थोड़ी देशभक्ति उधार मिलेगी क्या?

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
सुना है आपकी देशभक्ति काफ़ी उफ़ान मार रही है इन दिनों. मारनी भी चाहिए सर. ऐसा थोड़ी है कि सिर्फ़ 26 जनवरी और 15 अगस्त को ही देश की याद आए.
वैसे अमरीका में भी थोड़ी सी देशभक्ति आप एक्सपोर्ट करें तो बहुत अच्छा हो. यहां इसकी थोड़ी कमी पड़ने लगी है.
अब देखिए इतनी बड़ी ऐप्पल की दुकान चलाते हैं टिम कूक नाम के एक साहब. अब सरकार ने कहा ज़रा अपनी दुकान में पीछे से घुसने का एक छोटा सा रास्ता खोल दो, हम कभी-कभी आया करेंगे.

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साफ़ मना कर दिया. ये जुर्रत? ऐसे-ऐसे देशद्रोहियों को तो ग्वांतानामो जेल भेज दिया जाना चाहिए. बल्कि ग्वांतानामो क्यों, पटियाला हाउस कोर्ट में भेज देना चाहिए.
ग्वांतानामो के लिए तो बंदा तैयार होकर जाता है कि बेड़ियां पहननी होंगी, लात-जूते पडेंगे, सच-झूठ उगलवाया जाएगा.
पटियाला हाउस में तो वो चौड़ा होकर जा रहा होता है क़ानून की ढाल लेकर लोकतंत्र को ललकारने.

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वहां देशभक्तों की फ़ौज जब उन्हें सबक़ सिखाती है तब जाकर पता चलता है कि देशभक्ति होती क्या है. सरजी पटियाला हाउस के इन फ़ौजियों को तो इस बार की लिस्ट में एक-दो परमवीर चक्र और अशोक चक्र ज़रूर दीजिएगा.
वैसे सर देशभक्ति पर एक सर्वे करवाने की भी ज़रूरत है. अमरीका में भी दो साल पहले किया गया था. जो 35 के उपरवाले थे उनका तो यही कहना था कि झंडे को लहराता देखकर उनका सीना 56 इंच का हो जाता है.
लेकिन ये जो नालायक नौजवान नस्ल है उनमें से बहुतों ने कहा उन्हें कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता. उनके लिए इन निशानियों से कहीं ज़्यादा अहम है सबके लिए बराबरी का हक़, बोलने की आज़ादी वग़ैरह वग़ैरह.

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यही लोग ख़तरनाक हैं सरजी. लेकिन अमरीका में कोई सही तरीके से इन्हें सबक़ नहीं सिखाता.
वैसे कभी-कभी कोशिश होती है लेकिन लोग इंटरनेट पर ही अपना ग़ुस्सा निकालकर रह जाते हैं.
पिछले साल अमरीकी फ़ौज में काम कर चुकी एक फ़ोटोग्राफ़र ने अमरीकी झंडे को पालने की तरह बनाकर और उसमें एक दुधमुंही बच्ची को लिटाया और फ़ौजी वर्दी पहने हुए एक महिला के साथ उसकी तस्वीर ली.
क्या जगी थी अमरीकी देशभक्ति उस वक़्त. लोगों ने कहा कि उस फ़ोटोग्राफ़र को ख़ुदकुशी कर लेनी चाहिए क्योंकि उसने झंडे का अपमान किया है. जैसे आपने देशद्रोह का मुक़दमा दायर किया है, वैसे ही यहां भी उसके ख़िलाफ़ झंडे के अपमान का मामला दर्ज करने की ज़बरदस्त मांग हुई.
लेकिन हुआ कुछ नहीं. अब यहां की पुलिस अपनी दिल्ली पुलिस की तरह चुस्त-दुरूस्त थोड़ी है.

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लेकिन सर अमरीका को कम मत आंकिएगा. देखिए कहीं नवंबर में डॉनल्ड ट्रंप साहब राष्ट्रपति बन गए तो आपकी देशभक्ति पीछे रह जाएगी.
उन्होंने तो अमरीका को फिर से महान बनाने की ठान ली है. उनके राज में तो साफ़ है सर, जिसकी भी देशभक्ति थोड़ी कम नज़र आई उसकी तो लग गई.

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वैसे मुझे लगता है उनसे आपकी अच्छी जमेगी सर. बस एक ख़्याल रखिएगा, यहां आकर जो आप भारत माता की जय के नारे लगाने लगते हैं न, वो ज़रा सोच समझकर कीजिएगा.
थोड़े से सेंसिट्व हैं इस मामले को लेकर यहां के देशभक्त. और ट्रंप साहब के राज में तो देशभक्ति का ठेका उन्हीं के पास रहेगा. बाकी तो सर आप ख़ुद ही समझदार हैं.
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