'तुम सचमुच एक फ़रिश्ता हो'

- Author, गैरी बुचर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ब्रिटेन के रेलवे ट्रैक पर रोज़ कोई न कोई ख़ुदकुशी की कोशिश ज़रूर करता है. वहाँ के हज़ारों कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि संकेतों को पहचान कर वो लोगों की जान बचा सकें.
इसके लिए क्या प्रयास हो रहे हैं और रेलवे नेटवर्क पर आत्महत्या का क्या असर होता है?
शैरोन विलेट पूर्वी तट के प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी आठ घंटे की पाली में काम कर रहे थे. उन्होंने एक लड़के को प्लेटफ़ॉर्म की बैंच पर अकेले बैठे देखा. जो टोपी पहले ख़ुद में खोया हुआ था. वह रोता हुआ लग रहा था, लेकिन वह निश्चित नहीं हो पा रही थीं क्योंकि उसने अपना चेहरा छिपा रखा था.
वह लड़का सामने से गुज़रने वाली तमाम ट्रेनों में नहीं बैठा, इसलिए वह सतर्क हो गईं. इस काम में उन्हें मिले प्रशिक्षण ने उनकी मदद की.
दिल की बात
विलेट ने प्रशिक्षण में सीखी बातों का इस्तेमाल लड़के से बात करने के लिए किया. उससे पूछा कि क्या उसे रेलगाड़ियां पसंद हैं? लेकिन लड़के ने गालियों की झड़ी लगा दी, उसके बाद हताशा से टूटकर रोने लगा.
वो बताती हैं, "उसने अपने दिल की बात मुझसे कही कि वह ज़िंदगी से नफ़रत करता है. वह हर चीज़ से घृणा करता है. वह चाहता है कि हर चीज़ उससे दूर हो जाए और आज की रात वह बहुत दूर चला जाएगा."
इसके बाद 15 साल की उम्र का लड़का सहज होने लगा और उसे पता चला कि स्कूल में उसे प्रताड़ित किया गया था. उसने महसूस किया कि वह उसकी मदद करने में सक्षम थी.
विलेट उन पाँच हजार कर्मचारियों में से एक हैं, जिनको मुसीबतज़दा लोगों की मदद के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौक़ा मिला.
आत्महत्या के मामले
बीबीसी रेडियो 5 को मिले आंकड़ों के मुताबिक़ अप्रैल से अक्टूबर 2013 के बीच 313 लोगों ने जान देने की कोशिश की, जिनको ऐसा करने से रोका गया.
हमारे पास सटीक विश्लेषण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुछ लोगों का मदद योजना बनाने वाले लोगों ने की, बाक़ी की मदद रेलवे के नियमित कर्मचारियों, ट्रांसपोर्ट पुलिस और आम लोगों ने की.
पिछले साल रेलवे नेटवर्क ने इस योजना में पाँच मिलियन यूरो का निवेश किया और ट्रेन कंपनियों को <link type="page"><caption> आत्महत्याओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/08/120831_jalandhar_girl_ac.shtml" platform="highweb"/></link> के कारण होने वाले व्यवधान के लिए 33 मिलियन यूरो का भुगतान किया. इस कारण यात्रियों को लगभग पाँच हज़ार घंटे की देरी हुई.
रेलवे उद्योग के राष्ट्रीय आत्महत्या निरोधक समूह के प्रमुख नील हेनरी कहते हैं कि यह कार्यक्रम पैसा बचाने से काफ़ी ज़्यादा महत्वपूर्ण है.
नील कहते हैं, "यह कार्यक्रम केवल बैलेंस शीट के बारे में नहीं है. हम लोगों की ज़िंदगी के बारे में बात कर रहे हैं. यह ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि इस कार्यक्रम से आत्महत्याओं में कमी आ रही है."
बातचीत है समाधान

मुसीबत में लोगों की मदद करने का प्रशिक्षण देने वाले स्टीव टॉलेरटॉन कहते हैं कि रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर लंबे समय तक बैठना, स्टेशन पर रुकने वाली किसी ट्रेन में न बैठना गंभीर ख़तरे के संकेत हो सकते हैं.
नाइटी, ड्रेसिंग गाउन, हवाई चप्पल, अस्पताल के कपड़े पहनना ख़तरे के प्रमुख संकेत हैं. इसके अतिरिक्त कभी-कभी आत्महत्या की कोशिश करने वाले लोग प्लेटफ़ॉर्म पर अपने कपड़ों को उतारकर समेटते देखे जाते हैं.
टॉलेरटॉन कहती है कि बातचीत ही समाधान है.
वो आगे कहती हैं, "एक बार व्यक्ति बात करना शुरू देता है तो साफ़-साफ़ अपनी समस्याओं के बारे में बता सकता है. यह बात हैरान करती है. यह पहली बार हो सकता है कि व्यक्ति अपनी समस्याओं के बारे में किसी से बात कर रहा हो."
डॉन स्टीवर्ट जिस ट्रेन का संचालन कर रहे थे, उससे एक व्यक्ति को टक्कर लग गई थी.
अपराधबोध की भावना
उन्होंने बताया, "आपको बुरा लगता है कि आपसे कुछ ग़लत हुआ है. आप कुछ भी कहें कि आपने किसी को मारा है या नहीं, लेकिन जो ट्रेन आप चला रहे थे, उसका नियंत्रण आपके हाथ में था. इसने किसी को टक्कर मारी."
डॉन स्टीवर्ट तीन साल से वेल्स में ट्रेन ड्राइवर रहे हैं. उन्होंने अपने काम से एक साल के लिए छुट्टी ली और कुछ ड्राइवर तो काम पर दोबारा लौटे ही नहीं.
टॉलेरटान कहते हैं, "अपराध बोध की भावना काफ़ी तीव्र हो सकती है. अक्सर ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर ख़ुद को दोषी और ज़िम्मेदार मानते हैं. उनकी दर्द भरी भावनाएं और छवियां अगर सामने आएं, तो उसे आप कभी भूलेंगे."
रेलवे नेटवर्क स्टाफ़ और अन्य लोगों की कोशिशों के बावजूद ब्रिटेन रेलवे के लिएआत्महत्या अभी भी बेहद गंभीर समस्या बनी हुई है.
पिछले साल 238 लोगों ने ट्रेन के आगे जान गंवाई. 2010 के मुकाबले यह संख्या 20 प्रतिशत अधिक है."
हेनरी कहते हैं, "हम आत्महत्या के आँकड़ों में राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ोत्तरी होता देख रहे हैं."
'तुम फ़रिश्ता हो'

वो कहते हैं, "2010 के बाद इस महीने पहली बार ऐसा हुआ कि लगातार सात दिनों तक कोई दुर्घटना नहीं हुई."
प्रशिक्षण की यह योजना काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि "यह लोगों को परिस्थिति का सामना करने का आत्मविश्वास देती है कि क्या कहें और क्या न कहें?"
आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की जान बचाने वाली विलेट कहती हैं, "हमें सही जगह, सही भावनाओं और सही मुद्दों को पकड़ने की ज़रूरत होती है."
वह बताती हैं, "जब एक बार वे बात करने लगते हैं तो समस्या का समाधान शुरू हो जाता है, इसके बाद आप उनको सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का अगला क़दम उठाते हैं."
विलेट किशोरावस्था की उम्र के जिस लड़के से पहली बार मिली थीं, उसने पहली बार अपनी समस्या से किसी दूसरे व्यक्ति से साझा की थी.
वह कहती हैं, "कभी-कभी लोग परिवार और दोस्तों की तुलना में अजनबी लोगों के साथ ज़्यादा बातें साझा करते हैं."
लेकिन उस किशोर को सही रास्ते पर लाने का यह पहला क़दम था, ताकि उसको सही जगह लाया जा सके, जहाँ वह अभी है.
तीन सप्ताह बाद विलेट को उसकी माँ से एक पत्र मिला जिसमें लिखा था, "तुम्हारे रिश्ते, शब्दों और सहानुभूति ने उस बच्चे की ज़िंदगी बचा ली. तुमने उसको अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू करना संभव बनाया है. तुम्हारे इस काम के बदले केवल शुक्रिया कहना पर्याप्त नहीं हैं. हमारा परिवार तुमको एक फ़रिश्ते की तरह देखता है. तुम सचमुच एक फ़रिश्ता हो."
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