मंगल पर बस्ती में 'विद्रोह' की चर्चा क्यों?

इमेज स्रोत, BBC EARTH
- Author, रिचर्ड होलिंघम
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
लंदन में डेढ़ महीने पहले, ब्रिटेन की सुरक्षा सेवा एमआई6 के मुख्यालय के नज़दीक ही एक इमारत में, 30 पुरुषओं और महिलाओं का ग्रुप सरकार को उखाड़ फेंकने के मुद्दे पर विचार विमर्श कर रहा था.
चौंकिए नहीं, मैं पहले ही स्पष्ट कर दूँ, ये समूह ना तो ब्रिटिश सरकार को सत्ता से हटाने की तैयारी कर रहा था और ना ही पृथ्वी पर मौजूद किसी अन्य सरकार को.
दरअसल यहां विचार विमर्श हो रहा था पृथ्वी से दूर, किसी दूसरी दुनिया में, भविष्य में बनी तानाशाह सरकार को अपदस्त करने के बारे में.
ये कोई मज़ाक नहीं, क्योंकि इस गंभीर चर्चा और तैयारी में 30 वैज्ञानिक, इंजीनियर, समाज वैज्ञानिक, दार्शनिक और लेखक शामिल थे. ये सब लंदन की ब्रिटिश इंटरप्लेनेटरी सोसायटी के सदस्य हैं और गंभीरता से इस मामले की गहन पड़ताल, अध्ययन और इस बारे में योजनाएं बना रहे हैं.
ऐसा भी नहीं कि ये कोरी कल्पना की बातें हैं. वो दिन अब दूर नहीं जब मनुष्य लंबे समय तक, महीनों और संभवत: सालों तक के लिए अंतरिक्षयान में या फिर गहों-उपग्रहों पर कलोनियां बसाकर रहेंगे.
ये मनुष्य चाहे उपलब्ध संसाधनों को पृथ्वी के लिए जुटाने के लिए वहाँ गए हों या फिर स्थायी बस्तियां बसाने के लिए, उन्हें एक व्यवस्थित जीवन, रहन-सहन और नियम क़ानून की ज़रूरत तो होगी ही.
अंतरिक्ष में लोगों के बीच मतभेद यदि हिंसा, तोड़-फोड़ तक बढ़ जाएँ, या फिर साज़िश के तहत अचानक ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो जाए या पानी की आपूर्ति बंद हो जाए, तो ये जानलेवा हो सकता है.
तानाशाही के ख़िलाफ़ विद्रोह
दरअसल यह परग्रही स्वतंत्रता और अधिकारों के मुद्दे पर तीसरी सालाना बैठक है. पिछले साल हुई बैठक में पृथ्वी से इतर के ग्रहों पर संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए एक संविधान तैयार किया गया था. इसे अमरीकी संविधान और 'बिल ऑफ़ राइट्स' यानी कानूनी अधिकारों-मान्यताओं के मुताबिक तैयार किया गया था.

इमेज स्रोत, BBC World Service
यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबरा में अस्ट्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर चार्ल्स कॉकेल कहते हैं, "इस साल हम लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि अगर अंतरिक्ष में, किसी ग्रह-उपग्रह पर आपने जो सरकार चुनी है, वो तानाशाही पर उतर आए, और आप उसे हटाना चाहें, तो क्या करेंगे."
इन बैठकों और विचार-विमर्श के नतीजों को निबंध के तौर पर प्रकाशित किया जाएगा, जो आने वाले समय में स्पेस यात्रियों के लिए नियमावली के तौर पर काम करेगी.
कॉकेल कहते हैं, "हमें उम्मीद है कि इस बातचीत के जरिए हम परग्रही अधिकारों और स्वतंत्रता के मुद्दे पर पहला मसौदा तैयार कर लेंगे. हमें मौका मिला है कि हम अंतरिक्ष की उन समस्याओं के बारे में सोचेंगे जो हमारे सामने आ सकती हैं. वहां जाने से पहले ही उन पर चर्चा कर लेना बेहतर है."
ऑक्सीजन पर किसका नियंत्रण?
कल्पना कीजिए कि पृथ्वी से 22.5 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर मंगल ग्रह पर एक कॉलोनी बसी हुई है. इन कालोनियों में एक निरकुश शासक का राज है और उसके साथी ही ऑक्सीज़न जेनरेटरों के प्रभारी हैं.
कॉकेल कहते हैं, "उदाहरण के लिए, अगर आप वहां सरकार से तंग हैं, क्रांति की शुरुआत करते हैं और कोई जाकर मंगल ग्रह पर बसी आवासीय कालोनियों में तोड़फोड़ मचाता है, खिड़कियां तोड़ देता है तो क्या होगा? अचानक से पूरी बस्ती डी-प्रेशराइज़ हो जाएगी, ऑक्सीज़न ख़त्म हो जाएगी और सभी लोग मर जाएँगे."

इमेज स्रोत, BBC World Service
कॉकेल आगाह करते हैं कि अंतरिक्ष में होने वाली हिंसा का असर, पृथ्वी पर होने वाली हिंसा की तुलना में कहीं ज़्यादा विनाशकारी होता है. तो ऐसी किसी हिंसा को रोकने के लिए क्या उपाय होने चाहिए?
कॉकेल बताते हैं कि पहले तो किसी तानाशाह को उत्पन्न ही नहीं होने देना चाहिए. इसके लिए गैर-हिंसक विरोध की व्यवस्था होनी चाहिए. संगठित तौर पर श्रम व्यवस्था होनी चाहिए, ठीक उसी तरह जिस तरह पृथ्वी पर मज़दूर यूनियन होती हैं. इतना ही नहीं, प्रेस और मीडिया को पूरी आजादी देनी होगी.
'निजी कंपनियां निरंकुश हो सकती हैं'
कॉकेल कहते हैं, "अगर पृथ्वी से इतर दुनिया में आप स्वतंत्र प्रेस को बंद कर देते हैं तो आप गंभीर संकट में फंस सकते हैं."

इमेज स्रोत, BBC World Service
इसके अलावा मंगल ग्रह पर बनने वाली कालोनियों की इमारतों को भी ऐसे डिज़ाइन करने की जरूरत होगी जो संघर्ष की स्थिति में कम ख़तरनाक साबित हों. कई जगहों पर हवा, जल और बिजली की उपलब्धता के केंद्र बनाने होंगे. इससे सेंट्रल कंट्रोल से होने वाली मुश्किलें भी दूर होंगी और किसी संकट का असर भी कम आबादी पर होगा.
अगर किसी दूसरे ग्रह पर कालोनियां बसती हैं तो कंपनियां भी वहां मौजूद होंगी. कॉकेल बताते हैं, "हम जानते हैं कि प्राइवेट कॉरपोरेशन किस तरह से निरंकुश हो सकती है. ऐसे में वहां अगर किसी यूनियन ने हड़ताल की, तो क्या पता प्राइवेट कंपनी उस जगह से लोगों को बाहर कर दे और वे सारी उम्र खुले अंतरिक्ष में ही फंस जाएं."
कॉकेल बताते हैं, "हमें समाज में एक संतुलन बनाकर रखना होगा, ताकि नागिरकों के अधिकारों और स्वतंत्रता के साथ साथ लोगों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया जाना भी संभव हो."
कल्पना लोक की दुनिया
वैज्ञानिकों की दुनिया इन दिनों पृथ्वी से बाहरी दुनिया पर रहने के लिए विचार कर रही है लेकिन साइंस फ़िक्शन के लेखक तो कई दशक पहले से ही इस बारे में सोचने लगे थे.
ब्रिटिश इंटरप्लेनेटरी सोसायटी की इस बैठक में मशहूर विज्ञान लेखक आर्थर एस क्लार्क और स्टीफन बाक्सटर भी शामिल हैं.

इमेज स्रोत, BBC World Service
बाक्सटर ने 2010 में लिखे अपने उपन्यास आर्क में तारों की दुनिया में शासन से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है. बाक्सटर कहते हैं, "एक बक्से के अंदर समाज को विकसित होते देखने का विचार काफी दिलचस्पी पैदा करने वाला है.
वैसे चंद्रमा पर मनुष्यों के कदम पड़ने से काफी पहले 1930 के दशक में विज्ञान लेखक जैक विलियम्सन ने अपने उपन्यास द बर्थ ऑफ़ ए न्यू रिपब्लिक में पृथ्वी और चंद्रमा के समाज के बीच तनाव को चित्रित किया था.
बाक्सटर के मुताबिक इस तरह की बैठकों के जरिए वैज्ञानिक कल्पनाओं की दुनिया को वास्तविक दुनिया में लाने में मदद मिलेगी.
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150619-how-to-overthrow-a-martian-dictatorship" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां</caption><url href=" https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>













