नेल्सन मंडेला की मूर्ती के कान में खरगोश

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दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के निधन के बाद लगाई गई उनकी एक प्रतिमा के कान में तांबे का एक खरगोश बना हुआ है, जिसको लेकर काफी विवाद हो गया है.

अफ्रीका की सरकार ने मूर्तिकारों को इस खरगोश को हटाने का आदेश दिया है.

सरकार के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि वह प्रतिमा के प्रति सम्मान लौटाना चाहते हैं.

ऐसा कहा जा रहा है कि मूर्तिकार ने 'ट्रेडमार्क सिग्नेचर' और इसे बनाने में बरती गई तेज़ी को दर्शाने के लिए उसमें खरगोश लगाया.

अफ्रीकी भाषा में खरगोश को ''हास'' कहा जाता है जिसका मतलब शीघ्रता है.

कला और संस्कृति विभाग के प्रवक्ता मोगोमोस्ती मोगोदिरी ने बीबीसी के अफ्रीकी रेडियो कार्यक्रम में कहा, ''हम इसे ठीक नहीं समझते, क्योंकि नेल्सन मंडेला ने अपने कान पर खरगोश नहीं रखा था.''

आशा के प्रतीक

उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि लोग इस प्रतिमा को आशा के प्रतीक के रूप में देखें न कि एक खरगोश की तरह किसी चीज के रूप में.

हाल में 95 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले मंडेला को दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद के ख़िलाफ़ उनकी लड़ाई के लिए याद किया जाता है.

मंडेला के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद 16 अगस्त को 30 फुट की उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया गया.

यह राजधानी प्रीटोरिया में सरकार के मुख्यालय यूनियन बिल्डिंग में स्थित है.

माफ़ी मांगी

मोगोदिरी ने कहा कि मूर्तिकार ने प्रतिमा के दाएं कान में खरगोश बनाने को लेकर उनसे हुए किसी भी अपराध के लिए उन्होंने सरकार और मंडेलापरिवार से माफ़ी मांगी है.

उन्होंने कहा कि प्रतिमा से खरगोश को कब हटाया जाएगा, इसको लेकर चर्चा चल रही है. सरकार इसे जल्द से जल्द हटाकर मंडेला के बुत का सम्मान लौटाना चाहती है.

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दक्षिणी अफ्रीका के बील्ड अख़बार के मुताबिक मूर्तिकार एंड्रे प्रिंसलू और रहन जांसे ने कहा है कि उन्हें प्रतिमा के पतलून पर अपना ''सिग्नेचर'' लगाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण उसमें खरगोश बना दिया.

उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि इस काम को समय पर पूरा किया गया.

प्रिंसलू ने कहा है कि समय का मुद्दा बेहद अहम था और इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी.

उन्होंने कहा कि प्रतिमा के कान में एक छोटा सा पहचान लगा है और "इसे देखने के लिए लंबे लेन्स या ताकतवर दूरबीन की ज़रूरत है, इसे यूं ही देख पाना लगभग नामुमकिन है".

उन्होंने कहा कि इसे खड़ा करने के वक्त बहुत सारे लोगों ने इसे बेहद करीब से देखा लेकिन किसी ने कान में खरगोश नहीं देखा.

उधर मोगोदिरी ने कहा कि मूर्तिकारों ने कलाकृति में ''सिग्नेचर'' लगाने के लिए कभी अनुमति नहीं मांगी थी और अनुमति नहीं दिए जाने के उनके दावे पर सरकार आश्चर्यचकित है. बीमारी के बाद पांच दिसंबर को मंडेला का निधन हो गया था.

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