अमेरिकी एजेंसी का दावा: देश की सुरक्षा और प्रभुत्व को सबसे बड़ा ख़तरा चीन से

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अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी की एक सीनियर इंटेलिजेंस अधिकारी ने दावा किया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर उसके नेतृत्व के लिए "अहम ख़तरा" पेश कर रही है.
उन्होंने आगाह किया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगुवाई में चीन ऐसे कदम उठाने की कोशिश कर सकता है, जिससे अमेरिकी उद्देश्य और हित प्रभावित हो सकते हैं.
उधर व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि चीन को लेकर अमेरिका के रुख में 'कोई बदलाव नहीं' आया है.
उनकी ये प्रतिक्रिया चीनी विदेश मंत्री के उस दावे के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि अमेरिका की नीतियों की वजह से संघर्ष का ख़तरा पैदा हो रहा है.
दूसरी तरफ, बीते सोमवार को अमेरिका पर चीन को 'दबाने' का इल्ज़ाम लगाने वाले चीनी राष्ट्रपति शी जिनिपंग ने सेना को उन्नत बनाने पर ज़ोर दिया है. शी जिनपिंग ने कहा कि चीनी सेना को जंग जीतने की रणनीतिक क्षमता बेहततर करते हुए 'वर्ल्ड क्लास' स्तर हासिल करने पर ध्यान लगाना चाहिए.
शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के अगुवा होने के साथ सेना के प्रमुख हैं.

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अमेरिका और चीन में मतभेद की वजह
चीन और अमेरिका की गिनती दुनिया की दो प्रमुख महाशक्तियों के रूप में होती है. दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं.
इनमें ताइवान, कारोबार और यूक्रेन युद्ध अहम हैं. हाल में दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी उस वक़्त बढ़ गई जब अमेरिका ने चीन के एक मानवरहित गुब्बारे को गिरा दिया.
अमेरिका ने इसे 'जासूसी उपकरण' बताया जबकि चीन का कहना था कि गुब्बारे का अमेरिकी आसमान में पहुंचना एक 'हादसा' था जिस पर अमेरिका ने ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दी.

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सीनेट की समिति को क्या दी गई जानकारी
एवरल हैंज़ अमेरिका के 'ऑफ़िस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस' की डायरेक्टर हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने अमेरिकी सीनेट की 'सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस' के सामने अमेरिका के आगे दुनिया भर में मौजूद ख़तरों से जुड़े आकलन को पेश किया.
उन्होंने सबसे ज़्यादा चर्चा चीन की सत्ताधारी पार्टी को लेकर की. इसके बाद अमेरिकी सांसंदों ने 'चीन की बढ़ती चुनौती' से मुक़ाबले के लिए कदम उठाने और अहम क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर ज़ोर दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीनेट की कमेटी को एवरल हैंज़ ने बताया, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के सामने ख़तरा पेश कर रही है. इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उनकी महत्वाकांक्षा और क्षमताएं उन्हें हमारा सबसे गंभीर प्रतिस्पर्धी बनाती हैं."

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चीन और रूस की 'दोस्ती' को लेकर चिंता
दुनिया भर से ख़तरे के आकलन की सुनवाई के दौरान उन्होंने चीन और रूस के बीच 'गहरी होती दोस्ती' का भी ज़िक्र किया.
हैंज़ ने कहा, "बीते साल के दौरान ये ख़तरा और गहरा हो गया है. इसकी वजह चीन और रूस के बीच मजबूत होती साझेदारी है. इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों के लिए ये भी ऐसा क्षेत्र है, जहां गंभीरता से ध्यान लगाने की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा कि चीन की ओर से पूरी दुनिया में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी, कूटनीति और सेना के लिए चुनौती बढ़ रही है और ऐसे में ये कहने की ज़रूरत नहीं है कि चीन 'हमारी प्राथमिकता' है.
अपने आकलन के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि चीन में सारी ताक़त राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में हैं और आने वाले दिनों में वो ऐसे कदम उठा सकते हैं जिनसे अमेरिकी उद्देश्यों और हितों को नुक़सान हो सकता है.
'कम्युनिस्ट पार्टी की आला समिति में जिनपिंग के वफ़ादार'
एवरल हैंज़ ने कहा, " कम्युनिस्ट पार्टी मानती है कि शी जिनपिंग के विजन को पूरा करने का रास्ता सिर्फ़ अमेरिकी ताक़त और प्रभुत्व की कीमत पर ही हासिल किया जा सकता है."
उन्होंने दावा किया, "ताक़त दिखाने के लिए वो (सीसीपी) सरकार के सभी संसाधनों को इस्तेमाल करते हैं. वो पड़ोसियों को अपनी प्राथमिकताओं के साथ सहमति जताने के लिए मजबूर करते हैं. इसमें उनके इलाक़े में ज़मीन, समुद्र और हवाई सीमाओं और ताइवान की संप्रभुता पर उनका दावा शामिल है. "
उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग एक दशक से ज़्यादा वक़्त से चीन के आला नेता हैं. इसकी वजह से सत्ता के प्रमुख पायदानों पर उनकी पकड़ मजबूत है और ज़्यादातर मुद्दों पर वो प्रभाव डालने की स्थिति में हैं.
एवरल हैंज़ ने कहा, "कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वोच्च समिति शी जिनपिंग के वफादारों से भरी है. उनकी सोच जिनपिंग जैसी ही है. हमारा आकलन है कि शी जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी की फैसला लेने वाली सर्वोच्च समिति ताइवान को अपने साथ मिलाने की एकजुट कोशिश करेगी."
उन्होंने दावा किया, " वो (चीन) अमेरिकी प्रभाव को एक ख़तरे के तौर पर देखते हैं और उसे कम करने की कोशिश करेंगे. वो अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच भी कांटा डालने का प्रयास करते हैं और ऐसे नियमों को आगे बढ़ाते हैं जो चीन की अधिनायकवादी शासन प्रणाली को रास आता है."
एवरल हैंज़ ने शी जिनपिंग के सोमवार के भाषण का भी जिक्र किया.
शी जिनपिंग ने इस भाषण के दौरान दावा किया था कि 'अमेरिका चीन को दबाने की कोशिश' कर रहा है.
एवरल हैंज़ ने कहा, "जिनपिंग के रूख से जाहिर है कि वो अमेरिकी उद्देश्यों में भरोसा नहीं रखते हैं और मानते हैं कि अमेरिका चीन को दबाने की कोशिश कर रहा है."

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'आलोचना करते हैं लेकिन नहीं तोड़ेंगे रिश्ते'
हैंज़ ने कहा कि उन्होंने अब तक शी जिनपिंग के जितने भी भाषण सुने हैं, उनमें से इसमें उन्होंने अमेरिका की सबसे तीखी आलोचना की.
उन्होंने कहा, "ये अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर चीन की बढ़ती निराशा को दिखाता है. इसे शी जिनपिंग की चीन के घरेलू आर्थिक विकास और देसी तकनीक इनोवेशन को लेकर चिंता भी जाहिर होती है. इसके लिए वो अब अमेरिका पर दोष मढ़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "वो अपने लोगों और क्षेत्रीय देशों को ये संदेश भी देना चाहते हैं कि तनाव बढ़ने की ज़िम्मेदारी अमेरिका की है."
एवरल हैंज़ ने ये दावा भी किया कि बढ़ते तनाव और दूरियों के बाद भी चीन अमेरिका के साथ 'अच्छी साझेदारी' रखना चाहता है क्योंकि वो मानता है कि ये उसके हित में है.
एवरल हैंज़ ने कहा, "हमारा आकलन है कि शी जिनपिंग ने जो आलोचना की, उसके बाद भी चीन मानता है कि तनाव बढ़ने से रोककर और अमेरिका के साथ स्थिर रिश्तों से सबसे ज़्यादा फ़ायदा उसे ही है."
हैंज़ ने कहा कि चीन चाहता है कि पूर्वी एशिया में स्थिरता बनी रहे. वो ये नहीं चाहता कि अमेरिका और उसके सहयोगी चीन पर और पाबंदियां लगाएं. वो अमेरिका के साथ रिश्तों में स्थिरता दिखाना चाहता है जिससे दुनिया भर में उसकी अन्य साझेदारियों को झटका न लगे.
कैसे हो चीन का मुक़ाबला?
इंटेलिजेंस को लेकर सीनेट कमेटी के चेयरमैन सीनेटर मार्क वार्नर ने कहा कि चीन अमेरिका के मुक़ाबले खड़ा हो रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक वार्नर ने कहा, "दुर्भाग्य से, शी जिनपिंग की अगुवाई में चीन आर्थिक, तकनीकी और सैन्य क्षमताओं के लिहाज से हमारे देश का करीबी मुक़ाबलेबाज़ है."
उन्होंने ने कहा, "दो दशक तक अमेरिका का ध्यान आतंक के सफाए पर था, उस वक़्त चीन नई तकनीक मसलन एडवांस वायरलैस कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर, क्वांटम सिंथेटिक बायलोजी और नेक्सट जेनरेशन एनर्जी के मामले में अमेरिका से आगे निकलने की कोशिश में जुटा था. इसके साथ चीन खनिजों को निकालने और उनकी प्रोसेसिंग में भी जुटा था, जो इनमें से कई तकनीक के लिए बेहद अहम हैं."
उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीक के मानक तय करने वाली संस्थाओं में भी चीन अहम बन गया है. वो वैश्विक सप्लाई चेन में भी शामिल है."
उन्होंने कहा, "इन तमाम कारणों से अमेरिका को प्रतिभा, औज़ार और शोध में बड़े पैंमाने पर निवेश करना चाहिए तभी हम आने वाले दौर की तकनीक के क्षेत्र में अगुवाई कर सकते हैं."
सीनेटर मार्को रूबियो ने कहा कि ये साफ है कि वैश्वीकरण से चीन को अपने उभार में मदद मिली. साथ ही उसे अमेरिका से उद्योग हटाए जाने का भी फ़ायदा हुआ.
उन्होंने कहा, "इसने हमारे मिडिल क्लास लोगों का नुक़सान किया और हमारे समाज के बीच सामाजिक आर्थिक स्तर पर गहरी खाई बना दी."

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जॉन किर्बी ने क्या कहा?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री चिन गैंग ने इस हफ़्ते अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए उसे आगाह किया. इस पर व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी प्रवक्ता जॉन किर्बी की प्रतिक्रिया सामने आई है.
जॉन किर्बी ने कहा कि अमेरिका चीन के साथ 'प्रतिस्पर्धी' रिश्ते चाहता है. उन्होंने कहा कि ताइवान समेत तमाम मुद्दों पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
चीन के नए विदेश मंत्री चिन गैंग ने अमेरिका को ताइवान मुद्दे में दखल देने को लेकर आगाह किया था. चीन कहता रहा है कि ताइवान को मिलाने के लिए ताक़त का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
इस बीच, ताइवान की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति साई इंग वेन अगले महीने अमेरिका का दौरा कर सकती हैं. वो अमेरिकी स्पीकर केविन मैकार्थी से मुलाकात करेंगी.
मैकार्थी कह चुके हैं कि वो इस साल साई इंग वेन से मिलेंगे. ताइवान और अमेरिकी अधिकारी इस मुलाक़ात को लेकर उत्साहित हैं. इससे चीन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है.
बीते साल अगस्त में अमेरिका की तत्कालीन स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था. इसके बाद चीन ने ताइवान के इर्द गिर्द कई दिन तक सैन्य अभ्यास किया था.

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क्या है शी जिनपिंग का इरादा
दूसरी तरफ़ चीन के राष्ट्पति शी जिनिपंग ने बुधवार को सैन्य प्रतिनिधियों के साथ हुई मुलाक़ात में सेना को उन्नत बनाने पर ज़ोर दिया है.
चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा, "आधुनिक सोशलिस्ट देश के लिए सामरिक क्षमताओं को बढ़ाना बहुत ज़रूरी है. ये पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के 2027 में मनाए जाने वाले शताब्दी वर्ष के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भी ज़रूरी है. सेना के स्तर को तेज़ी के साथ वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए भी ये अहम है."
शी जिनपिंग ने कहा, " डिफेंस साइंस, तकनीक और उदयोग नीति को मजबूत करना ज़रूरी है ताकि सेना को मदद मिले और जंग जीती जा सके."
उन्होंने चीन की राष्ट्रीय सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लक्ष्यों पर भी बात की.
शी जिनपिंग ने सेना के प्रतिनिधियों से कहा, "सामरिक खाके, संसाधनों और सभी क्षेत्रों की मजबूती को एकसाथ लाने की कोशिश होनी चाहिए. इसके जरिए देश की कुल ताक़त को क्रमिक तौर पर बेहतर बनाने की कोशिश होनी चाहिए ताकि सामरिक जोखिम से मुक़ाबला और हितों की रक्षा की जा सके. इसके जरिए सामरिक उद्देश्यों की भी जानकारी की जानी चाहिए."
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विज्ञान और तक़नीक के क्षेत्र में नई पहल किए जाने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि फोकस स्वतंत्र और मौलिक इनोवेशन पर होना चाहिए. इससे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेज़ी के साथ आत्मनिर्भरता और मजबूती हासिल होगी.
नया मंत्रालय
इस बीच, चीन की सरकार ने विज्ञान और तकनीक मंत्रालय में आमूलचूल बदलाव की योजना का खाका पेश किया है. इसका मक़सद अमेरिका की ओर से बढ़ते प्रतिबंधों के बीच आत्मनिर्भरता बढ़ाना है.
नए मंत्रालय का फोकस चीनी इनोवेशन को बढ़ावा देने पर होगा. इसके पहले जो मंत्रालय था, उसका काम ग्रामीण इलाकों में तकनीकी विकास को बढ़ावा देना था. अब ये काम सरकार के दूसरे हिस्से देखेंगे.
अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने चीन की टेक कंपनियों पर पाबंदियां बढ़ाई हैं. प्रतिबंधों की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान हुई थी. चीन ने इसे लेकर ही 'राष्ट्रीय रणनीति' का एलान किया है.
इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र तक घरेलू तकनीक विकसित करने का इरादा है.
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