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एवरेस्ट के पर्यावरण संतुलन को ख़तरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला पर्वतारोही जुंको तापेई सहित दुनिया के कुछ जाने-माने पर्वतारोहियों ने आगाह किया है कि अगर पर्वतारोहण अभियानों की बढ़ती संख्या पर रोक नहीं लगाई गई तो माउंट एवरेस्ट का पारिस्थितिक संतुलन विनाशकारी ढंग से बिगड़ सकता है. दुनिया के कुछ जाने-माने पर्वतारोही ऐवरेस्ट पर भारतीय विजय के 40 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए पहाड़ों की रानी मसूरी में इकठ्ठा हुए और कहा कि माउंट ऐवरेस्ट को अब आराम की जरूरत है. 1965 में ऐवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता हासिल करने वाले भारतीय अभियान दल के नेता एमएस कोहली कहते हैं, "जब हमारा अभियान दल ऐवरेस्ट पर गया था तो वो उस साल का अकेला दल था लेकिन इस साल लगभग 25 टीमें एक साथ ऐवरेस्ट पर गई हैं. इससे ऐवरेस्ट पर बढ़ रहे दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है.” आँकड़ों के मुताबिक 1920 से 1960 तक सिर्फ़ 15 पर्वतारोही दल ही ऐवरेस्ट पर गए थे लेकिन अब हर साल 20,000 से ज़्यादा पर्वतारोही वहाँ जाते हैं. हिमालय पर्वत श्रृंखला में नेपाल और तिब्बत के क्षेत्र में फैला 8848 मीटर ऊँची ऐवरेस्ट पर्वत चोटी दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है.
इसकी चुनौती भरी ऊँचाई साहसी और जुझारू पर्वतारोहियों और सैलानियों को लुभाती और ललकारती रहती है लेकिन शायद वो ये नहीं जानते कि जाने-अनजाने में अपने पीछे छोड़े गए कचरे से वो हिमालय के पर्यावरण को कितना तबाह कर जाते हैं. टनों मलबा ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाली विश्व की पहली महिला जापान की जुंको तापेई पिछले कई सालों से ऐवरेस्ट पर पड़ रहे दबाव, वहाँ जमा हो रहे मलबे और उससे हो रहे नुक़सान का अध्ययन कर रही हैं. जुंको तापेई का कहना है, "एक मिलियन लीटर तो वहाँ सिर्फ पेशाब ही जमा हो गया है. बाकी प्लास्टिक, पॉलिथीन, बोतलें, शव और हेलीकॉप्टर के कचरे की तो कोई सीमा ही नहीं है. ये कई लाख टन तक पहुँच चुका है. लिहाज़ा अब पर्वतारोहण के लिए नए शिखरों की तलाश की जानी चाहिए और ऐवरेस्ट को कुछ आराम दिया जाना चाहिए."
तापेई का कहना था कि पर्वतारोहण से जुड़ी संस्थाओं को चाहिए कि वो अंधाधुंध ढंग से अभियान दलों को हरी झंडी देना बंद करें.” इस मौक़े पर नेपाल में सागरमाथा प्रदूषण समिति के अध्याक्ष भागीरथ एन राणा ने कहा, “ये ठीक है कि पर्वतारोहण से सरकारों को आमदनी होती है लेकिन इस तरह से हिमालय के नाज़ुक पर्यावरण को नष्ट करने की इजाज़त भी तो नहीं दी जा सकती है." "क्या ही अच्छा हो कि जब तक ऐवरेस्ट से पूरी तरह से मलबा साफ़ नहीं कर दिया जाता, कुछ दिनों के लिए वहाँ पर्वतारोहण पर रोक ही लगा दी जाए.” इस मौक़े पर पर्वतारोहियों ने इस बात पर चिंता ज़ाहिर की कि ऐवरेस्ट पर मलबे की सफ़ाई की दिशा में स्वयंसेवी संस्थाओं ने तो पहल की है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कार्यक्रम अभी तक नहीं बना है. |
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