'अमरीकी कंपनियों को भारत में विरोध झेलना होगा'

अमरीकी तकनीकी कंपनियों के प्रमुख नरेंद्र मोदी के साथ.

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इमेज कैप्शन, अमरीकी तकनीकी कंपनियों के प्रमुख नरेंद्र मोदी के साथ.
    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कैलिफोर्निया से

सिलिकॉन वैली के 'स्टार्ट अप गुरु' कहे जाने वाले विवेक वाधवा का मानना है कि जब अमरीकी इंटरनेट कंपनियां मुफ़्त या लगभग मुफ़्त वाई-फ़ाई की सुविधा लेकर भारत जाएँगी तो उन्हें भारतीय कंपनियों के तगड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

रविवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिलिकॉन वैली के पांच दिग्गजों का एक ही मंच पर आने और डिजिटल इंडिया पर अपने विचार रखने की इंटरनेट, सोशल मीडिया और उद्योग जगत में ख़ासी चर्चा हो रही है.

इस दशक के अंत तक 50 करोड़ भारतीयों के इंटरनेट से जुड़ने को सिलिकॉन वैली के लिए एक नायाब मौका माना जा रहा है लेकिन इसमें कुछ दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं.

'स्टार्ट अप गुरु' वाधवा का मानना है कि भारत की इंटरनेट कंपनियां 'अमरीकी कंपनियों की राह में रोड़े अटका सकती हैं.'

भविष्य पर स्टार्ट अप गुरु विवेक वाधवा-

गूगल और फ़ेसबुक का लक्ष्य है कि वे दुनिया में वाई-फ़ाई सेवा लगभग मुफ़्त दें. भारत जाने पर भी गूगल और फ़ेसबुक का यही लक्ष्य होगा. इससे कई लोग इंटरनेट सेवाएं नहीं खरीदेंगे, क्योंकि आज की तरह डेटा ख़रीदने की ज़रूरत ही नहीं होगी.

ज़ाहिर है इस स्थिति में एयरटेल, वोडाफ़ोन और रिलायंस जैसी कंपनियों को नुक़सान होगा. विरोध जितना भी हो अंत में भारतीय कंपनियों को पीछे हटना ही होगा. अगले पांच साल में पूरी दुनिया में इंटरनेट का फैलाव तेज़ी से होगा. ऐसी स्थिति में भारत जैसा देश इंटरनेट पर न आए, यह मुमकिन नहीं है.

'मौका बड़ा है, चूकना नहीं चाहेंगे'

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत

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अमरीका की तकनीकी कंपनियों ने भारत के प्रधानमंत्री से जो उम्मीदें पाल रखी थीं, वे पिछले एक साल में तो पूरी नहीं हुईं, लिहाज़ा, वे मोदी से निराश हैं.

दरअसल, नरेंद्र मोदी ने साल भर पहले इन कंपनियों से जो वादा किया था, उसे उन्होेंने पूरा करने की दिशा में कुछ नहीं किया है.

लेकिन निकट भविष्य को लेकर लोग काफ़ी खुश हैं और उन्हें मोदी से काफ़ी उम्मीदें भी हैं.

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में मोदी के साथ तकनीकी कंपनियों के प्रमुख.
इमेज कैप्शन, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में मोदी के साथ तकनीकी कंपनियों के प्रमुख.

उम्मीद है कि मोदी जल्द ही भारत के लिए काफ़ी कुछ करने का प्रयास करेंगे और तकनीक के बल पर पूरे देश को बदल कर रख देंगे.

तकनीक के बल पर शिक्षा, स्वास्थ्य समेत, तमाम क्षेत्रों में काफ़ी काम किया जा सकता है और मोदी ऐसा ही करेंगे.

अमरीका में हो रही मोदी की आवभगत इसलिए हो रही है क्योंकि भारत इंटरनेट का बहुत बड़ा बाज़ार बन कर उभर रहा है, वहां इस उद्योग में अपार संभावनाएं हैं.

भारत में अगले तीन से पांच साल में तक़रीबन 50 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़ेंगे. सिलिकॉन वैली की कंपनियों के लिए यह बहुत बड़ा मौका है ओर वे इससे चूकना नहीं चाहते.

'दवाब बढ़ सकता है'

एपल प्रमुख टिम कुक नरेंद्र मोदी के साथ.

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इमेज कैप्शन, एपल प्रमुख टिम कुक नरेंद्र मोदी के साथ.

अमरीकी तकनीकी कंपनियां अभी तो भारत को समझा रही हैं, मोदी को बता रही हैं कि किस तरह यह भारत के हित में ही है.

यदि भारत ने इंटरनेट व्यवसाय नहीं खोला तो बाद में यही कंपनियां भारत के प्रधानमंत्री पर दवाब भी बना सकती हैं.

(बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय से बातचीत पर आधारित - ये प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा पर विवेक वाधवा के निजी विचार हैं)

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