़ के जाजरकोट ज़िले में रिहा किए गए सैनिकों के गुरूवार को नेपालगंज शहर पहुँचने की संभावना है. विद्रोहियों ने एक सैनिक शिविर पर हमला कर सैनिकों को बंधक बनाया था. कालीकोट ज़िले में हुए इस हमले के दौरान हुई दोतरफ़ा गोलीबारी में 55 सैनिक और 26 माओवादी मारे गए थे. अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद सैनिकों को छोड़ा गया है. देश-विदेश के मानवाधिकार संगठनों ने भी माओवादियों से सैनिकों को छोड़ने की अपील की थी. नेपाल से बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार रिहा किए गए सैनिक अच्छी हालत में हैं. संघर्षविराम विद्रोहियों ने तीन महीने के लिए एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा के दो सप्ताह बाद यह क़दम उठाया है. संघर्षविराम का आम तौर पर स्वागत किया गया लेकिन सरकार ने अपनी तरफ़ से संघर्षविराम की कोई घोषणा नहीं की. सरकार का कहना है कि उसे माओवादियों की घोषणा पर भरोसा नहीं है. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सैनिकों को रिहा करने की माओवादियों की कार्रवाई के बाद सरकार पर संघर्षविराम की घोषणा के लिए दबाव बढ़ जाएगा. |
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