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'ज़हरीले जहाज़' पर ग्रीनपीस का अनुरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि डेनमार्क के उस जहाज़ से सामान उतारने की इजाज़त नहीं दी जाए जिसमें ज़हरीले पदार्थ लदे हैं. ग्रीनपीस का कहना है कि किंग फ़्रेडरिक नामक यह जहाज़ सोमवार को गुजरात के तट पर लगा है और इसमें ख़तरनाक पदार्थ भरे हुए हैं. ग्रीनपीस ने कहा है कि भारतीय अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या जहाज़ में वाक़ई कोई ज़हरीले और ख़तरनाक पदार्थ भरे हुए हैं. डेनमार्क सरकार ने भारत सरकार से जहाज़ को अपने जल क्षेत्र में दाख़िल नहीं होने देने का अनुरोध किया था क्योंकि यह उस अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन है जिसमें जहाज़ों में ज़हरीले पदार्थ ले जाना मना है. डेनमार्क के पर्यावरण मंत्रालय ने भारत के वन और पर्यावरण मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा कि डेनमार्क के अधिकारी इस पूरे मामले पर 'बेहद चिंतित' हैं. "हम ऐसा करके यह स्पष्ट और प्रबल संकेत दे सकते हैं कि न तो भारत और न ही डेनमार्क पर्यावरण संबंधी ऐसी समस्याओं का निर्यात नहीं होने देंगे जो स्थानीय तौर पर निपटाई जा सकती हैं." पत्र में कहा गया, "इससे यह भी स्पष्ट होगा कि हमारी सरकार ऐसी किसी भी गतिविधि की इजाज़त नहीं देगी जिससे पर्यावरण के लिए गंभीर ख़तरा पैदा हो सके." ग्रीनपीस का कहना है कि उसने भी भारत सरकार को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें अनुरोध किया गया है कि इस जहाज़ को भारतीय क्षेत्र पर सामान उतारने की इजाज़त नहीं दी जाए. संगठन के अनुसार एलंग बंदरगाह पर इस तरह के जहाज़ों से सामान उतरने से समुद्री जीवन और स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है. |
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