यूक्रेन युद्ध: रूस की सेना ने किया सोलेदार पर कब्ज़े का दावा, क्यों अहम है ये शहर?

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- Author, रियलिटी चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ये सेटेलाइट इमेज बीते मंगलवार को जारी की गई थी. इसमें यूक्रेन का पूरा सोलेदार शहर तबाह दिख रहा है.
रूस की सेना ने बताया है कि अब इस शहर पर उसका 'कब्ज़ा' है और ये उसके अभियान में एक 'अहम' कदम है लेकिन यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस शहर पर कब्ज़े को लेकर 'खोखला प्रचार' कर रहा है. वहां लड़ाई अब भी जारी है.
सोलेदार शहर रूस के लिए दो वजह से अहम है. जानकारों की राय में एक तो इस 'जीत' से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रूस में अपने विरोधियों को चुप कराने का मौका मिलेगा. दूसरे ये शहर प्राकृतिक संसाधनों के मामले में संपन्न है. रणनीतिक लिहाज से भी ये शहर अहम है.
इस शहर पर कब्ज़े की लड़ाई पूरे संघर्ष में 'सबसे खूनी जंग' साबित हुई है. रूस की सेना ने दावा किया है, 'सोलेदार पर कब्ज़े के बाद पास के शहर बख़मुत में सैनिकों को भेजने में आसानी होगी और वहां यूक्रेन की सेना की पहुंच को रोका जा सकेगा.'
रूसी सेना ने जीत का एलान पूरे आत्मविश्वास के साथ किया, लेकिन यूकेनी अधिकारियों ने कहा कि 'सोलेदार में लड़ाई अब भी जारी है, रूस सिर्फ 'जीत का झूठा शोर' मचा रहा है.
रूस पिछले एक महीने से लगातार यूक्रेन पर हावी होने की कोशिश में जुटा है लेकिन इस दौरान किसी भी शहर पर कब्ज़े का ऐसा दावा सामने नहीं आया, जिसे यूक्रेन ने खारिज़ नहीं किया हो.
सोलेदार पर नियंत्रण का मामला ऐसा ही है.
अलग-अलग दावे
रूसी सेना सोलेदार पर कब्ज़े का दावा कर रही है. चार दिन पहले ही रूस की तरफ से भाड़े पर लड़ने वाले येवगेनी प्रिगोज़िन ने एलान कर दिया था कि उनके 'वैगनर यूनिट' ने पूरे सोलेदार शहर को कब्जे में ले लिया है.
प्रिगोज़िन ने अपने दावे के पक्ष में जो तस्वीर जारी की थी, उसे देखकर लगा भी कि ऐसा हो सकता है.
लेकिन एक तो वैगनर के लड़ाके रूसी सेना का हिस्सा नहीं है और दूसरे रूसी रक्षा मंत्रालय ने ये बयान जारी कर ये कह दिया कि सोलेदार में 'लड़ाई अभी जारी है.'
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी कहा, 'सोलेदार में लड़ाई अभी जारी है. शहर पर कब्ज़े के लिए बेताब रूसी सैनिकों के सामने हम डटे हुए हैं. हमारे सैनिक उन्हें आगे बढ़ने नहीं दे रहे.'

सोलेदार इतना अहम क्यों?
ये छोटा सा शहर यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम शहर बख़मूत से महज 10 किलोमीटर दूर है. जैसा कि रूसी सेना ने दावा किया, सोलेदार पर कब्ज़े का मतलब होगा यूक्रेन के कई शहर रूसी तोपों के सीधे निशाने पर आ जाएंगे.
सोलेदार में नमक की गहरी खादाने हैं, जिनका इस्तेमाल रूसी सेना अपने सैनिकों और हथियारों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में कर सकती है.
इस तरह का एक वीडियो टेलीग्राम के रूसी चैनल पर जारी किया गया है. हालांकि बीबीसी इस वीडियो के असली होने की पुष्टि नहीं करता लेकिन इस वीडियो में प्रिगोज़िन सोलेदार की एक नमक खादान में अपने सैनिकों के साथ दिख रहे हैं.
नमक की इन खादानों में गहरी सुरंगों का जाल है जो रूसी सेना के लिए यूक्रेन के कब्ज़े वाले इलाकों में दाखिल होने के लिए रणनीतिक रूप से अहम हो सकती है.
हालांकि ये साफ नहीं है कि सुरंगों के नेटवर्क में कहां तक पहुंचा जा सकता है और ये कहां जाकर ख़त्म होती हैं.

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सोलेदार की खादानों में नमक के साथ बड़ी मात्रा में जिप्सम जैसा बहुमूल्य खनिज है. खदानों पर जिसका नियंत्रण होगा, वो खनिज के जरिए बड़ा राजस्व जुटा सकता है.
लेकिन सोलेदार की लड़ाई में जो सबसे अहम बात है वो है, इसका सांकेतिक रुप से महत्वपूर्ण होना.
यूक्रेन में बीबीसी के प्रतिनिधि जेम्स वाटरहाउस बताते हैं, "रूसी सेना अगर सोलेदार को जीतने के लिए सबकुछ दांव पर लगा रही है तो इसके पीछे बड़ी वजह है प्रोपेगेंडा के मोर्चे पर बढ़त. इसका मक़सद है राष्ट्रपति पुतिन के हाथ जीत की एक ट्रॉफी थमाना, जिसके जरिए वो रूस में अपने बढ़ते आलोचकों का मुंह बंद करा सकें."

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बख़मुत की अहमियत क्या है?
इस शहर पर कब्ज़ा निश्चित तौर पर रूसी सेना के लिए काफी फ़ायदेमंद होगा.
रॉयल यूनाइटेड इंस्टीट्यूट में यूरोपियन सिक्योरिटी पर रिसर्च कर रहे एडवर्ड अर्नोल्ड के मुताबिक, "पूर्वी इलाक़े में जिस तरह से रूसी सेना सितंबर से ही भारी दवाब का सामना कर रही है, बख़मुत पर कब्ज़ा उनका हौसला बढ़ाने वाला साबित होगा."
हालांकि ये कब्जा युद्ध के नतीजों के लिहाज से ज़्यादा रणनीतिक महत्व वाला नहीं होगा.

युद्ध में भाड़े के लड़ाकों की भूमिका
यूक्रेन के खिलाफ़ अब तक की जंग में वैगनर ग्रुप काफी प्रभावशाली बनकर उभरा है. युद्ध के मोर्चों पर इसके लगातार आगे बढ़ने के पीछे पूरी योजना है इसके लीडर प्रिगोज़िन की.
प्रिगोज़िन का दावा है कि सोलेदार की लड़ाई में सिर्फ उनके लड़ाकों ने ही मोर्च संभाला है. हालांकि रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है, 'ऐसा नहीं है, सोलेदार में रूसी सैनिक भी लड़ रहे हैं.'
सोलेदार और बख़मुत ये दो ऐसे इलाक़े हैं जहां रूसी सेना फ्रंट पर मौजूद है. बाकी सरहदी इलाक़ों में सेना की प्रगति से राष्ट्रपति पुतिन नाखुश हैं.
पुतिन की ये नाखुशी इस एक फैसले से भी जाहिर हुई. रूसी सेना के हाई कमान ने यूक्रेन में लड़ रही सेना की कमान संभाल रहे जनरल को हटा दिया. उस जनरल को अभी तीन महीने पहले ही यूक्रेन में रूसी सेना को आगे बढ़ाने के लिए तैनात किया गया था.
इंस्टीट्यूट ऑफ वॉर स्टडीज़ के मुतबिक 'सोलेदार और बख़मुत में प्रिगोज़िन घोषित और अघोषित लड़ाकों के ग्रुप का नेतृत्व करते रहेंगे, ये जताने के लिए भी कि रूसी सेना में अकेला उनका ही एक समूह है जो रूस के लिए वांछित नतीजे हासिल कर सकता है.'
प्रिगोज़िन का वैगनर ग्रूप दक्षिण अफ्रीका के कई देशों में अहम भूमिका निभा चुका है, जहां सरकारें बाग़ी विद्रोहियों से जूझ रही थीं. लड़ाई के दौरान ये लड़ाके खनिज और दूसरे संसाधनों पर भी कब्ज़ा जमा लेते हैं.
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