|
नेपाल में भारतीय नेताओं को काले झंडे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पाँच सदस्यीय राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल में लोकतंत्र बहाली को लेकर अपना दौरा शुरु कर दिया है. दूसरी ओर नेपाल नरेश के समर्थकों ने काठमांडू हवाई अड्डे पर भारतीय नेताओं को काले झंडे दिखाए और उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए. सीपीएम नेता और सांसद सीताराम येचुरी इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. इस दल में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कई नेता शामिल हैं. इस दल में एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी, सीपीआई के सचिव डी राजा, समाजवादी पार्टी के विधायक सुनीलम और कांग्रेस सांसद चंद्रशेखर साहू शामिल हैं. भारतीय नेता नेपाल के सात दलों के गठबंधन के नेताओं के साथ मुलाक़ात करेंगे. नेपाल के राजनीतिक दलों का यह गठबंधन नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के फ़रवरी में सत्ता हथियाने का विरोध कर रहा है. भारत के अलावा अमरीका और ब्रिटेन ने नेपाल नरेश के सत्ता पर कब्ज़ा करने की आलोचना की थी. इन देशों ने नेपाल नरेश से कहा था कि वो राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करें और लोकतंत्र की बहाली करें. नरेश समर्थकों ने भारतीय नेताओं की नेपाल यात्रा को उनके देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप क़रार दिया है. इधर नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र पर दबाव साफ़ नज़र आने लगा है. उन्होंने कुछ समय पहले विपक्षी दलों के साथ सशर्त बातचीत शुरु करने की पेशकश की थी. नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा है कि वे विपक्ष के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन राजनितिक दलों को सुशासन, आर्थिक अनुशासन और 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध होना होगा. नेपाल नरेश सरकार को बर्ख़ास्त करने और सत्ता अपने हाथ में लेने के फ़ैसले को माओवादियों के ख़िलाफ़ लड़ाई के साथ जोड़ते हुए सही ठहराते आए हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||