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'हरित शहरों' के विचार को प्रोत्साहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रविवार, पाँच जून 2005 को विश्व पर्यावरण दिवस पर 'हरित शहरों' के विचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है और इस मौक़े पर सौ से ज़्यादा देशों में विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं. शहरी इलाक़ों में जनसंख्या वृद्धि बदस्तूर जारी है इसलिए यह कहा जा रहा है कि टिकाऊ और पर्यावरण के लिहाज़ से साफ़-सुथरे विकास की ज़रूरत है ताकि लोगों के रहन-सहन की परिस्थितियों में सुधार हो सके. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा और पर्यावरण को भी कम नुक़सान होगा. 1950 में दुनिया की एक तिहाई से कम जनसंख्या शहरी इलाक़ों में रहती थी. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अब यह अनुपात बढ़कर लगभग आधा हो गया है और साल 2030 तक इसके बढ़कर साठ प्रतिशत होने का अनुमान है. पूरी आबादी का क़रीब छठा हिस्सा यानी लगभग एक अरब लोग अब भी झुग्गी झोंपड़ियों में रहते हैं और इनमें से ज़्यादातर एशिया, अफ्रीका और लातीनी अमरीका में हैं. यह संख्या सन 2020 तक दोगुनी हो सकती है. शहर दुरुस्त हों इस साल विश्व पर्यावरण दिवस पर दुनिया भर में हो रही गतिविधियों का मक़सद शहरी इलाक़ों के विस्तार से होने वाली समस्याओं की तरफ़ ध्यान दिलाना है.
शंघाई, काबुल, ब्यूनस आयर्स, सिडनी, जकार्ता और रोम सहित दुनिया भर के क़रीब पचास शहरों के मेयर सैन फ्रांसिस्को में एकत्र होकर एक ऐसी योजना तैयार करने वाले हैं जो शहरी इलाक़ों में हरियाली का संतुलन बनाए रखने के लिए नए मानक तैयार करेगी. संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम के निक नताली का कहना है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि शहरों की योजना संतुलित तरीके से बनाई जाए और उस पर अमल भी किया जाए. नताली के अनुसार, "हमें शहरी इलाक़ों को नपी-तुली स्थिति में रखना होगा क्योंकि शहरों में संसाधन बहुत लगते हैं और बदले में कूड़ा-कचरा बहुत निकलता है. इसी कचरे में एक कार्बनडाइऑक्साइड भी एक है जो दुनिया में बढ़ रहे तापमान की एक प्रमुख घटक गैस है." नताली का कहना है कि दुनिया में बढ़ रही गर्मी के लिए ज़िम्मेदार गैसों में 80 प्रतिशत शहरों से ही निकलती हैं, "इसलिए हमने अगर शहरों को दुरुस्त कर दिया तो समझिए कि एक बहुत बड़ा काम अपने आप हो जाएगा." संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने स्थानीय सरकारों, कारोबारियों और उद्योग जगत के बीच निकट सहयोग बनाए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि इसी से हरित शहरों का सपना पूरा किया जा सकेगा. |
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