आउशवित्स नाज़ी कैंपः न भूलने वाली दास्तां

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के एक नाज़ी कैम्प आउशवित्स के ज़िंदा बचे 300 लोग इस कैंप की आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ मनाने के लिए इकठ्ठा हुए.
दक्षिणी पोलैंड में स्थित इस कैंप में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1940 से 1945 के बीच क़रीब 11 लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, जिनमें से ज़्यादातर यहूदी थे.

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माना जा रहा है कि यह अंतिम बड़ी वर्षगांठ है, जिसमें नरसंहार से बच गए लोग भारी संख्या में शामिल हो पाएंगे.
मारे गए लोगों की याद में हो रहे इस कार्यक्रम में विश्व युद्ध के दौरान सहयोगी देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.
मारे गए लोगों की याद में आउशवित्स परिसर का हिस्सा रहे बर्केनाउ कैंप में फूल और मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी जाएगी.
आउशवित्स-बर्केनाउ को 27 जनवरी 1945 में सोवियत संघ की रेड आर्मी ने मुक्त कराया था.
रेड आर्मी

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वर्ष 1947 में इसे म्यूज़ियम बना दिया गया. इसके रखरखाव के लिए धन इकठ्ठा करने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा.
हालांकि आउशवित्स-बर्केनाउ फाउंडेशन ने हाल ही में कहा था कि वो 15 करोड़ डॉलर (क़रीब 9.2 अरब रुपए) इकठ्ठा करने के लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया है.
इस कैंप का निर्माण 1940 में शुरू किया गया था, जो 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था. कैंप में रोमा जिप्सियों, अक्षम लोगों, समलैंगिकों, पोलैंड के गैर यहूदियों और सोवियत संघ के क़ैदियों को रखा गया था.
मंगलवार को हुए इस समारोह में उत्तरी लंदन में रहने वाली 85 वर्षीय रेनी साल्ट भी शामिल थीं
उन्होंने बीबीसी को बताया कि दस साल पहले वो पहली बार यहां आई थीं और उसके बाद से वो हमेशा आती रही हैं.
त्रासदी

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उन्होंने कहा, "जब तक मैं यह कर सकती हूं, तब तक आती रहूंगी. अभी भी पूरी दुनिया में इस नरसंहार से इनकार करने वालों की तादात बहुत है और हम नहीं बोलेंगे तो दुनिया यह नहीं जान पाएगी कि वहां क्या हुआ था."
मंगलवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक दस्तावेज प्रकाशित किया, जो उनके अनुसार, आउशवित्स की मुक्ति का अभिलेखीय दस्वाजे है.
इसमें 60वें आर्मी ऑफ़ दि फर्स्ट यूक्रेनियन फ़्रंट के जनरल क्रैमनिकोव का बयान भी शामिल है. इसके अनुसार, जब सिपाहियों ने इस कैंप का गेट खोला तो मौत के इस कैंप से 'असंख्य लोगों भीड़' निकली.
पुतिन नहीं पहुंचे

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जनरल ने लिखा है, "वे सभी बुरी तरह थके दिख रहे थे. भूरे वालों वाले आदमी, नौजवान, गोद में बच्चे लिए महिलाएं और बच्चे सभी लगभग अर्ध नग्न अवस्था में थे."
उन्होंने लिखा है, "शुरुआती संकेत बता रहे थे कि आउशवित्स में लाखों कैदियों से अंतिम सांस तक काम कराया जाता रहा, उन्हें जला दिया गया या गोली मार दी गई."
इस समारोह में शामिल होने पहुंचने वाले जर्मन राष्ट्रपति योआख़िम गौक और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांदे भी थे.
लेकिन समारोह और यूक्रेन में रूस के हस्तक्षेप को लेकर हुए पोलैंड से विवाद के बीच रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन शामिल नहीं हो रहे हैं.
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