बिहार ट्रेन हादसा: 'ऐसा मंजर जीवन में कभी नहीं देखा था'

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, धमारा घाट, बिहार
धमारा घाट बिहार के खगड़िया ज़िले का एक छोटा सा गाँव है. सावन के महीने में यहाँ लाखों हिन्दू तीर्थयात्री आते हैं.
धमारा घाट स्टेशन के पास कात्यायनी स्थान मंदिर में हर सोमवार को बड़ा मेला लगता है जिससे वहां हादसे के दिन बहुत भीड़भाड़ थी.
सोमवार को तीन बच्चों की माँ 32 वर्षीय कुसुम कुमारी अपने पड़ोसियों के साथ यहाँ आई थीं.
कुसुम का दो साल का बेटा सोया हुआ था. उन्हें लगा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भीड़ छंट जाने के बाद ही ट्रेन से उतरना ठीक रहेगा.
और यही वजह रही कि वो विपरीत दिशा से आ रही <link type="page"><caption> एक्सप्रेस ट्रेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/08/130819_bihar_train_accident_galllery_vs.shtml" platform="highweb"/></link> से कुचलने से बच गईं.
बीबीसी से हुई बातचीत में कुसुम ने कहा, “बस कुछ मिनट बाद ही दूसरी तरफ से ट्रेन आ गई. मैं लोगों को रोते-चिल्लाते सुन सकती थी. ट्रेन से निकलने के बाद केवल लाशें ही दिख रही थीं.”
सोमवार को इस हादसे में 28 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ज़्यादातर औरतें और बच्चे हैं.
देर से पहुँची मदद

जो लोग इस हादसे के चश्मदीद रहे हैं उनके लिए ये एक बुरी याद बन चुका है.
धर्मेश कुमार पास के ही गाँव मानसी के रहने वाले हैं.
धर्मेश पूजा के लिए आ रहे अपने कुछ रिश्तेदारों का स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे.
इस हादसे को याद करते हुए धर्मेश बताते हैं, “मैंने पहले कभी इतने लोगों की लाश एक साथ नहीं देखी थी. लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे. करीब तीन घंटे तक उनकी सहायता के लिए कोई अधिकारी या चिकित्सक नहीं पहुँचा था. हम बस यही कर सकते थे कि जो लोग जीवित बचे हैं उन्हें पटरी पर से उठाकर प्लेटफॉर्म पर ले आएँ. बहुत से लोगों ने हमारी आँखों के सामने दम तोड़ दिया.”
रेल हादसे के कुछ दिन बाद भी पटरियों से रेलवे की लापरवाही साफ़ झलक रही है.
दूध के डिब्बे, कपड़े और गहने अभी भी पटरी पर पड़े हुए हैं.
कुछ घायलों को इलाज कराने के लिए तीन किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ा.
आसपास के गाँववालों में सरकार दर सरकार इस इलाके के प्रति बरती गई लापरवाही को लेकर काफी गुस्सा है.
27 वर्षीय प्रताप राय कहते हैं, "हर साल हज़ारों लाखों लोग इस तीर्थयात्रा पर आते हैं. इस रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाने की माँग आज तक नहीं मानी गई. यदि ट्रेन से यात्रियों को सीधे प्लेटफॉर्म पर उतारा जाता तो इन लोगों की जान बच सकती थी."
इसी रेल पटरी पर कुछ महीने पहले ट्रेन की चपेट में आ जाने से प्रताप के भाई की मृत्यु हो गई थी.
साल दर साल उपेक्षा

<link type="page"><caption> बिहार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130819_bihar_train_incident_dp.shtml" platform="highweb"/></link> देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है.
राज्य में सड़क यातायात की ख़राब हालत के कारण स्थानीय यात्री ट्रेन से यात्रा करना पसंद करते हैं.
<link type="page"><caption> बिहार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130820_bihar_train_accident_vs.shtml" platform="highweb"/></link> के ज़्यादातर रेलवे स्टेशनों और प्लेटफॉर्मों पर बुनियादी सुरक्षा साधन भी उपलब्ध नहीं हैं.
रेलवे क्रॉसिंग पर चौकीदार का न होना, बुनियादी संचार सुविधाओं का अभाव राज्य के रेलवे स्टेशनों के लिए आम बात है.
अधिकारियों ने वादा किया है कि इस दुर्घटना के वास्तविक कारण जानने के लिए उच्च स्तरीय जाँच कराएँगे.
लेकिन इन ट्रेनों में सफर करने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा का सवाल अभी भी बना ही हुआ है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












