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जलमार्ग और तैरती दुकानों वाली बस्ती | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रात से ही आकाश मेघाच्छादित है. सुबह अमेज़न की मीलों फैली पनीली सतह पर लगातार मेघ बरसा. दूर-दूर तक बारिश के रेले पर रेले उड़ते रहे, इस धरती के गहरे हरे रंग को सलेटी मटियाली चादर में लपेटते से. इस सलेटी चादर के पार दूर जंगलों में भाप उठती सी दिखाई देती है. सफ़र के पहले दिन ऐसा नहीं हुआ. मनाउस से सात-आठ घंटे के सफ़र के दौरान अमेज़न के मौसम ने अपने रंग नहीं दिखाए थे. कल हम नदी किनारे बसी एक छोटी सी बस्ती के पास से गुज़रे. यहाँ किसी ने नदी के किनारे एक तैरती हुई दुकान खोल रखी है जिसमें आसपास के लोगों की ज़रूरत का सामान बिकता है. जगह का नाम रख दिया गया है– हार्ट ऑफ़ जीज़स. ईसा का दिल. दुकान तक पहुँचने के लिए लकड़ी के फट्टे लगाए गए हैं और दुकान के सामने नदी में लोग अपनी छोटी-छोटी नावें बाँधे रहते हैं. जैसे शहरों में लोग कार पार्क करते हैं. ये आसपास रहने वाले लोग हैं जो सौदा-सुलुफ़ लेने इस दुकान पर आते हैं. नाव अहम अमेज़न नदी यहाँ रहने वालों का राजमार्ग है.
जैसे बच्चों को लेने और घर छोड़ने के लिए स्कूल बस आती है वैसे ही यहाँ एक बड़ी नाव से स्कूल बस का काम लिया जाता है. स्कूल की वर्दी पहने बच्चे इस नाव में बैठकर अपने घर लौटते हैं और हमें देखकर ज़ोर से अपनी राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम के पक्ष में नारा लगाते हैं – फ़्लेमिंगो! शायद ब्राज़ील के लोग रात को सपने में भी फ़ुटबॉल से अलग नहीं होते होंगे. ये तो दिन है. आसपास खेती करने वाले किसान अपने खेतों में उगने वाले फल– केले, नींबू, अन्नानास, बहुत ही ख़ुशबूदार और शरीफ़े जैसा फल पसाओ लेकर इस जगह बेचने आते हैं. इनमें फ़्रांसिस गोंज़ाल्विस अपनी पत्नी और बेटी की मदद से हरे-हरे नीबुओं को धोकर बाज़ार के लिए तैयार करते है. वो बताते हैं कि यहाँ कुछ लोगों के पास बहुत पशुधन है, लेकिन उनके पास सिर्फ़ बीस पशु हैं. पूरी दुनिया में अमेज़न के जंगलों की हिफ़ाज़त के लिए जैसी चिंता है, क्या फ़्रांसिस को उसका एहसास है? क्या फ़्रांसिस और उनके परिवार वालों में अमेज़न के विनाश को देखकर किसी तरह की बेचैनी होती है? जंगलों की चिंता
इस सवाल का फ़्रांसिस ने पुर्तगाली में काफ़ी लंबा जवाब दिया, जिसका अर्थ था कि अमेज़न के भविष्य को लेकर वो बेहद चिंतित हैं. उन्हें मालूम है कि अगर अमेज़न नहीं रहा तो उस पर आश्रित लोग भी नहीं रह पाएँगे. उनका कहना है कि हमें खेती के वो तरीक़े खोजने होंगे, जिनसे इन जंगलों को बचाया जा सके. लेकिन फिर फ़्रांसिस उस छोटे बच्चे की तरह आश्वस्त हो उठते हैं, जो समझता है कि उसके माता-पिता कभी उससे अलग नहीं होंगे. वो कहते हैं, "जब मैं इस पानी को देखता हूँ, इन जंगलों को देखता हूँ तो मुझे लगता नहीं कि ये सब कुछ ख़त्म हो जाएगा." पूरे अमेज़न के वनों में कई जगहों पर नदी के किनारे-किनारे लोगों ने घर बसा लिए हैं. कुल मिलाकर इन वनों में बसी बस्तियों में लगभग तीन करोड़ लोग रहते हैं. आत्मनिर्भर समाज
घने जंगलों के अदर रहने वाली जनजातियों का अपना अलग पूरी तरह आत्मनिर्भर समाज है. कई ऐसी जनजातियाँ इन जंगलों में रहती हैं जिनका आज तक बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं हुआ है. लेकिन जब खनन के लिए कंपनियाँ जंगलों में भीतर तक रास्ते बनाती हैं, मशीनें ले जाती हैं तो उनके कर्मचारी अपने साथ कुछ ऐसे कीटाणु भी ले जाते हैं जो अमेज़न की इन जनजातियों के लिए घातक साबित हो सकते हैं. कल कुछ ऐसे लोगों से मुलाक़ात होगी जिन्हें सरकार ने आरक्षित वन परियोजना के तहत जंगलों में रहने की इजाज़त दी है. इन्हीं लोगों पर जंगल बचाने का दारोमदार है और इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें नाममात्र का ही सही, कुछ पैसा दिया जाता है. फ़िलहाल शाम ढलने को है और गुरु गंभीर अमेज़न शांत भाव से बह रही है. जैसे कि वो सदियों से बहती आ रही है. |
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