दक्षिण चीन सागर और यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले क्वाड के सदस्य देश

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भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने क्वाड के तहत हुई बैठक में यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान को लेकर अपना समर्थन जताया है.
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया है.
इस बयान में यूक्रेन और म्यांमार में जारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के पुरजोर समर्थन से लेकर उत्तर कोरिया की ओर से दागी जाने वाली मिसाइलों की निंदा शामिल है.
ये मीटिंग एक ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिमी देशों और चीन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.
अमेरिका और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर से लेकर कथित 'चीनी स्पाई बैलून' को लेकर हालिया दिनों में तीखी बयान बाजी हुई है.
क्वाड बैठक में यूक्रेन पर क्या बात हुई?
यूक्रेन में जारी युद्ध को अब एक साल से ज़्यादा का वक़्त हो गया है. लेकिन अभी भी इस युद्ध के ख़त्म होने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का पश्चिमी देशों से हथियार मांगना जारी है. अमेरिका, जर्मनी और यूके समेत कई पश्चिम देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन को हथियारों समेत दूसरे तरह की मदद पहुंचाई है.
अमेरिका, जर्मनी और यूके ने हाल ही में यूक्रेन को आधुनिक टैंक देने का फ़ैसला किया है. और अब बात लड़ाकू विमानों पर चल रही है.
इसी बीच रूस और उसके सहयोगियों की चीन के साथ क़रीबी बढ़ती देखी जा रही है. अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह रूस को गोला-बारूद और हथियार देने पर विचार कर रहा है.
चीन ने इन आरोपों का पुरजोर अंदाज़ में खंडन किया है. लेकिन इस सबके बीच ही बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको चीनी राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं.
और उससे पहले चीन के शीर्ष राजनयिक मॉस्को पहुंचे थे. रूस ने लुकाशेंको के साथ मुलाक़ात के बाद जारी साझा बयान में चीन-बेलारूस के संबंधों को नया महत्व दिया है.
अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नज़र रखने वालों के बीच इस बयान को चीन की ओर से रूस और उसके सहयोगियों के साथ क़रीबी बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है.
इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात में यूक्रेन और चीन को लेकर भी बात हुई.
इस मामले में जारी साझा बयान में कहा गया है, "हम लगातार यूक्रेन में जारी संघर्ष की वजह से हो रही मानवीय त्रासदी पर अपनी प्रतिक्रियाओं को लेकर चर्चा कर रहे हैं. हम इस बात पर सहमत हैं कि परमाणु हथियारों का प्रयोग या उनकी धमकी दिया जाना अस्वीकार्य है. हमने यूएन चार्टर समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक़, यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थाई शांति स्थापित होने की आवश्यकता को रेखांकित किया है."
इन चारों देशों के विदेशमंत्रियों ने साझा बयान में जोर दिया है कि 'नियमानुसार चलने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता और विवादों के शांतिपूर्ण ढंग से समाधान निकाले जाने का सम्मान करना चाहिए.'

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पुतिन ने दी थी 'धमकी'
पिछले एक साल से रूस और यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच एक ऐसा मौका भी आया है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियारों का ज़िक्र किया.
पश्चिमी दुनिया में इसे रूस की ओर से इस युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी के रूप में देखा गया. हालांकि, रूस ने कहा था कि उसकी ओर से ऐसी कोई धमकी नहीं दी गयी है.
हाल ही में रूस ने अमेरिका के साथ अपनी न्यू स्ट्रेटजिक आर्म रिडक्शन ट्रीटी से बाहर निकल रहा है. इसे न्यू स्टार्ट परमाणु संधि के नाम से भी जाना जाता है.
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये कदम उठाने की वजह रूसी न्यूक्लियर साइट्स से जुड़ी जानकारियों को गोपनीयता बढ़ाने से जुड़ी है.
अमेरिका और रूस के बीच साल 2010 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. इसके तहत अमेरिका और रूस में इस्तेमाल के लिए तैयार मिसाइलों की संख्या तय की गयी थी.
बता दें कि इस ट्रीटी के तहत रूस और अमेरिका अधिकतम 1550 परमाणु मिसाइलें, 700 लंबी रेंज की मिसाइलें और बमर्स इस्तेमाल के लिए तैयार स्थिति में रख सकते हैं.

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दक्षिण चीन सागर पर भी हुई बात
इस बैठक में दक्षिण चीन सागर पर चीनी दावों को लेकर भी बात हुई जो कि पश्चिमी देशों और चीन के बीच विवाद की एक पुरानी वजह है.
हाल ही में दक्षिणी चीन सागर में 21000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए अमेरिकी नौसेना के विमान का सामना चीनी जेट से हुआ था.
अमेरिका के प्रतिष्ठित टीवी चैनल सीएनएन में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, चीनी जेट विमान की ओर से कहा गया था कि 'अमेरिकी विमान, चीनी हवाई क्षेत्र सिर्फ 12 नौटिकल मील दूर है. आगे न बढ़ें अन्यथा (कुछ भी होने की) ज़िम्मेदारी आपकी होगी.'
क्वाड देशों की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि - 'हम मानते हैं कि समुद्री क्षेत्र में शांति और सुरक्षा हिंद-प्रशांत के विकास और समृद्धि को रेखांकित करती है, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप संप्रभुता के लिए सम्मान के महत्व को दोहराती है.'
ये भी कहा गया है कि - 'हम यथास्थिति को बदलने या क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली किसी भी एकतरफ़ा कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हैं.'
इसके साथ ही विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण और तट रक्षक जहाजों एवं समुद्री चरमपंथियों के ख़तरनाक इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया गया है.
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