यूक्रेन युद्ध की बरसी पर रूस, चीन, दक्षिण अफ़्रीका करेंगे ये काम, अमेरिका नाराज़

रूसी नौसेना के जंगी जहाज़ों का बेड़ा

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दक्षिण अफ़्रीका आने वाले हफ़्तों में रूस और चीन के साथ मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने जा रहा है.

तीनों देशों के बीच ये सैन्य अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है, जब यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग को भी एक साल पूरा होने जा रहा है.

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले साल 24 फरवरी से सैन्य संघर्ष की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर गंभीर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे.

पिछले एक साल से पश्चिम के देश यूक्रेन को युद्ध में सहायता के रूप में अत्याधुनिक हथियारों से लेकर दूसरे तरह की मदद उपलब्ध करवा रहे हैं.

हाल ही में अमेरिका ने एम1 अबराम्स टैंक, जर्मनी ने लैपर्ड टू टैंक और ब्रिटेन ने चैलेंजर 2 टैंक देने का फैसला किया है.

अमेरिका समेत पश्चिमी देश पिछले एक साल से दुनिया भर में चीन को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं.

यही नहीं, रूस के ख़िलाफ़ खड़े नहीं होने वाले देशों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

दक्षिण अफ़्रीका के चीन और रूस के साथ सैन्य अभ्यास में शामिल होने पर भी अमेरिका की ओर से आलोचना की गई है.

रूसी नौसैनिक

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कहां हो रहा है ये सैन्य अभ्यास

रूस और चीन के साथ दक्षिण अफ़्रीका का ये नौसैनिक युद्ध अभ्यास दक्षिणी अफ़्रीकी तट के पास हिंद महासागर क्षेत्र में 17 फरवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा.

दक्षिण अफ़्रीका की नेशनल डिफ़ेंस फोर्स ने कहा है कि उसकी सशस्त्र सेना के 350 सदस्य इस ड्रिल में हिस्सा लेंगे.

रूस ने कहा है कि वह अपनी एडमिरल गोर्शकोव वॉरशिप को इस युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भेजेगा. रूस का ये युद्धपोत ज़िरकॉन हायपर सॉनिक मिसाइलों से लैस है.

ये मिसाइलें आवाज़ से नौ गुना अधिक गति पर उड़ते हुए एक हज़ार किलोमीटर की रेंज में निशाना लगा सकती हैं.

रूस की ज़िरकॉन मिसाइल

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दक्षिण अफ़्रीका के सिक्योरिटी स्टडीज़ इंस्टीट्यूट से जुड़ी डेनिस रेवा ने कहा है कि रूस 'ये दिखाने की कोशिश करेगा कि यूक्रेन में नुकसान होने के बावजूद उसकी सेना अभी भी बहुत ताक़तवर है.'

दक्षिण अफ़्रीका की नेशनल डिफ़ेंस अकेडमी ने इस बारे में ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई है, लेकिन 2019 में इन तीनों देशों के बीच हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास में सात युद्धक जहाज शामिल हुए थे.

इनमें इन तीनों देशों की ओर से एक-एक वॉरशिप भी शामिल रहा था. इसके साथ ही ईंधन की आपूर्ति करने वाले और सर्वेक्षण करने वाले जहाज़ शामिल रहे थे.

उस युद्ध अभ्यास में तटवर्ती क्षेत्रों में आग लगने और बाढ़ आने पर बचाव अभियान चलाने से लेकर समुद्री डाकुओं से जहाज वापस हासिल करने जैसी गतिविधियां शामिल थीं.

रूसी सुपर याट नॉर्ड

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दक्षिण अफ़्रीका की आलोचना क्यों?

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बीती जनवरी में बताया, 'अमेरिका रूस के साथ सैन्य अभ्यास में शामिल होने वाले किसी भी देश को लेकर चिंतित है क्योंकि रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा हुआ है.'

दक्षिण अफ़्रीका इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में रूसी आक्रमण की निंदा के लिए हुए मतदान से भी अलग रह चुका है.

इसके साथ ही दक्षिण अफ़्रीका ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था. प्रतिबंध झेल रहे रूसी ऑलिगार्क एलेक्सी मोरडोशोव के सुपर याट को केपटाउन में ठहरने की अनुमति दी गई थी.

रूस के प्रतिबंधित कारगो शिप लेडी आर को दक्षिण अफ़्रीकी नौसैनिक अड्डे पर भी सामान उतारने की अनुमति दी गई थी.

हालाँकि, दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने कहा था कि इस जहाज में गोला-बारूद था जो काफ़ी पहले पहुंच जाना चाहिए था.

सोमाली समुद्री लुटेरा

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दक्षिण अफ़्रीका ने ये भी बताया है कि उसने अमेरिका के साथ साल 2011 से अब तक चार संयुक्त युद्ध अभ्यास में हिस्सा लिया है. इसके साथ ही उसने फ्रांस और जर्मनी के साथ हुई ड्रिल में भी हिस्सा लिया था.

जनवरी में रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोफ़ के दौरे पर दक्षिण अफ़्रीका के विदेश मंत्री डॉ नलेदी पंडोर ने कहा था, 'सभी देश दुनियाभर में मित्रवत राष्ट्रों के साथ सैन्य युद्धाभ्यासों में हिस्सा लेते हैं.'

उन्होंने कहा था कि दक्षिण अफ़्रीका को उसकी पसंद के देशों के साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास से रोकने की कोशिश करना अंतरराष्ट्रीय परंपरा का उल्लंघन है.

पुतिन

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रूस के साथ दक्षिण अफ़्रीका के रिश्ते

दक्षिण अफ़्रीका के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संस्थान की प्रमुख एलिज़ाबेथ सिदिरोपॉलस के मुताबिक़, दक्षिण अफ़्रीका इस युद्ध अभ्यास में इसलिए हिस्सा ले रहा है क्योंकि उसकी सेना के पास फंडिंग की कमी है.

नौसेना की प्राथमिकता अपने समुद्री क्षेत्र में मछली पालन को सुरक्षा देने के साथ-साथ हिंद महासागर में समुद्री डाकुओं का सामना करना है.

उन्होंने कहा, "दक्षिण अफ़्रीका को दूसरे मुल्कों के साथ मिलकर अपनी क्षमता विकसित करने की ज़रूरत है ताकि समुद्री क्षेत्र में आती समुद्री लुटेरों जैसी चुनौतियों का सामना किया जा सके."

दक्षिण अफ़्रीका की सत्तारूढ़ पार्टी अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस के रूस के साथ काफ़ी पुराने रिश्ते हैं.

साल 1992 में चीनी नेता जियांग ज़ेमिन के साथ नेल्सन मंडेला

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लंदन स्थित थिंक टैंक चैटम हाउस से जुड़े डॉ एलेक्स वाइन्स कहते हैं कि ये संबंध साल 1994 से पहले की सरकारों के दिनों से हैं.

वह कहते हैं, "एएनसी के वृद्ध नेताओं के रूस के साथ भावनात्मक संबंध हैं क्योंकि रूस ने उनके संघर्ष में लगातार मदद पहुंचाई थी. ऐसे में दक्षिण अफ़्रीका के लिए यूक्रेन की वजह से रूस से मुंह मोड़ना मुश्किल था."

रूस, चीन और दक्षिण अफ़्रीका के बीच नए दौर में स्थापित संबंध भी हैं क्योंकि वे एक दूसरे से ब्रिक्स गठबंधन से जुड़े हुए हैं.

इस समूह में ब्राज़ील और भारत भी शामिल हैं जो दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं.

Dr Pandor and Lavrov

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रूस और चीन क्या चाहते हैं?

सिदिरोपॉलस कहती हैं कि इस साल होने जा रहे सैन्य अभ्यास से अगर किसी को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है तो वो रूस है.

वह कहती हैं, "यह दिखाता है कि रूस अभी भी इतनी दूर अपनी ताक़त का प्रदर्शन कर सकता है. दुनिया में अभी भी उसके सहयोगी मौजूद हैं. ये ड्रिल उन्हें ये कहने का मौक़ा देगी कि दुनिया नहीं, सिर्फ़ पश्चिमी देश रूस के ख़िलाफ़ हैं."

डॉ वाइन्स मानती हैं, ''चीन अपने बंदरगाहों से अफ़्रीकी ठिकानों पर पहुंचने वाले जहाजों के लिए समुद्री रास्ते खुले रखना चाहता है. वह अफ़्रीकी तट के परे हिंद महासागर में भी अपनी नौसैनिक ताक़त को स्थापित करना चाहता है.''

वह बताती हैं, ''चीन पहले ही पूर्वी अफ़्रीकी तटवर्ती क्षेत्र में समुद्री लुटेरों से बचने के लिए जिबूती को नौसैनिक अड्डे के रूप में इस्तेमाल करता है. वह संभवत: कुछ और अड्डे बनाने पर विचार कर रहा है.''

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