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नागपट्टिनम में समस्याएँ अब भी हैं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सूनामी लहरों को आए तीन महीने से अधिक हो गया है और अब तमिलनाडु का तटीय इलाके धीरे-धीरे सामान्य हो गया है, लेकिन कुछ समस्याएँ अब भी हैं. नागपट्टिनम, तमिलनाडु का सबसे प्रभावित ज़िला था जहाँ 7000 से अधिक लोग मारे गए थे. नागपट्टिनम शहर के नज़दीक अकरापट्टई के समुद्री तट पर स्थानीय प्रशासन ने एक हज़ार नारियल और कॉज़िरीना के पौध लगाए हैं. सूनामी के बाद यह देखा गया था कि जहाँ-जहाँ पेड़-पौधे लगे थे और पर्यटन के लिए समुद्री तट साफ़ नहीं किया गया था वहाँ सूनामी लहरों से कम नुक़सान हुआ. समुद्री तट पर हरित-पट्टी लगाने के बाद ठेकेदार नागराज एक नए मछली मार्केट का निर्माण करवा रहे हैं. उनका कहना है, ‘जगह-जगह हरित पट्टी लगाने से सूनामी लहरों को अगली बार नियंत्रण में रखा जा सकेगा.’ हरित-पट्टी की वजह से तमिलनाडु तट पर बसे नेलावेदपत्ती नाम के गाँव में सूनामी लहरों का बहुत कम असर हुआ था. अब स्थानीय प्रशासन पर्यावरण विशेषज्ञों के कहने पर पेड़ लगा रहा है. तीन महीनों में तटीय इलाके से मलबा साफ़ कर दिया है. अगर आप समुद्र तट पर खड़े हों तो मीलों तक आप को उजड़ी बसतियाँ नज़र आएँगी. हज़ारों विस्थापित परिवार इस समय अस्थायी शिवरों में रह रहे हैं जिन्हें सरकार और गैर-सरकारी संगठनों ने बनाया है. लेकिन बढ़ती गर्मी में उनकी समस्याएँ बढ़ रही है. टीन के बने 10 फुट बटा 10 फुट के इन मकानों में पाँच सदस्यों से लेकर दस सदस्यों के परिवार रह रहे हैं. बढ़ते तापमान में टीन के यह घर गर्म हो जाते हैं और लोग पास स्कूलों में पेड़ों के नीचे और मंदिर के बरामदे में शरण लेते हैं. शिविरों की बदहाली तमिलनाडु तट पर स्थित सभी अस्थाई शिविरों का यही हाल है. लोग नाराज़ हैं और प्रशासन का कहना है कि लोगों को पक्के मकानों के लिए कुछ और महीने इंतज़ार करना होगा. 55 वर्षीय रामालिंग्म एक मछवारें हैं जिनका मानना है कि टीन के मकान बनाकर सरकार ने उन्हें किनारे कर दिया है. "हम सब इस भीषण गर्मी में और बीमार हो जाएंगे. हम अपने पुराने रिहायशी इलाके में लौटना चाहते हैं, लेकिन सरकार साफ़-साफ़ नहीं बता रही."
विस्थापितों कि आवास का मुद्दा एक गंभीर समस्या है. गैर सरकारी संगठनों के संचालक, विवेकानंद का कहना है कि सूनामी के कुछ ही हफ्तों बाद सरकार पर विस्थापितों को राहत केंद्रों से हटाने का दबाव था. "प्रशासन को गुजरात में आए भूकंप में राहत कार्य के अनुभव से सीख लेनी चाहिए थी. वहाँ भी टीन के मकान बनाए गए थे जो रहने लायक नहीं रहे. क्या एक और आपदा के बाद हम सीख लेंगे." नागपट्टिनम में क़रीब 15 हज़ार परिवार समुद्री तट पर नहीं रहना चाहते. तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में आवास योजना कि घोषणा की जिसके तहत समुद्री तट से क़रीब 500 मीटर की दूरी पर मकान बनाने वालों को सरकारी सहायता मिलेगी. हालाँकि सरकार ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं कर रही. वह चाहती है कि भविष्य में सूनामी जैसी आपदाओं से बचाव के लिए विस्थापितों का पुनर्वास समुद्र तट से दूर होना चाहिए. लेकिन इस मुद्दे पर विस्थापितों की राय भी बंटी हुई है. गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि सूनामी पीड़ितों के लिए पक्के मकान बनने में क़रीब एक साल लग सकता है. तब तक लोगों को टीन के एक कमरे में जीवन गुज़ारना होगा. तीन महीने बाद जीवन सामान्य हो रहा है इसके संकेत पास के इसाईयों के धार्मिक स्थल, वी लानगनी से मिला. इस बार ‘ईस्टर’ से त्यौहार के लिए कई लोग आए और कुछ ने समुद्र में उतरने का भी साहस जुटाया. सैंकड़ों दुकानें जो तीन महीनों से बंद पड़ी थीं अब खुल गुई है. ‘वरजिन मैरी’ के गिरज़ाघर में हज़ारों इसाई और गैर-इसाई आते हैं. गोविंदस्वामी की तीन दुकानें नष्ट हो गई थी. उनका कहना है कि ‘ईस्टर’ के मौके पर उनका धंधा कुछ ठीक था. लेकिन भविष्य की सभी को चिंता है. हज़ारों विस्थापितों के पुनर्वास और साथ ही मछुवारों के समुद्र में लौटने के बाद ही सही माएने में नागपट्टिनम सामान्य होगा और उसकी अर्थव्यवस्था एक बार फिर स्थिर होगी. |
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