BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 31 अगस्त, 2006 को 15:55 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
शांति प्रक्रिया में बाधा से आशंकित कश्मीरी

नियंत्रण रेखा
संघर्ष विराम के बाद से नियंत्रण रेखा के निकट खेती बाड़ी शुरू हो गई है
भारत प्रशासित कश्मीर की गुरेज़ वादी नियंत्रण रेखा के समीप है. यहाँ तहसील मुख्यालय दवार में स्थानीय लोगों ने मुझे एक स्कूल की इमारत दिखाई जो संघर्ष विराम शुरू होने से पहले पाकिस्तान की गोलाबारी में नष्ट हो गई थी.

अब इस इमारत का पुनर्निर्माण हो चुका है लेकिन बाहर अब भी वही पुरानी दीवार खड़ी है जिसमें बड़े-बड़े छेद मौजूद हैं जो पाकिस्तान की गोलाबारी से हुए हैं.

भारत और पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा पर नवंबर 2003 में संघर्ष विराम की घोषणा कर दी थी. तब से यहाँ तथा अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में लोग सकून की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं.

 बातचीत बंद होने से बहुत परेशानी बढ़ गई. उन्होंने नए रास्ते जो खोले और जो बाकी काम किया उस समय से बहुत अमन रहा है. गोलाबारी नहीं होनी चाहिए उनको बातचीत फिर शुरू करना चाहिए
मोहम्मद दिलावर

लेकिन जब से भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता स्थगित हुई है ये लोग परेशान हो गए हैं कि कहीं शांति प्रक्रिया भंग न हो जाए और नियंत्रण रेखा के आर-पार गोलाबारी फिर से शुरू न हो जाए.

दवार में रहने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला ने बताया,‘‘गोलाबारी से हमें यहाँ बहुत जानी नुक़सान भी हुआ और माली नुकसान भी. अभी कुछ सालों से हम चैन की साँस ले रहे हैं. क्योंकि मुशर्रफ साहब ने बात की, वाजपेयी साहब ने बात की और बोला हम समझौते से कश्मीर का मसला हल करेंगे.’’

आशंकाएँ

मैंने स्थानीय लोगों से पूछा की उनको फिर से गोलाबारी शुरू होने की कितनी आशंका है. एक बुज़ुर्ग मोहम्मद दिलावर ने बताया, ‘‘बातचीत बंद होने से बहुत परेशानी बढ़ गई. उन्होंने नए रास्ते जो खोले और जो बाकी काम किया उस समय से बहुत अमन रहा है. गोलाबारी नहीं होनी चाहिए उनको बातचीत फिर शुरू करना चाहिए.’’

 अभी कुछ सालों से हम चैन की साँस ले रहे हैं. क्योंकि मुशर्रफ साहब ने बात की, वाजपेयी साहब ने बात की और बोला हम समझौते से कश्मीर का मसला हल करेंगे
मोहम्मद अब्दुल्ला

एक युवा मोहम्मद दिलावर का कहना है कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव शुरू होने का समाचार आने से बच्चों को भी डर लगता है. वे कहते हैं कि डर के कारण स्कूल में किसी का पढ़ने-पढ़ाने में दिल नहीं लग रहा.

गुरेज़ के सभी लोग भारत पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को खतरे में देख दोनों देशों के हुक्मरानों को कोसते हैं. इनका कहना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के शासकों को आम जनता के बारे में सोचना चाहिए.

‘‘वो जो मंत्री, प्रधानमंत्री हैं. आराम से कुर्सियों पर बैठे हैं उन्हें क्या. उन्हें आम जनता के बारे में मालूम नहीं वे क्या करते हैं. वो लोग बस यहाँ से फायरिंग, वहां से फायरिंग. आम लोगों के बारे में उनको सोचना चाहिए कि वो जीते कैसे हैं. ’’

गुरेज़ में भी ऐसे सैंकड़ों परिवार हैं जो जम्मू कश्मीर के विभाजन के कारण बँट गए हैं. ऐसे लोगों की माँग है कि उड़ी, पुंछ तथा टिटवाल की तरह यहाँ भी नियंत्रण रेखा पर क्रॉसिंग प्वाइंट स्थापित किया जाए.

क्रॉसिंग प्वाइंट खुले या न खुले. लेकिन गुरेज़ के लोग प्रार्थना करते हैं कि शांति प्रक्रिया बनी रहे.

इससे जुड़ी ख़बरें
'भारत-पाक सहयोग को बढ़ावा दें'
18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
'कश्मीर का हल हमेशा के लिए हो जाए'
19 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सीआरपीएफ शिविर पर हमला, पाँच मरे
23 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>