हां, होता है बाघों की खाल का व्यापारः चीन

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- Author, नवीन सिंह खड़का
- पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी
चीन ने सार्वजनिक रूप से पहली बार कुबूला है कि वह क़ैद में रखे बाघों की खाल के व्यापार की अनुमति देता है. यह जानकारी खतरे में पड़े जीवों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल प्रतिभागियों ने दी है.
इनके मुताबिक़ कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एन्डेन्जर्ड स्पिशीज़ ऑफ़ वाइल्ड फॉना एंड फ़्लोरा (साइट्स) में चीनी अफ़सरों ने पहले कभी यह स्वीकार नहीं किया था.
हालांकि जेनेवा में हुई साइट्स की स्थायी समिति की बैठक में चीन ने कथित रूप से कहा कि उसने अब भी बाघ की हड्डियों पर प्रतिबंध लगा रखा है.
साइट्स सचिवालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि चीनी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने यह कहा है.
माना जाता है कि चीन में 5,000 से 6,000 बाघ क़ैद में हैं. जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन लंबे समय से खालों के व्यापार पर रोक लगाने की मांग करते रहे हैं.
'बाघों की खेती'
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में 'बाघों की खेती' ने दूसरी जगहों पर भी इसके शिकार और तस्करी को बढ़ावा दिया है.

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ख़बरों में कहा गया है कि बाघों की क़ैदगाह से ज़िंदा जानवर और जानवरों के अंग अंतर्राष्ट्रीय ग़ैरक़ानूनी बाज़ार में पहुंचाए जा रहे हैं.
चीन ने यह स्वीकारोक्ति एक रिपोर्ट पेश करने के बाद की, जिसमें कहा गया था कि चीनी सरकार ने क़ैद में रखे बाघों की खाल के व्यापार को अनुमति दे दी है.
नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर एक प्रतिभागी ने कहा, "जब बैठक में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार हो रहा था तो चीनी सदस्य ने दखल दिया. उन्होंने पहली बार आधिकारिक रूप से माना कि चीन में यह व्यापार होता है."

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वन्य जीवों के लिए काम करने वाली ब्रिटेन की पर्यावरण जांच संस्था से जुड़ीं श्रुति सुरेश कहती हैं, "चीन के दखल के बाद हमने अपनी बात रखी और साफ़ किया कि दूसरे संगठनों के साथ मिलकर की गई जांच से साफ़ पता चलता है कि चीन में यह व्यावसायिक स्तर पर हो रहा है."
उन्होंने कहा, "यह सफ़ाई इसलिए ज़रूरी थी क्योंकि चीनी प्रतिनिधि ने यह नहीं कहा था कि यह व्यावसायिक स्तर पर हो रहा है. डर यह था कि बाद में कह दिया जाता कि ऐसा तो वैज्ञानिक शोध के लिए या संग्रहालय में रखने के लिए हो रहा था."

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साइट्स के सदस्य देशों को यह बताना होता है कि उन्होंने खतरे में पड़ी जंगली जानवरों या पौधों के व्यापार के दौरान यह सुनिश्चित किया है कि वो बचे रहेंगे.
वन्यजीव व्यापार पर एक नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2000 में दुनिया भर में जंगली और क़ैद में रखे गए क़रीब 1600 बाघों का व्यापार किया गया था.
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