चीन और बेलारूस क़रीब आ रहे, क्या रूस के हितों का ध्यान रख रहे दोनों देश

लूकाशेंको और शी जिनपिंग ने बुधवार को बीजिंग में मुलाक़ात की

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    • Author, टेसा वॉन्ग और जॉर्ज राइट
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

चीन और बेलारूस के नेताओं ने यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान में 'गहरी दिलचस्पी' दिखाई है और इस युद्ध के जल्द ख़त्म किए जाने का समर्थन किया है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बेलारूस के नेता एलेक्सेंडर लूकाशेंको ने बीजिंग में हुई एक वार्ता के बाद बयान जारी कर ये बात कही है.

लूकाशेंको रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के क़रीबी मित्र माने जाते हैं.

लूकाशेंको ने चीन की योजना की तारीफ की और कहा कि उनका देश युद्ध समाप्त करने का पूरा समर्थन करता है.

चीन ने पिछले सप्ताह यूक्रेन को लेकर एक पीस प्लान पेश किया था जिसमें उसने सभी मुल्कों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने की बात की थी.

लूकाशेंको की ये यात्रा चीन के राजनयिक वांग यी की मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात के कुछ ही दिन बाद हुई है.

लूकाशेंको और शी जिनपिंग की ये मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करने के लिए मध्य-एशियाई देशों का दौरा कर रहे हैं.

बुधवार को चीन और बेलारूस ने इस युद्ध को लेकर गहरी चिंता ज़ाहिर की और यूक्रेन में जल्द से जल्द शांति स्थापित करने को लेकर गहरी दिलचस्पी जताई. बेलारूस की सरकारी समाचार एजेंसी बेल्टा ने ये जानकारी दी है.

लूकाशेंको ने अभी तक यूक्रेन युद्ध में रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मदद की है. विश्लेषक लूकाशेंकों की चीन यात्रा को चीन के रूस और उसके मित्र देशों के क़रीब आने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं.

लूकाशेंको पुतिन के सबसे क़रीबी सहयोगी हैं

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12 बिंदुओं पर आधारित चीन के इस दस्तावेज़ में 'सभी देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने का आह्वान किया गया है.'

इस शांति योजना में विशेष रूप से ये नहीं कहा गया है कि रूस यूक्रेन से अपने सैनिकों को वापस बुलाए. हालांकि इसमें रूस पर लगाए गए 'एकतरफ़ा प्रतबिंधों' की आलोचना की गई है. जानकार कहते हैं कि ये यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगी देशों की खुली आलोचना है.

लूकाशेंको के सहयोगियों ने जो बयान जारी किए हैं उनके मुताबिक लूकाशेंको ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा है कि "आपने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जो शुरूआत की है उसका हम पूरी तरह समर्थन करते हैं."

लूकाशेंको ने शी जिनपिंग से कहा, "राजनीतिक निर्णयों का मक़सद अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को रोकना होना चाहिए, इन संघर्षों में आख़िर में कोई विजेता नहीं होगा."

चीन की शांति योजना पर पश्चिमी देशों ने कोई ख़ास भरोसा ज़ाहिर नहीं किया है.

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वो इस योजना के कुछ हिस्सों से सहमत हैं. उन्होंने कहा कि ये इस बात का संकेत है कि चीन इस युद्ध को समाप्त कराने में सकारात्मक भूमिका निभाना चाहता है.

युद्ध ख़त्म करने के लिए ज़ेलेंस्की ने बैठक कराने की पेशकश की है, चीन ने अभी तक इस पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.

लूकाशेंको के साथ बैठक के बाद चीनी भाषा में जारी किए गए एक बयान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि शीत युद्ध की पश्चिमी मानसिकता से अब छुटकारा पाया जाना चाहिए.

शी जिनपिंग ने कहा कि देशों के वैश्विक अर्थव्यवस्था का राजनीतिकरण बंद करना चाहिए और ऐसे क़दम उठाने चाहिए जिनसे "युद्ध रुके, संघर्ष विराम में मदद मिले और इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकले."

चीन ने पिछले साल सितंबर में बेलारूस के साथ अपने रिश्तों को और मज़बूत किया था. अब लूकाशेंको ने चीन का तीन दिवसीय दौरा किया है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने बेलारूस के साथ अपने रिश्तों को परिभाषित करते हुए कहा है "बेलारूस के साथ हमारी हर मौसम में चलने वाली विस्तृत रणनीतिक भागीदारी है." चीन ने इससे पहले इस तरह की भाषा सिर्फ़ पाकिस्तान के लिए इस्तेमाल की है.

इसका मतलब ये है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मामले में चीन बेलारूस को बहुत महत्व दे रहा है. बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक़ एक विश्लेषक ने कहा कि रिश्तों में मज़बूती के मामले में चीन के लिए बेलारूस सिर्फ़ रूस के बाद आता है.

चीन ने बेलारूस के साथ अपने रिश्तों का स्तर बढ़ाया है
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रूस-यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ बना हुआ है चीन

रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से ही बेलारूस रूस का अहम सहयोगी बना हुआ है. बेलारूस ने यूक्रेन की राजधानी कीएव पर आक्रमण के लिए रूस की सेनाओं को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने दिया था. हालांकि कीएव पर हमले की ये कोशिश नाकाम रही थी.

वहीं चीन की बात करें तो यूक्रेन युद्ध को लकर अभी तक वो तटस्थ बना हुआ है. चीन राष्ट्रीय संभ्रुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार की बात करता है और यूक्रेन और रूस दोनों के लिए ही ये बेहद अहम बिंदु हैं.

लेकिन चीन ने अभी तक यूक्रेन युद्ध को लेकर खुलकर रूस की आलोचना नहीं की है और कहीं ना कहीं प्रत्यक्ष रूप से उसने रूस के युद्ध प्रयासों में उसकी मदद ही की है.

वहीं चीन के सरकारी मीडिया ने युद्ध के लेकर रूस के नज़रिए को प्राथमिकता से जगह दी है.

चीनी सरकार ने पिछले सप्ताह अमेरिका के उस दावे को खारिज किया था जिसमें कहा गया था कि चीन रूस के लिए हथियार भेजने पर विचार कर रहा है.

इन आरोपों के बारे में जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से पूछा गया तो उन्होंने कहा था, "हम रूस-चीन रिश्तों पर अमरिका के नज़रिए को स्वीकार नहीं करते हैं. दबाव या ज़बरदस्ती को स्वीकार करना तो बिलकुल अलग ही बात है."

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने शी जिनपिंग के साथ बैठक की इच्छा ज़ाहिर की है

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अमेरिका की कोशिशें

चीन की कंपनियों पर रूस को दोहरे तरीके से इस्तेमाल होने वाली तकनीक निर्यात करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. चीन पर आरोप है कि उसने रूस को ड्रोन और सेमीकंडक्टर चिपों जैसे ऐसे सामान बेचे हैं जिनका सिर्फ़ नागरिक इस्तेमाल ही नहीं बल्कि सैन्य इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

बुधवार को लूकाशेंको ने ऐसे समय में चीन की यात्रा की है जब एक तरफ भारत में जी20 देशों की अहम बैठक हो रही हैं और दूसरी तरफ़ अमेरिका ने मध्य-एशिया में अपने राजनयिक प्रयास तेज़ किए हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कज़ाख़स्तान और उज़्बेकिस्तान का दौरा किया है. उज़्बेकिस्तान में एक भाषण में ब्लिंकन ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध ने समूचे क्षेत्र में चिंताएं पैदा कर दी हैं.

ब्लिंकन ने कहा, "अंत में, अगर एक शक्तिशाली देश एक स्वतंत्र संप्रभु देश की सीमाओं को मिटाने की कोशिश करता है, तो उसे दूसरे देशों के साथ ऐसा करने से क्या रोकेगा? मध्य-एशिया के सभी देश इस बात को समझ रहे हैं."

मध्य-एशिया के सभी पांचों देश पूर्व में सोवियत संघ के सदस्य रहे हैं. इन देशों के रूस और चीन के साथ मज़बूत कारोबारी संबंध हैं. हालांकि ये देश युद्ध को लेकर अब तक तटस्थ ही बने हुए हैं. इन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों से सहमति दिखाई है, लेकिन यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर असहजता भी ज़ाहिर की है. यूक्रेन भी सोवियत संघ का ही हिस्सा था.

चीन में लूकाशेंको का ज़बरदस्त स्वागत हुआ है

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लूकाशेंको को क्यों महत्व दे रहा है चीन?

बेलारूस की राजधानी मिंस्क में एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों का स्वागत तीन भाषाओं में किया जाता है- रूसी, अंग्रेज़ी और मंदारिन (चीनी भाषा).

क़रीब 90 लाख की आबादी वाले बेलारूस के शापिंग मॉल हों या होटल, चीन की मौजूदगी हर जगह दिखती है.

चीन और बेलारूस के बीच क़रीबी संबंध कोई नए नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में और भी मज़बूती आई है. ख़ासकर यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से.

इस सप्ताह जब बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्सेंडर लूकाशेंको बीजिंग पहुंचे तो, लूकाशेंको और जिनपिंग ने एक-दूसरे के देश की जमकर तारीफ़ की.

लूकाशेंको एक छोटे देश के बेलारूस के राष्ट्रपति हैं जो पश्चिमी दुनिया से कटा हुआ है. यहां बेहद कठोर शासन है. बावजूद इसके चीन ने उनका ज़बरदस्त स्वागत किया. विश्लेषक मानते हैं कि इसकी वजह ये है कि चीन उनके ज़रिए पुतिन को समझना चाहता है.

दन में मौजूद थिंकटैंक चैटम हाउस में रूस और यूरेशिया कार्यक्रम की शोधकर्ता समांथा डे बेंडर्म कहती हैं, "चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ये समझने की कोशिशें भी कर रहे हैं कि पुतिन यूक्रेन युद्ध में किस हद तक जाएंगे. ये समझने के लिए लूकाशेंको एक अच्छे वार्ताकार हो सकते हैं."

वो कहती हैं, "शी जिनपिंग को लूकाशेंको से बात करना पसंद है क्योंकि पुतिन को उनसे बेहतर और कोई नहीं जानता है. ऐसे में लूकाशेंको पुतिन के दिमाग़ में क्या चल रहा है ये समझाने के लिए एक गाइड के तौर पर काम कर सकते हैं."

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चीन और बेलारूस के बीच बेहद मज़बूत कारोबारी संबंध भी हैं. यूरोप में चीन का सबसे बड़ा निवेश बेलारूस में ही है. चीन ने बेलारूस में एक इंडस्ट्रियल पार्क में भी निवेश किया है जहां मुक्त व्यापार ज़ोन भी है.

बेलारूस के सोवियत संघ से अलग होने के बाद से इस देश की सत्ता लूकाशेंको के हाथ में ही है. पश्चिमी देश लूकाशेंको को यूरोप का 'अंतिम तानाशाह' कहते रहे हैं.

दूसरी तरफ़ चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी 1949 के बाद से बिना चुनाव कराए हुए सत्ता में है. ऐसे में दोनों देशों की सत्ता व्यवस्था भी लगभग एक जैसी ही है.

कहा जाता है कि जिस कठोरता के साथ शी जिनपिंग चीन में शासन कर रहे हैं, बेलारूस में लूकाशेंको का शासन भी ठीक वैसा ही है.

हालांकि पश्चिमी विश्लेषक ये भी मानते हैं कि बेलारूस या चीन की यूक्रेन के युद्ध में सीधे शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है.

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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफ़ेसर रासमुस निलसन कहते हैं, "चीन को चिंता है कि अगर यूक्रेन का युद्ध और भीषण हुआ तो यूरेशिया में सुरक्षा हालात नियंत्रण के बाहर हो सकते हैं."

वहीं दूसरी तरफ़ विश्लेषक ये भी मानते हैं कि लूकाशेंको पर यूक्रेन युद्ध में सीधे शामिल होने का पुतिन की तरफ़ से ज़बरदस्त दबाव है.

समांथा डे बेंडर्म कहती हैं, "चीन और बेलारूस दोनों ही देशों के नेता चाहते हैं कि इस युद्ध के ज़रिए दुनिया में अमेरिका का प्रभाव कम हो लेकिन ठीक उसी समय वो युद्ध के आगे बढ़ने और इस बीच हो रही व्यापक हिंसा को लेकर बेहद असहज भी हैं."

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