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शनिवार, 19 नवंबर, 2005 को 14:31 GMT तक के समाचार
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नियंत्रण रेखा पार करने का सिलसिला शुरु
नियंत्रण रेखा पार करते लोग
भारतीय कश्मीर से 24 लोगों ने पाकिस्तानी कश्मीर में कदम रखा है
भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर टीटवाल-नौसेरी क्षेत्र से लोगों की आवाजाही शुरु हो गई है. भारतीय कश्मीर से 24 लोगों ने वर्षों बाद पहली बार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में क़दम रखा है.

ये आवाजाही पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप से हुई भीषण तबाही के बाद दोनो ओर की सरकारों में बनी सहमति के बाद संभव हुई है.

भूकंप में पाकिस्तान में 73 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए जबकि भारतीय कश्मीर में लगभग 1400 लोगों की मौत हुई.

आवाजाही का कार्यक्रम

लोगों के आर-पार जाने पर बनी सहमति के लिए तय हुए कार्यक्रम के अनुसार टीटवाल-नौसेरी से लोग 19 और 26 नवंबर के साथ-साथ तीन और 10 दिसंबर को आ-जा सकेंगे.

 मैं अपने भाई और भतीजों को देखने के लिए जा रहा हूँ. मुझे ये भी नहीं पता कि वे जीवित भी बचे हैं या नहीं. मैं बहुत चिंतित हूँ
नियंत्रण रेखा पार करने वाले एक व्यक्ति

पुंछ- रावलाकोट से 21 नवंबर और पाँच दिसंबर को आवाजाही संभव होगी. इसके अलावा मेंडर से आने-जाने के लिए 28 नवंबर और 12 दिसंबर को रास्ता खुला रहेगा.

उड़ी-चकोटी का रास्ता एक दिसंबर को खुला रहेगा जबकि उड़ी-हाजीपुर का रास्ता 28 नवंबर और आठ दिसंबर को.

दोनों सरकारों ने घोषणा की थी कि भारतीय कश्मीर से 83 लोगों को

नियंत्रण रेखा पार करने की तारीख़े
टीटवाल-नौसेरी 19,26 नवंबर और 3,10 दिसंबर
पुंछ- रावलाकोट 21 नवंबर और 5 दिसंबर
मेंडर-तत्तापानी 28 नवंबर और 12 दिसंबर
उड़ी-चकोटी 1 दिसंबर
उड़ी-हाजीपुर 28 नवंबर और 8 दिसंबर

पाकिस्तानी कश्मीर में आने और पाकिस्तानी कश्मीर से 70 लोगों को दूसरी ओर जाने की अनुमति दी गई है.

भावुक हुए लोग

भारतीय कश्मीर से नियंत्रण रेखा पार करने वाली 80 वर्षीय बेग़म जान का कहना था, "ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे मैं हज के लिए जा रही हूँ."

उन्होंने सबसे पहले किशनगंगा या नीलम पर पाकिस्तानी इंजीनियरों के बनाए पुल को पार किया. वे बहुत कमज़ोर हैं और उन्हें पुल पार करने के लिए अन्य लोगों को मदद करनी पड़ी.

उनके अलावा जिन लोगों ने शनिवार को नियंत्रण रेखा पार की उनमें सात और महिलाएँ ज़्यादातर वृद्ध लोग थे.

एक अन्य व्यक्ति हाजी अब्दुल रहमान मलिक का कहना था कि वे 1947 के बाद पहली बार पाकिस्तानी कश्मीर जा रहे हैं.

 मैं नियंत्रण रेखा को पार कर उस गाँव में पहले कभी जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था
अनवार सादिक़

उनका कहना था, "मैं अपने भाई और भतीजों को देखने के लिए जा रहा हूँ. मुझे ये भी नहीं पता कि वे जीवित भी बचे हैं या नहीं. मैं बहुत चिंतित हूँ."

उधर राफ़िला बेग़म का कहना था, "मैं अपने रिश्तेदारों की मृत्यु पर अफ़सोस ज़ाहिर करने जा रही हूँ. उनके छह क़रीबी रिश्तेदार भूकंप में मारे गए."

एक अन्य व्यक्ति 35 वर्षीय अनवार सादिक़ का कहना था कि भूकंप से कश्मीरी लोगों को अलग करने वाली दीवारें गिर गई हैं. उनका कहना था, "मैं नियंत्रण रेखा को पार कर उस गाँव में पहले कभी जाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था."

इससे दो दिन पहले 24 लोग पाकिस्तानी कश्मीर से भारतीय कश्मीर में उड़ी क्षेत्र के ज़रिए वापस आए थे. ये वो लोग थे जो भूकंप से पहले श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा से दूसरी ओर गए थे और वहाँ फँस गए थे.

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