विश्वयुद्ध में जब नाज़ी आराम फरमा रहे थे

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब हर तरफ रक्तपात, साजिश और संघर्ष का माहौल था तो ये अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है कि सैनिकों की क्या स्थिति होगी.
युद्ध में जर्मनी के एक सैनिक के कैमरे से ली गई तस्वीरें नीदरलैंड में प्रदर्शित की गई हैं. ये प्रदर्शनी हमेशा के लिए जारी रहेगी.
जर्मन सैनिक का ये कैमरा एक ब्रितानी नौसैनिक को नीदरलैंड में ही मिला था.

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रॉयल मैरीन ऑर्थर थॉम्प्सन उन दिनों डच लोगों को आजाद कराने के लिए ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों की सेना की संयुक्त कार्रवाई में भाग ले रहे थे.
वालशेरेन के द्वीप पर जर्मन सैनिक अपना बंकर छोड़ कर भाग गए थे. ऑर्थर थॉम्प्सन को ये कैमरा इसी बंकर में मिला था.
कैमरे के रोल में जो तस्वीरें कैद थीं, उनमें जर्मन सैनिक आराम फरमा रहे थे और एक दूसरे से हंसी मजाक कर रहे थे.

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ऑर्थर ने उसी कैमरे से ब्रितानी सैनिकों की भी तस्वीरें खींची.
ऑर्थर की 89 साल की उम्र में 2013 में मौत हो गई. उनकी आखिरी ख्वाहिश थी कि वो तस्वीरें और कैमरा वापस नीदरलैंड ही पहुंचा दिया जाए, जहां से वे इसे लाए थे.
यह बंकर हिटलर ने मित्र देशों की गठबंधन सेना की ओर से होने वाले किसी संभावित हमले से बचने के लिए अपनी रक्षा पंक्ति के तौर पर तैयार करवाया था.

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हिटलर की ये रक्षा पंक्ति स्पेन की सीमा से स्कैंडिनेविया तक फैली हुई थी. तब ऑर्थर 21 साल के थे.
वे 47 सदस्यों वाली रॉयल मैरीन कमांडो टुकड़ी में थे, जिसे डच लोगों को आज़ाद कराने की मुहिम के तहत एंटवर्प के बंदरगाह को जर्मन कब्ज़े से छुड़ाने के मिशन पर भेजा गया था.

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मरने से पहले उन्होंने कहा था, "हम बंकर के भीतर गए और मैंने वो कैमरा उठा लिया. मैंने इससे तस्वीर भी खींची. जर्मन सैनिक वहां से काफी कुछ लेकर चले गए थे और वहां बहुत कम चीजें रह गई थीं. मैंने कुछ एक चीजें ले लीं."
उन्होंने कहा था, "जब मैं घर वापस लौटा तो उसके रोल को डेवलप कराया, तभी मैंने जर्मन सैनिकों की तस्वीरें देखीं."

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'दी 47 रॉयल मरीन कमांडो' का गठन अगस्त 1943 में किया गया था. फ्रांस के नॉरमैंडी क्षेत्र में की गई सैनिक कार्रवाई में ऑर्थर को पहली बार युद्ध में शामिल होने का मौका मिला था.

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ऑर्थर थॉम्प्सन की बेटी क्लेयर हंट बताती हैं कि 'फॉक्तलैंडर बेसा कैमरा' उनकी जिंदगी का तब से हिस्सा रहा है, जब से उन्होंने अपना होश संभाला.
वे कहती हैं कि उनके पिता हमेशा इसी से तस्वीरें खींचा करते थे.

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ऑर्थर को जब ये कैमरा मिला था, उसके ठीक 70 साल बाद उनकी बेटी ने इसे नीदरलैंड के वेस्टकैपेल में पोल्डरहॉइस म्यूज़ियम को दे दिया.
इस म्यूज़ियम में अब ये कैमरा और पहले रोल की तस्वीरें हमेशा के लिए रख दी गई हैं.
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