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तेज़ चढ़ाई का रिकॉर्ड पेम्बा के ही नाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर सबसे कम समय में पहुंचने का पेम्बा दोरजी शेरपा का रिकॉर्ड बरक़रार रखने की घोषणा की है. इस रिकॉर्ड के दावे के ख़िलाफ़ कई शिकायतों की जांच के बाद सरकार ने यह फ़ैसला सुनाया है. पेम्बा दोरजी शेरपा ने 20 मई 2004 को 8,850 मीटर ऊंचे एवरेस्ट शिखर पर केवल आठ घंटे दस मिनट में विजय पाकर, वहां सबसे कम समय में पहुंचने का नया रिकॉर्ड क़ायम किया था. मगर 12 पर्वतारोहियों ने उनके दावे को चुनौती देते हुए कहा था कि पेम्बा दोरजी शेरपा शिखर तक पहुंचे ही नहीं थे. लक्पा गेलू शेरपा जिनका रिकॉर्ड पेम्बा दोरजी ने तोड़ा था शिकायत करने वालों में शामिल थे. लक्पा गेलू शेरपा 10 घंटे और 56 मिनट में शिखर पर पहुंचे थे. प्रमाण नेपाल के पर्यटन मंत्रालय ने पेम्बा दोरजी की विजय को सही करार देते हुए कहा है कि उनके दल के पास इस बात के प्रमाण हैं. पर्यटन मंत्रालय ने कहा कि उनकी टीम ने जिन सबूतों की जांच की है उसमें वो झंडे, तस्वीरें और दस्तावेज़ हैं जो पेम्बा दोरजी एवरेस्ट शिखर से लाए थे.
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि पेम्बा दोर्जी बेस कैंप में सरकारी अधिकारियों को अपनी चढ़ाई के बारे में फ़ोन पर लगातार जानकारी देते रहे थे. उन्होंने शिखर पर पहुंचने के बाद वहां मौजूद उन चीज़ों का भी वर्णन फ़ोन पर किया था जो एक पर्वतारोही ने पेम्बा दोरजी की चढाई से एक दिन पहले एवरेस्ट शिखर पर छोड़ी थीं. सरकारी जांचकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अन्य पर्वतारोहियों द्वारा पेम्बा दोरजी की शिखर पर पहुंचते समय ली गईं तस्वीरें भी देखी हैं. पेम्बा दोरजी के ख़िलाफ़ शिकायत करने वालों का कहना था कि किसी ने भी उन्हें शिखर पर चढ़ते या उतरते नहीं देखा था. काठमांडू में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जांचकर्ताओं के निष्कर्ष के बाद अब पेम्बा दोरजी का एवरेस्ट पर सबसे कम समय में पहुंचने के रिकार्ड पर आधिकारिक मुहर लग गई है. आरोप-प्रत्यारोप बीबीसी संवाददाता के अनुसार पेम्बा दोरजी और लक्पा गेलू के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता चलती रही है. पिछले साल लक्पा गेलू ने 12 घंटे 56 मिनट में एवरेस्ट शिखर पर विजय प्राप्त की. मगर उसके तीन दिन पहले ही पेम्बा दोरजी 12 घंटे 45 मिनट में एवरेस्ट शिखर पर पहुंचे थे. तब उन्होंने नेपाल पर्यटन मंत्रालय से यह कहते हुए शिकायत की थी कि लक्पा गेलू की विजय के कोई सबूत नहीं हैं. उसके बाद सरकारी जांच ने लक्पा गेलू की विजय और रिकार्ड की पुष्टि कर दी थी. अब 20 मई को जब पेम्बा दोरजी ने नया रिकार्ड क़ायम किया तो शिक़ायत करने की बारी लक्पा गेलू की थी. उनका और उनके साथ शिकायत करने वाले अन्य पर्वतारोहियों का कहना था कि जिस दिन पेम्बा दोरजी ने एवरेस्ट शिखर पर पहुंचने का दावा किया है उस दिन मौसम इतना ख़राब था कि कोई भी पर्वतारोही दल उस दिन वहां नहीं पहुंच सकता था. |
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