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अदभुत जैव विविधता है अमेज़न में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमेज़न के आसमान पर बादल घिरने लगे है. गहरे सलेटी रंग के उमड़ते घुमड़ते बादल, जिनके पीछे से आसमान रहस्यमय ढंग से आलोकित हो रहता है. ठीक वैसे ही जैसे आषाढ़ की पहली फुहार पड़ने से पहले भारत का आकाश आड़ोलित होने को बेचैन हो जाता है और रह रह कर घनगर्जना सुनाई पड़ने लगती है. पहले कुछ हिचक सी दिखाते हुए और फिर अचानक एक तीखी कड़क के साथ बादलों से पीछा छुड़ाकर बारिश की मोटी-मोटी बूंदें प्यासी धरती की ओर दौड़ पड़ती हैं. अमेज़न में अभी सिर्फ़ बादल उमड़ घुमड़ रहे हैं. मगर कभी भी बेतहाशा बारिश हो सकती है. अमेज़न के वर्षावनों में धूप, बारिश और फिर धूप – ये चक्र बारहों महीने चलता रहता है. और इस चक्र के कारण हज़ारों तरह के जीव-जंतुओं के जीवन चक्र चलते हैं. कहा जाता है कि अमेज़न के जंगलों की एक झाड़ी में जितनी किस्म की चींटियाँ मिलती हैं, उतनी पूरे ब्रिटेन में भी नहीं मिलेंगी. जितनी जैव विविधता इन जंगलों में पाई जाती है उतनी पूरी दुनिया में कहीं नहीं है. यहाँ 17 हज़ार क़िस्मों की चिड़ियाँ मिलती हैं, पाँच से सात सौ किस्मों के साँप और पशु पाए जाते हैं. पेड़ पौधों की ही पचास हज़ार से ज़्यादा किस्में इन जंगलों में मौजूद हैं. वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि सिर्फ़ एक वर्ग हैक्टेयर जंगल में 480 से ज़्यादा तरह के पेड़ यहाँ मौजूद हैं. प्रकृति पर आघात प्रकृति की इस अकूत दौलत के आधार यानी पेड़ पर जब आरे चलते हैं तो सिर्फ़ पेड़ ही नहीं कटता बल्कि तमाम जीव जंतुओं के जीवन चक्र पर कुठाराघात होता है. बारिश-धूप-बारिश का चक्र टूटता है. शिवजी की तरह अपनी जटाओं में कार्बन डाई ऑक्साइड को उलझाए जंगल कटेंगे तो ये कार्बन कहाँ जाएगा?
कार्बन के वातावरण में घुलने का अर्थ है मौसम का असंतुलन बढ़ना, धरती का तापमान बढ़ना. दिसंबर के महीने में ही अगर उत्तराखंड के पहाड़ों में पेड़ पौधों के अँखुए फूटने लगे हैं तो इसका सीधा संबंध अमेज़न के उन जंगलों से है जहाँ इन दिनों हमारी यात्रा जारी है. मनाउस से शुरू हुई इस नाव यात्रा को छह घंटे से ज़्यादा हो चले हैं. जब चले थे तो हवा में उमस थी. लेकिन अब हवा निर्मल हो चली है. अमेज़न के अथाह पानी के पार दिख रहे जंगल हलके से कोहरे में लिपटते दिख रहे हैं. शायद वहाँ पानी पड़ने लगा हो. कुछ ही देर में हमारी नाव भी बारिश के बीच अमेज़न का सफ़र तय कर रही होगी. पर फ़िलहाल बारिश के बौछिट अभी हमारी नाव तक नहीं पहुँचे हैं. बारिश के दिनों में उफनती हुई ब्रह्मपुत्र भारत की अकेली नदी है जिससे अमेज़न नदी की तुलना की जा सकती है. हालाँकि ब्रह्मपुत्र का पाट अमेज़न की तुलना में काफ़ी छोटा है. जैसे ब्रह्मपुत्र के लिए उसके किनारे रहने वाले लोगों ने गीत गाए हैं वैसे ही अमेज़न को देख नतमस्तक रहने वाले उसके बाशिंदे भी गाते हैं.
सात छोटे-छोटे चेम्बरों वाली हमारी मोटरबोट नोम दोस्त्रे के कप्तान फ़र्नांदो साबीनो पिछले 44 साल से अमेज़न नदी में नाव चलाते हैं. अपने सफ़ेद बालों की तरफ़ इशारा करते हुए वो बताते हैं कि मैंने बचपन से इस नदी को देखा है और अब मेरे बाल सफ़ेद हो चुके हैं. नाव यात्रा शुरू करने से पहले फ़र्नान्दो एक प्रार्थना गीत गाते हैं जिसमें ईश्वर से नाव को बचाए रखने की दुआ की जाती है: सेंग्योर ! हे ईश्वर, ईश्वर को खेवनहार नाम देने वाला भी कोई नाविक ही रहा होगा. |
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