रूस-यूक्रेन युद्ध: दक्षिण यूक्रेन पर कब्ज़े के बाद कैसे अटके रूसी सैनिक

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- Author, अब्दुजलील अब्दुरासुलोव
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
रूस की सेना ने करीब एक साल पहले यूक्रेन पर हमला किया था. रूसी सैनिकों को इस युद्ध में सबसे बड़ी कामयाबी दक्षिणी यूक्रेन में मिली.
कुछ ही दिनों के अंदर रूसी सैनिकों ने क्राइमिया से आगे यूक्रेन के अंदर स्विट्ज़रलैंड जितने बड़े भूभाग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था.
शुरुआती दिनों में यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से में क्या गड़बड़ी हुई थी, इसे लेकर यूक्रेन के अधिकारियों के पास आज भी कोई जवाब नहीं है.
इसका पता लगाने के लिए बीबीसी ने सैन्य अधिकारियों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की है.
22 फरवरी 2022 को शाम सवा सात बजे, यूक्रेन की रक्षा परिषद के सचिव ओलेक्सी देनिलोव को लाल फोल्डर में कुछ गोपनीय दस्तावेज़ मिले.
दस्तावेज़ों के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति की जान को गंभीर ख़तरा था.
तत्काल, देनिलोव ने सैन्य सेवाओं के प्रमुख, गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से खुद संपर्क किया.
लेकिन यूक्रेन का नेतृत्व आपातकाल जैसा मार्शल लॉ लागू करने के लिए तैयार नहीं हुआ. सैनिकों के मूवमेंट में भी बदलाव नहीं किया गया.
रूसी सेना को इतनी जल्दी सफलता कैसे मिली?
कुछ सप्ताह पहले ही यूक्रेन के अधिकारियों को पश्चिमी देशों से रूसी हमले की खुफ़िया जानकारी मिली थी लेकिन कोई हमला नहीं हुआ था, इसलिए माना गया कि ये भी दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.
यूक्रेन के नेतृत्व ने शांत रहने का फ़ैसला लिया.
देनिलोव बताते हैं, "यूक्रेन की सरकार के पास रूसी हमले की विस्तृत जानकारी थी. यहां तक कि हमले की तारीख के बारे में भी हमें पता था."
कीएव क्षेत्र के गुप्त नक्शे पर हाथ चलाते हुए उन्होंने बताया, "हमें जानकारी थी कि 22 फरवरी को हमला होगा."
वो ये भी दावा करते हैं कि रूसी कमांडर से मिली खुफ़िया जानकारी के मुताबिक रूस की योजना दो दिन पहले हमला करने की थी.
देनिलोव ने बताया, "हमारा लक्ष्य देश में किसी भी तरह की अफरातफरी को रोकना था. इसलिए इसे गुप्त रखना ज़रूरी था."
यदि यूक्रेन के अधिकारियों को मॉस्को की योजनाओं के बारे में इतना पता था तो रूसी सैनिक दक्षिण में खेरसोन क्षेत्र को इतनी जल्दी कैसे पार कर गए?
दरअसल यूक्रेन की मुख्य भूमि से एक संकरी पट्टी क्राइमिया प्रायद्वीप को अलग जोड़ती है. ये एक तरह से रूसी सैनिकों के लिए प्राकृतिक अवरोध थीं. इसके अलावा खेरसोन क्षेत्र में सिंचाई वाली नहरें भी बड़ी संख्या में मौजूद थीं.
रूसी सेना को रोकने के लिए ज़रूरी था कि यूक्रेन की सेना उस इलाके के सभी पुलों को ध्वस्त कर देतीं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
देनिलोव कहते हैं कि अधिकारी फ़िलहाल इसकी जांच कर रहे हैं और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे कोई जवाब नहीं दे सकते.
वो कहते हैं, "लेकिन हम इस तथ्य को छिपा नहीं रहे हैं, हम इसे किसी दराज़ में नहीं रख रहे."

रूसी लड़ाकू विमानों की भीषण बमबारी
यूक्रेन के एक सैन्य अधिकारी ने आक्रमण के बाद पुष्टि की कि क्राइमिया और खेरसोन को जोड़ने वाले चोनहार पुल को ध्वस्त कर देना चाहिए था.
हालांकि उन्होंने उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि यूक्रेन की तुलना में 15 गुना अधिक सैन्य ताक़त वाली रूसी सेना को देखते हुए विस्फोटकों को निष्क्रिय किया गया था.
वहीं, आलोचकों का कहना है कि रूसी सेना के ताक़तवर होने के चलते ही पुल को नष्ट करना चाहिए था.
यह स्पष्ट था कि यूक्रेन की सेना ऐसे परिदृश्य के लिए तैयार नहीं थी जिसमें रूसी सेना आसानी से दक्षिणी खेरसोन क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी थी.
नतीजतन, उन्हें शुरू से ही इस क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा.
निप्रो नदी पर बने पुल की रक्षा का ज़िम्मा संभाल रहे सीनियर लेफ्टिनेंट एवगेनी पाल्चेंको के अनुसार, "जैसे ही हम पीछे हटे, हमारे सैन्य वाहनों और सैनिकों को खेरसोन शहर के पास एंतोनिव्स्की पुल को पार करने में दो घंटे लगे."
इससे संकेत मिलता है कि यूक्रेन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को क्राइमिया के पास केंद्रित कर लिया था. लेकिन पुलों की मौजूदगी के चलते जल्दी ही रूसी सैनिकों की संख्या बढ़ती गई.
लेफ्टिनेंट पाल्चेंको बताते हैं, "हमारे पास लड़ाकू विमानों के हमले से कोई बचाव नहीं था. ऐसे में उनके आक्रमण को कैसे नियंत्रित कर सकते थे?"
"उनके लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और ढेर सारे बम गिरा दिए, जिससे सब कुछ तबाह हो गया. हमारे बहुत सैनिक मारे गए और उपकरण भी नष्ट हो गए."

यूक्रेनी सेना का प्लान
रूसी सैनिकों ने जिस रफ़्तार से ये सब अंजाम दिया कि उसके आगे यूक्रेन की सेना पस्त हो चुकी थी. रूसी सेना की रणनीति बड़े शहरों को घेरने, कब्ज़ा करने और आगे बढ़ने की थी.
माइकोलेएव में यूक्रेन सेना की ओर से बचाव करने के लिए भेजे गए मेजर जनरल दिमित्रि मारचेंको कहते हैं, "उन्होंने दो दिनों में माइकोलेएव और तीन दिनों में ओडेसा पर कब्जा करने की योजना बनाई थी, लेकिन रूसी योजना विफल रही."
जब जनरल मारचेंको माइकोलेएव पहुंचे, उस वक्त तक यूक्रेन की सेना के पास शहर की रक्षा करने की कोई योजना नहीं थी.
उन्होंने बताया, "जब मैंने पूछा कि डिफेंस की योजना कहां है तो मुझे बताया गया कि अभी तक नहीं बनी है."
इसके बाद मारचेंको ने रोड मैप लेकर उसे चार भागों में विभाजित किया और प्रत्येक भाग की ज़िम्मेदारी अधिकारियों को सौंप दी.
इसके बाद आम लोगों से सेना में शामिल होने की अपील की गई और हज़ारों लोगों को सेना में शामिल किया गया. इनमें सेना के साथ पहले काम कर चुके युवा भी शामिल थे.
उन्होंने रूसी टैंकों का सामना करने के लिए ग्रेनेड लॉंचर लगाए और जगह जगह पर रूसी टैंकों के आने की चेतावनी देने वाले सिग्नल पोस्ट लगाए.
एमपी रोमन कोस्टेंको के नेतृत्व में एक विशेष दस्ते का गठन किया गया जिसने नहर पर मौजूद पुलों को नष्ट किया.
यूक्रेनी सैनिकों ने एंटोनोव्स्की पुल के पास रूसी सेना को रोकने के लिए जमकर संघर्ष किया. 25 फरवरी की आधी रात को, रूसी सेना हमलावर हो गई.
लेफ्टिनेंट पाल्चेंको और उनकी बटालियन रूसी टैंकों को रोकने के लिए वहां मौजूद थी.
लेफ्टिनेंट पाल्चेंको बताते हैं, "मेरे टैंक ने कुछ हमला झेला और इसके बाद मेरे टैंक का सिस्टम डाउन हो गया. हमें सब कुछ मैन्युअल रूप से करना पड़ा, जैसा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान टी-34 टैंकों में करना पड़ता था."

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आम लोगों का साथ
रूसी सेना मज़बूत भी थी और आक्रामक भी, इसलिए लेफ्टिनेंट पाल्चेंको और उनकी बटालियन को पुल से पीछे हटना पड़ा. लेकिन उस रात वे पुल पर कई बार गए. टैंकों और यूक्रेनी पैराट्रूपर्स को रूसी सैनिकों को पुल पार करने से रोकना था.
लेफ्टिनेंट पाल्चेंको तब 23 साल के ही थे, लेकिन उन्हें देश के सबसे ब़ड़े सैन्य सम्मान, हीरो ऑफ़ यूक्रेन से नवाजा गया.
इनके संघर्ष से माइकोलेएव को अपना बचाव तैयार करने के लिए कुछ और दिन मिल गया. यूक्रेन के सैनिकों और नागरिकों से बने दस्तों के बीच तालमेल और संवाद से पता चला कि अहम समय का सदुपयोग किया गया था.

जनरल मारचेंको याद करते हैं, "हमारी मदद करने के लिए माइकोलेएव के गवर्नर विटाली किम थे, जिनका आम लोगों से बेहतरीन संवाद था. हमें गढ्ढा खोदने वालों की आवश्यकता थी, उन लोगों ने जल्दी जल्दी में गढ्ढों को खोदा. हमें कंक्रीट ब्लॉक और टैंकों को रोकने के लिए उतार-चढ़ाव वाले अवरोधों की आवश्यकता थी लेकिन यह सब आधे दिन में हो गया."
स्थानीय नागरिक लगातार रूसी सैनिकों की निगरानी करते थे और उनकी जानकारी यूक्रेनी सैनिकों को देते थे.
मेजर जनरल मारचेंको कहते हैं, "हमारे आम लोगों ने बख्तरबंद सैन्य वाहनों को नष्ट कर दिया और सैनिकों को कैदी बना लिया. हमने रूस की सेना को रोका क्योंकि हमारे साथ आम लोग खड़े थे."
(अन्ना तसायबा की रिपोर्टिंग के साथ)
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