जो लेते हैं जानवरों की मनमोहक तस्वीरें

इमेज स्रोत, Joel Sartore/ National Geographic, Photo Ark
अमरीकी वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़र जोएल सारटोर लुप्तप्राय जीवों को बचाने की कोशिश में लोगों को इन जीवों से प्यार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
जब जोएल सारटोर की पता चला कि उनकी पत्नी कैथी को ब्रेस्ट कैंसर है तब वो 15 सालों से नेशलन जियोग्राफ़िक में बतौर वन्यजीव फ़्टोग्राफर काम कर रहे थे. अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल करने के लिए और कीमोथैरेपी के दौरान अपनी पत्नी की मदद करने के लिए उन्होंने एक साल की छुट्टी ली.
इस छुट्टी के दौरान जब वो दुनिया नहीं घूम रहे थे, उन्होंने अपने काम के असर के बारे में सोचना शुरू किया.

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जोएल कहते हैं, "पत्रिकाओं में कहानियां आती हैं, चली जाती हैं. लेकिन मैंने लुप्तप्राय जानवरों के भाग्य को सुधरते नहीं देखा. तो मैंने सोचा कि मैं ऐसा क्या करूं कि वाकई कोई बदलाव आए?"
इस सवाल का जवाब उन्हें तब मिला जब वो नेब्रास्का के लिंकन चिड़ियाघर में एक छछूंदर की तस्वीर ले रहे थे.
उन्होंने इस छछूंदर को चिड़ियाघर की रसोई से उठाए एक सफ़ेद कार्डबोर्ड के सामने रखने के बारे में सोचा. नतीजा था एक शानदार स्टूडियो स्टाइल की तस्वीर.

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वो बताते हैं, "मैंने सोचा अगर हम जानवरों की तस्वीर ऐसी जगह लेंगे जहां ध्यान भटकाने वाली कोई अन्य चीज़ ना हो, तो सभी जावनर एक आकार के दिखेंगे. कोई बड़ा या छोटा नहीं, सब हाथी जितने बड़े और सुंदर दिखेंगे. फिर शायद लोग इन जावनरों को जो ख़तरें हैं उस बारे में जान पाएं और इन्हें लुप्त होने से बचाया जा सके."
पत्नी ठीक होने लगीं तो जोएल ने तस्वीरें लेने के लिए अन्य चिड़ियाघरों का रुख़ किया. चिड़ियाघरों के अधिकारियों ने सेट बनाने में, उन्हें काले और सफ़ेद रंगों में रंग सकने के लिए कमरे मुहैया कराकर और जानवरों के लिए खाना देकर जोएल की मदद की.
जोएल कहते हैं, "जानवर को लगता है कि वो को खाना खाने आ रहा है, पर असल में मैं उसे कैमरे में क़ैद कर लेता हूं."

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ये प्रोजेक्ट बढ़ने लगा और नेशनल जियोग्राफ़िक की नज़र भी इस पर पड़ी जिन्होंने जोएल को उभयचर और अमरीका के लुप्तप्राय जानवरों जैसी कुछ तस्वीरों की सिरीज़ बनाने की गुज़ारिश की.
जोएल अलग-अलग आकार के टेंट लेकर दुनिया भर में छिपकली और चिड़िया जैसे छोटे जानवरों की तस्वीरें लेने निकल पड़े. बड़े जानवरों के लिए उन्होंने चिड़ियाघरों के सुरक्षित माहौल को ही ठीक समझा.

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जोएल कहते हैं, "अधिकतर जानवर जिनकी तस्वीरें मैंने लीं उन्हें क़ैद में ही रखा गया था और चिड़ियाघर के अधिकारी उनके व्यवहार के बारे में जानते थे."
वो कहते हैं "कभी-कभी मुझे ऐसे जानवर भी मिले जो ग़ुस्से में थे और आक्रामक थे, लेकिन अधिकतर शूटिंग ठीक-ठाक रही."
जोएल अब तक 40 देशों में 6,000 से अधिक प्रजातियों के जानवरों की तस्वीरें ले चुके हैं. इस प्रोजेक्ट को नेशनल जियोग्राफ़िक फ़ोटो आर्क का नाम दिया गया है और उनकी तस्वीरें नेशनल जियोग्राफ़िक पत्रिका में छप चुकी हैं और संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट और रोम में वेटिकन की इमारतों में लगाई जा चुकी हैं.

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फ़ोटो आर्क में ली गई कुछ तस्वीरें ऐसे जानवरों की हैं जो विलुप्त होने की कग़ार पर हैं.
बीते साल जोएल ने 'टफ़ी' की तस्वीर ली जो दुनिया की आख़िरी जीवित राब्स फ्रिंज लिंब्ड ट्रीफ्रॉग है (पेड़ पर रहने वाला मेंढ़क जिसके पैरों में उंगलियां हैं).
'टफ़ी' को साल 2005 में पनामा में पकड़ा गया था जहां संरक्षणकर्ता मेंढ़कों को होने वाली एक तरह की घातक बीमारी से उभयचरों को बचाने की कोशिश कर रहे थे.
उसे जॉर्जिया में अटलांटा बॉटानिकल गार्डन में लाया गया जहां पकड़ी गई मादा मेंढ़कों के साथ उसका प्रजनन कराया गया. लेकिन उनका कोई भी डेडपोल जीवित नहीं बच पाया. उसके साथ की मादा मेंढ़क भी मर गईं. जोएल ने ये 'टफ़ी' के मरने से कुछ दिन पहले बीते साल सितंबर में उसकी तस्वीर ली थी.

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जोएल कहते हैं, "मैं जब भी कहीं कोई प्रेज़ेन्टेशन देता हूं कोशिश करता हूं कि उसके बारे में बताऊं, ताकि उसकी मौत से दुखी होने की बजाय मैं उसकी कहानी से औरों को प्ररित कर सकूं."
उन्होंने चेक गणराज्य के एक चिड़ियाघर में आख़िरी जीवित सफ़ेद राइनो में से एक की भी तस्वीर ली है.
जोएल ने इसे नाम दिया है नाबीरे. इसके बारे में वो कहते हैं, "हम एकदम सही समय पर इसके पास पहुंचे. हमें उसकी एक बेहतर तस्वीर मिली और इसके बाद वो एक लंबी नींद में चली गई क्योंकि ये जानवर ज़िंदगी के आख़िरी पलों में काफ़ी सोते हैं."
इस फ़ोटोशूट के सप्ताह भर बाद उसकी मौत हो गई.

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नाबीरे और उसके बाद सेन डिएगो में एक और सफ़ेद राइनो की मौत के बाद अब इस प्रजाति के केवल तीन ही जानवर बचे हैं, जिन्हें कीनिया में कड़ी निगरानी में रखा गया है.
प्रजनन के लिए ये अब बहुत बूढ़े हो चुके हैं, हालांकि कोशिश की जा रही है कि इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (कृत्रिम गर्भाधान) के ज़रिए गर्भाधान कराया जाए और उसे इनके जैसे ही एक राइनो को गर्भ में स्थापित किया जाए.
जोएल कहते हैं, "यो कोई छोटी चीज़ तो नहीं जिन्हें विलुप्त होने दिया जाए. दुर्भाग्य से ये बड़ी बात है."

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जोएल को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट के तहत वो कम से कम 12,000 प्रजाति के जानवरों की तस्वीरें लेकर आने वाले पीढ़ी के लिए ज़रूरी जानकारी इकट्ठा कर पाएंगे.
वे कहते हैं, "मैंने जिन जीवों की तस्वीरें ली हैं उनमें से 75 से 80 फासदी जीवों को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है. लेकिन उसके लिए ज़रूरी है कि लोग जानें कि ये जीव धरती पर हैं और उन्हें बचाने की, उनसे प्यार करने की ज़रूरत है. हमें सीखना होगा कि हम उन्हें कैसे बचा सकें."

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जोएल बताते हैं, "फ़ोटोआर्क का मकसद है कि सभी जानवरों के होने की ख़ुशी मनाई जाए, चाहे वो छोटे हों या फिर बड़े. और लोगों को इनके बारे में बताया जाना चाहिए ताकि इन्हें बचाया जा सके."
वो कहते हैं, "ये मानवता के हित में है कि प्रकृति की सभी रचनाओं को बचाया जाए ताकि हमारा ग्रह सुंदर बना रहे."
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