इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद पाकिस्तान के हालात क्या और ख़राब होंगे?

- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) ने मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के पास गिरफ़्तार कर लिया.
नैब का काम भ्रष्टाचार पर क़ाबू करना है. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जनरल परवेज़ मुशरर्फ़ ने अपने कार्यकाल के दौरान नैब का गठन किया था.
पाकिस्तान के केंद्रीय गृहमंत्री राना सनाउल्लाह ख़ान ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तार की पुष्टि करते हुए कहा कि कई नोटिस दिए जाने के बावजूद इमरान ख़ान पेश नहीं हुए.
उनके अनुसार, राष्ट्रीय ख़ज़ाने को नुक़सान पहुंचाने पर नैब ने उन्हें गिरफ़्तार किया है और उनके साथ किसी तरह की कोई हिंसा नहीं की गई है.
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नैब के चेयरमैन लेफ़्टिनेंट जनरल नज़ीर अहमद ने उनकी गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी किया था. हालांकि इस वॉरंट पर एक मई को हस्ताक्षर किए गए थे.
वॉरंट में कहा गया था कि नैब ऑर्डिनेंस-1999 के सेक्शन 9 के तहत उन पर भ्रष्टाचार का आरोप है.
इमरान ख़ान को अल-क़ादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े एक मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) ने उनकी गिरफ़्तारी को चुनौती दी है. इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन उसने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.

इमरान समर्थकों का क्या कहना है
इमरान ख़ान की पार्टी ने उनकी गिरफ़्तारी को 'अग़वा' करना कऱार दिया है.
पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि इमरान ख़ान को अदालत परिसर से अग़वा किया गया.
फ़व्वाद चौधरी के अनुसार, नामालूम अफ़राद इमरान ख़ान को नामालूम मक़ाम पर ले गए थे.
एक और वरिष्ठ नेता शीरीन मज़ारी ने कहा, 'इस्लामाबाद हाईकोर्ट में घुस कर इमरान ख़ान को अग़वा करना राज्य प्रायोजित दहशतगर्दी है.'
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शीरीन मज़ारी ने ट्वीट किया, "इस देश में जंगल का क़ानून लागू है. रेंजर्स ने वकीलों को मारा-पीटा, इमरान ख़ान पर हमला किया और उन्हें अग़वा कर लिया."
भारत में जो काम सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) करती है, लगभग वही ज़िम्मेदारी पाकिस्तान में रेंजर्स निभाते हैं.
लेकिन सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम लीग (नून) ने कहा कि इमरान ख़ान आख़िरकार वहीं पहुंच गए जहां उनकी जगह बनती है.

गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ हिंसक विरोध प्रदर्शन
इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद उनके हज़ारों समर्थक पाकिस्तान के कई शहरों में सड़कों पर उतर आए हैं.
कई जगह से हिंसा की ख़बरें आ रही हैं. इस्लामाबाद पुलिस ने कहा है कि उसने 43 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया है, लेकिन इस दौरान उसके पांच जवान ज़ख़्मी हुए हैं.
पीटीआई कार्यकर्ता रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय के गेट नंबर एक पर पहुंच गए और उसे तोड़ कर अंदर घुस गए.
लाहौर में इमरान ख़ान के समर्थक कैंट में कोर कमांडर के घर के पास पहुंच गए और वहां खड़ी कई गाड़ियों को आग लगा दी.
पाकिस्तान में इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी ऐसे समय में हुई है जब उसके हालात शायद इससे पहले कभी भी इतने ख़राब नहीं रहे होंगे.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर है और समाज राजनीतिक रूप से इस तरह बंट गया है जितना पहले कभी नहीं था.
पाकिस्तान में पिछले साल भीषण बाढ़ आई थी जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए थे. ऐसे लाखों लोग अभी भी उस चोट से उबरने की कोशिश कर रहे हैं.

आर्थिक बदहाली का शिकार पाकिस्तान
मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पिछले साल 10 अप्रैल को पीडीएम (पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट) की गठबंधन सरकार के मुखिया के तौर पर शपथ ली थी.
पीडीएम सरकार का सबसे बड़ा वादा था कि वो पाकिस्तान को मौजूदा आर्थिक स्थिति से बाहर निकालेंगे.
लेकिन एक साल के बाद हालात बेहतर होने के बजाए और ज़्यादा ख़राब हो गए हैं.

- डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपए के मूल्य में पिछले एक साल में सौ रुपए से अधिक की गिरावट आई है. फ़िलहाल एक डॉलर की क़ीमत 285 रुपए है.
- ब्याज की दर में 9.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है.
- पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत में लगभग 150 रुपए की बढ़ोतरी हुई है.
- देश का मुद्रा भंडार 10.5 अरब डॉलर से घटकर क़रीब 4.2 अरब डॉलर हो गया है.
- महंगाई की दर बढ़कर क़रीब 35 फ़ीसद हो गई है.

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गहराता सियासी संकट
एक तरफ़ पाकिस्तान आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ़ राजनीतिक संकट और गहराता जा रहा है.
इमरान ख़ान को सत्ता से बेदख़ल करने के एक साल बाद भी राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है.
इमरान ख़ान ने अपनी सरकार को गिराए जाने को हमेशा से एक साज़िश क़रार दिया है और कभी भी इस फ़ैसले को नहीं स्वीकार किया था.
इमरान ख़ान जल्दी चुनाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन सत्ताधारी गठबंधन जल्द चुनाव के लिए किसी हालत में तैयार नहीं है.
ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है कि सरकार ने इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने का फ़ैसला क्यों किया और इसके बाद पाकिस्तान के हालात बेहतर होंगे या और बदतर हो जाएंगे?
वरिष्ठ पत्रकार अतहर काज़िमी कहते हैं कि नैब के अनुसार, गिरफ़्तारी का वॉरंट एक मई को जारी किया गया था तो फिर सवाल उठता है कि नैब ने उन्हें आज क्यों गिरफ़्तार किया?

अतहर काज़िमी के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी पार्टी मुस्लिम लीग (नून) बार-बार कह रही थी कि इमरान ख़ान को गिरफ़्तार किया जाए और फ़िलहाल चुनाव नहीं करवाया जाए.
अतहर काज़िमी का दावा है कि इमरान ख़ान इस समय अपनी लोकप्रियता के शिखर पर हैं और सरकार को लगता है कि इमरान ख़ान अगर कुछ दिनों तक जेल में रहेंगे तो उनकी लोकप्रियता में कमी आएगी.
अतहर काज़िमी कहते हैं कि इस तरह की स्थिति में आमतौर पर विपक्षी पार्टी को फ़ायदा होता है, लेकिन अगर बड़े पैमाने पर हिंसा होती है तो सबसे ज़्यादा नुक़सान इमरान ख़ान को होगा.
उनके अनुसार, यही वजह है कि इमरान ख़ान ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण विरोध करने की अपील की है.

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आम चुनाव सबसे बड़ी चुनौती
बीबीसी उर्दू के संपादक आसिफ़ फ़ारूक़ी कहते हैं कि शरीफ़ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि आम चुनाव कैसे करवाया जाए.
उनके अनुसार, इस समय इमरान ख़ान की जितनी लोकप्रियता है, उसको देखते हुए इमरान ख़ान का रास्ता रोकना सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा.
सेना से भी इमरान ख़ान के रिश्ते दिन-ब-दिन ख़राब होते जा रहे हैं. ऐसे में इमरान ख़ान चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो सेना के लिए बहुत मसला हो जाएगा.
इसलिए सरकार और सेना की कोशिश है कि इमरान ख़ान को जेल में बंद करके चुनाव करवाएं जाएं.
2018 में नवाज़ शरीफ़ को जेल में बंद करके चुनाव करवाया गया था.
उस समय मुस्लिम लीग (नून) पाकिस्तान की सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन नवाज़ शरीफ़ के मैदान में नहीं रहने की वजह से लोगों ने उन्हें उस तरह से वोट नहीं दिया.
इमरान ख़ान के साथ भी ऐसा हो सकता है.

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संकट और गहरा होगा
अतहर काज़िमी कहते हैं कि इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद जिस तरह के हालात बन रहे हैं उससे लगता है कि राजनीतिक और आर्थिक संकट में और बढ़ोतरी होगी.
अतहर काज़िमी का मानना है कि न्यायपालिका से भी इमरान ख़ान को कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.
अतहर काज़िमी कहते हैं, "शहबाज़ शरीफ़ की सरकार न्यायपालिका पर हमले कर रही है, हालांकि न्यायपालिका ने मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ कोई बड़ा फ़ैसला नहीं दिया है."
वो कहते हैं, "आने वाले दिनों में पाकिस्तान का संवैधानिक संकट और गहरा होगा. समाज में ध्रुवीकरण और बढ़ेगा."
आसिफ़ फ़ारूक़ी के अनुसार पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता ही पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की सबसे बड़ी वजह है.
उनके अनुसार राजनीतिक अस्थिरता के कारण ही सरकार आईएमएफ़ के साथ समझौता करने में नाकाम रही है.
वो कहते हैं, "इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद सरकार का सारा ध्यान राजनीति पर रहेगा और अर्थव्यवस्था पर उसका ध्यान नहीं होगा. ऐसे में ज़ाहिर है कि आने वाले दिनों में आर्थिक हालात और ख़राब होंगे."

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अस्थिर पाकिस्तान भारत के लिए कितनी बड़ी चिंता
भारत के पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत कहते हैं कि इमरान ख़ान ने अगर भ्रष्टाचार किया है तो उन्हें उसकी सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन जिस तरह से उन्हें गिरफ़्तार किया गया है उससे राजनीतिक संकट और गहराएगा.
उनके अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ख़राब है, राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है, ऐसे में समझ से परे है कि सरकार ने इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने का फ़ैसला क्यों किया?
अनिल त्रिगुणायत कहते हैं कि भारत हमेशा से यही चाहता रहा है कि उसके पड़ोसी देश आर्थिक रूप से मज़बूत और राजनीतिक तौर पर स्थिर रहें, लेकिन पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी देश है जिसने भारत का भला कभी नहीं चाहा.
वो कहते हैं, "अगर पाकिस्तान में हालात ज़्यादा ख़राब होते हैं तो सेना हस्तक्षेप कर सकती है. उस समय राजनीतिक हालात बिलकुल बदल जाएंगे और वो भारत के लिए एक चिंता की बात ज़रूर होगी."
राजनयिक अनिल त्रिगुणायत कहते हैं कि आर्थिक रूप से कमज़ोर और राजनीतिक रूप से अस्थिर पाकिस्तान किसी के हक़ में नहीं है.
हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि यह पूरी तरह से पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और भारत से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आएगी.
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