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कीटों के मरने से जंगलों को फायदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर अमरीका के जंगलों में एक ख़ास किस्म के कीड़े लाखों की संख्या में मर रहे हैं जिससे जंगलों को काफी फायदा हो रहा है. साइंस पत्रिका में छपे एक नए शोध में यह बात सामने आई है. सिकाडा नामक ये कीट हर 13 से 17 वर्ष में ज़मीन के नीचे से बाहर निकलते हैं और प्रजनन करते हैं. चूंकि कीटों की संख्या लाखों में होती है इसलिए कई कीट मरते भी है. इन कीटों के शरीर के सड़ने से मिट्टी में बैक्टीरिया. फफूंद और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ रही है. यही कारण है कि जिन इलाक़ों में ये कीट मरते हैं वहां के पेड़ ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं. इस संबंध में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं. एक वैज्ञानिक लुइ यांग ने बीबीसी से कहा " हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि सिकाडा के प्रजनन और मरने का संबंध पेड़ों के तेजी से बढ़ने से है लेकिन इसे बिल्कुल ग़लत नहीं कहा जा सकता. " मिट्टी में बदलाव अमरीका के उत्तरी हिस्से में भारी संख्या में सिकाडा कीट पाए जाते हैं. ये कीट अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा पेड़ों की जड़ों में बिताते हैं जहां वह जाइलम पर निर्भर होते हैं. जब ये बड़े होते हैं तो एक साथ लाखों की संख्या में प्रजनन के लिए बाहर आते हैं.
इस वर्ष मई और जून महीने में अमरीका के कई राज्यों में ये कीट देखे गए जो प्रजनन के दौरान भारी शोर मचाते हैं. कीटों के प्रजनन का समय कुछ हफ्तों का ही होता है. इनकी संख्या प्रति वर्ग मीटर में 350 तक हो सकती है. कुछ जानवर इन कीटों को खाते भी हैं पर लेकिन अधिकांश कीट मर कर मिट्टी में मिल जाते हैं. वैज्ञानिकों का शोध दर्शाता है कि कीटों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से पेड़ों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है. ये कीट वास्तव में वही नाइट्रोजन छोड़ते हैं जो ये अपने पूरे जीवन में पेड़ों की जड़ों से एकत्र करते हैं. |
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