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कूड़े का 'सबसे ऊँचा' पहाड़ हटेगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर जमा सैकड़ों टन कचरा हटाने के लिए लगभग एक सौ कार्यकर्ता एक अभियान शुरू कर रहे हैं. यह अभियान सितंबर महीने में शुरू होगा और कार्यकर्ता एवरेस्ट की चोटी के ठीक नीचे जमा 615 टन कचरे को हटाएँगे. इस कचरे को हटाने के लिए इन पर्वतारोहियों को कम से कम 22 हज़ार फीट की चढ़ाई चढ़नी होगी. कई पर्यावरणवादी और पर्वतारोही आगाह करते रहे हैं कि इस कचरे से हिमालय का पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है. इस अभियान दल के प्रमुख गाओ देंगयी ने कहा, "कचरे की वजह से हिमालय की चोटी पर प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता दिख रहा है." ज़्यादातर कचरा दशकों पुराना है जिसे पर्वतारोही दलों ने ऊपर ही छोड़ दिया है, इसमें प्लास्टिक से लेकर खाने-पीने तक का सामान है. 1921 से 1960 के बीच पंद्रह अभियान दल एवरेस्ट तक जा चुके हैं और आज भी नेपाल और तिब्बत के रास्ते पर्वतारोहियों वहाँ जाते रहते हैं. एवरेस्ट पर कचरे की बात काफ़ी समय से होती रही है उसकी सफ़ाई के लिए कई अभियान भी चलाए गए हैं लेकिन अभी तक कचरा साफ़ नहीं किया जा सका है. |
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